AAP छोड़ने पर बोले राज्यसभा सांसद विक्रमजीत साहनी- पार्टी में दम घुट रहा था, अब पंजाब की सेवा का नया रास्ता
News India Live, Digital Desk:आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची सियासी उठापटक के बीच राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने चुप्पी तोड़ते हुए बड़ा धमाका किया है। पार्टी से नाता तोड़ने के बाद साहनी ने एक तीखा बयान जारी कर 'आप' के नेतृत्व और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर पंजाब के हितों और पंथिक मुद्दों की अनदेखी की जा रही थी, जिसके चलते उनका दम घुट रहा था। साहनी के इस बयान ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि वे उन सात राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में पार्टी से किनारा कर भाजपा (BJP) का दामन थामा है।
'स्वाभिमान से समझौता नहीं': साहनी ने खोलीं परतें विक्रमजीत सिंह साहनी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे किसी निजी लालच के लिए नहीं, बल्कि सिद्धांतों की रक्षा के लिए अलग हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर एक खास किस्म का 'कंट्रोल' हावी हो गया था, जहाँ चुने हुए प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने की आजादी नहीं थी। साहनी के मुताबिक, उन्होंने कई बार पंजाब के ज्वलंत मुद्दों को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा, लेकिन हर बार उन्हें अनसुना कर दिया गया। उन्होंने कहा, "जब आप जनता की आवाज नहीं बन सकते, तो उस पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।"
पंजाब की सेवा और नया सियासी सफर अपने भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए साहनी ने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य पंजाब का विकास और सिख समुदाय के गौरव को बहाल करना है। भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने संकेत दिया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पंजाब की समस्याओं का बेहतर समाधान हो सकता है। साहनी ने कहा कि वे राज्यसभा में पंजाब की आवाज को और अधिक मुखरता से उठाएंगे। जानकारों का मानना है कि साहनी का जाना 'आप' के लिए पंजाब में एक बड़ा झटका है, क्योंकि वे न केवल एक सांसद थे बल्कि एक कद्दावर उद्यमी और समाजसेवक के रूप में भी गहरी पैठ रखते हैं।
AAP में मची रार और बागियों के सुर विक्रमजीत सिंह साहनी का यह बयान उस समय आया है जब आम आदमी पार्टी अपने बागियों के खिलाफ 'राइट टू रिकॉल' जैसे अस्त्र इस्तेमाल करने की बात कह रही है। इस पर पलटवार करते हुए साहनी ने कहा कि पार्टी को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि आखिर पुराने और वफादार साथी एक-एक कर क्यों छोड़कर जा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि वे कानूनी और नैतिक रूप से किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा तेज: क्या होगा अगला कदम? विक्रमजीत साहनी के इस कदम ने पंजाब भाजपा को एक नया और प्रभावशाली चेहरा दे दिया है। सियासी पंडितों का मानना है कि साहनी के जरिए भाजपा पंजाब के शहरी और सिखों के एक बड़े वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करेगी। वहीं, 'आप' अब साहनी और अन्य बागियों के प्रभाव को कम करने के लिए अपनी नई रणनीति तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में साहनी कुछ और बड़े खुलासे कर सकते हैं, जिससे पंजाब की सियासत में और गर्माहट आने के आसार हैं।