Rajnath Singh Statement : वंदे मातरम ने देश को आज़ादी दिलाई, लेकिन हमने उसे एक्स्ट्रा कलाकार बनाकर रख दिया

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News India Live, Digital Desk : हम सब बचपन से स्कूल की असेंबली में 'जन-गण-मन' और 'वंदे मातरम' गाते आए हैं। हमारे लिए दोनों का सम्मान बराबर है। लेकिन क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि इतिहास में कहीं न कहीं 'वंदे मातरम' को वो दर्जा नहीं मिल पाया जिसका वो असली हकदार था? आज इसी मुद्दे पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने एक ऐसी बात कही है, जो सीधे दिल पर लगती है।

एक कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने बहुत बेबाकी से कहा कि "वंदे मातरम के साथ न्याय नहीं हुआ।" (Justice not done to Vande Mataram). उनकी बातों में एक टीस थी, एक मलाल था।

आज़ादी की लड़ाई का 'पावर बैंक'

राजनाथ सिंह ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए याद दिलाया कि जब देश अंग्रेजों का गुलाम था, तब 'जन-गण-मन' नहीं, बल्कि 'वंदे मातरम' ही वो मंत्र था जिसने सोए हुए हिंदुस्तान को जगाया था।

  • चाहे भगत सिंह हों या चंद्रशेखर आजाद, फांसी के फंदे पर झूलते वक्त उनके होंठों पर यही गीत होता था।
  • अंग्रेज इस गीत से इतना डरते थे कि इसे गाने पर लाठियां बरसाते थे।

रक्षा मंत्री का कहना था कि जिस गीत ने क्रांति की मशाल जलाई, उसे आज़ादी मिलने के बाद वो 'सिंहासन' नहीं मिला जो उसे मिलना चाहिए था।

फिल्मों के 'एक्स्ट्रा' कलाकार जैसी हालत?

राजनाथ सिंह ने अपनी बात को समझाने के लिए बहुत ही अनोखा उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि "वंदे मातरम" को किसी फिल्म के "एक्स्ट्रा कलाकार" (Extra Artist) की तरह ट्रीट किया गया। जैसे फिल्मों में मेन हीरो कोई और होता है और एक्स्ट्रा कलाकार बस भीड़ बढ़ाने के लिए होते हैं, वैसे ही हमने इस जादुई गीत को साइडलाइन कर दिया।

हालांकि, बाद में इसे 'राष्ट्रगीत' (National Song) का दर्जा दिया गया और 'जन-गण-मन' को 'राष्ट्रगान' (National Anthem) बनाया गया, लेकिन राजनाथ सिंह का मानना है कि इसे लेकर जो जुनून और प्राथमिकता होनी चाहिए थी, उसमें कहीं न कहीं कमी रह गई।

क्या है 'वंदे मातरम' का असली महत्व?

बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखा गया यह गीत सिर्फ़ शब्द नहीं है, बल्कि भारत माँ की वंदना है। राजनाथ सिंह ने साफ़ कहा कि उनका मकसद किसी विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि यह याद दिलाना है कि हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों और उस जज़्बे को नहीं भूलना चाहिए जिसने हमें आज़ाद करवाया।

उन्होंने अपील की कि अब समय आ गया है कि हम 'वंदे मातरम' को सिर्फ एक गीत न मानें, बल्कि उसे अपने जीवन और राष्ट्रभक्ति का हिस्सा बनाएं। यह गीत हमारी आत्मा है, और आत्मा कभी 'एक्स्ट्रा' नहीं हो सकती।

आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या आपको भी लगता है कि 'वंदे मातरम' को और ऊंचा स्थान मिलना चाहिए था?