बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में जल्द शुरू होगी अत्याधुनिक कार्टी (CAR-T) सेल थेरेपी, खुलेगा राजस्थान का पहला सेंटर
मेडिकल साइंस और स्वास्थ्य जगत के इतिहास में राजस्थान और विशेषकर बीकानेर शहर से एक बहुत ही बड़ी, ऐतिहासिक और राहत भरी खबर सामने आ रही है, जिसने गंभीर रूप से पीड़ित कैंसर मरीजों के जीवन में एक नई उम्मीद की किरण जगा दी है। देश और दुनिया में लाइलाज मानी जाने वाली और हर साल लाखों लोगों की जान लेने वाली इस भयानक बीमारी के इलाज के लिए अब एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक का रास्ता साफ हो गया है जो चौथे स्टेज के कैंसर रोगियों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। बीकानेर के प्रसिद्ध और संभाग के सबसे बड़े पीबीएम (PBM) अस्पताल में जल्द ही देश की सबसे आधुनिक और क्रांतिकारी कार्टी (CAR-T) सेल थेरेपी की शुरुआत होने जा रही है, जिसके लिए अस्पताल परिसर में राजस्थान का पहला विशेष सेंटर खोला जा रहा है। इस चिकित्सा तकनीक के आने से अब न केवल बीकानेर और राजस्थान, बल्कि आसपास के कई अन्य राज्यों से आने वाले उन कैंसर रोगियों को भी नया जीवन मिलने की प्रबल संभावना बन गई है, जिन्हें देश के बड़े मेट्रो सिटीज के महंगे अस्पतालों में भी निराशा हाथ लग चुकी थी। इस अभूतपूर्व चिकित्सा उपलब्धि से राजस्थान का चिकित्सा ढांचा वैश्विक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई हासिल करने जा रहा है, जिससे आम और गरीब तबके के मरीजों को भी अत्याधुनिक इलाज का लाभ बेहद सुलभ दरों पर मिल सकेगा।
क्या है कार्टी (CAR-T) सेल थेरेपी और कैसे काम करती है यह जादुई तकनीक
चिकित्सा जगत में कार्टी सेल थेरेपी (Chimeric Antigen Receptor T-cell Therapy) को कैंसर के इलाज में अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी वैज्ञानिक चमत्कार माना जा रहा है, जो पारंपरिक कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी से बिल्कुल अलग तरीके से काम करती है। इस अत्याधुनिक थेरेपी के अंतर्गत मरीज के शरीर से खुद उसके अपने ही खून से रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम की टी-सेल्स (T-cells) को निकाला जाता है और फिर उन्हें अत्यधिक उन्नत और आधुनिक प्रयोगशालाओं में जेनेटिक रूप से मॉडिफाइड यानी संशोधित किया जाता है। इन संशोधित कोशिकाओं को विशेष रूप से इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है कि वे शरीर के भीतर प्रवेश करते ही सीधे तौर पर केवल कैंसर की घातक कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें पूरी तरह से नष्ट कर दें और स्वस्थ कोशिकाओं को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचाएं। पारंपरिक कैंसर उपचारों के दौरान मरीजों को भारी शारीरिक कष्ट, बाल झड़ना, कमजोरी और अन्य गंभीर दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ता है, लेकिन कार्टी सेल थेरेपी शरीर की अपनी प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को कैंसर के खिलाफ एक अचूक हथियार में बदल देती है। यही कारण है कि जिन मरीजों को डॉक्टरों ने चौथे स्टेज यानी अंतिम चरण में जवाब दे दिया था और जिनके बचने की उम्मीद न के बराबर रह जाती है, उनके लिए यह थेरेपी एक नया जीवन दान साबित हो रही है।
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सेंटर खुलने से राजस्थान और उत्तर भारत के मरीजों को मिलेगा फायदा
अब तक इस प्रकार की बेहद खर्चीली और जटिल कार्टी सेल थेरेपी के लिए मरीजों को मुंबई, दिल्ली या देश के कुछ चुनिंदा अत्यधिक महंगे निजी अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती थी, जहां इसका खर्च कई लाख या करोड़ों रुपये तक पहुंच जाता था। लेकिन बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में इस अत्याधुनिक सेंटर के खुलने से राजस्थान के आम और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह विश्वस्तरीय इलाज अपने ही गृह राज्य में आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। बीकानेर का पीबीएम अस्पताल पहले से ही उत्तर भारत के लाखों मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का एक बहुत बड़ा केंद्र रहा है, जहां बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर के साथ-साथ पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इस नए सेंटर के शुरू होने से इन सभी इलाकों के कैंसर पीड़ितों को अब बाहर के महंगे शहरों में धक्के खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे कम खर्च तथा बेहतर चिकित्सीय देखरेख में अपना इलाज करा सकेंगे। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के इस संयुक्त प्रयास से मेडिकल हब के रूप में बीकानेर की साख में एक और बड़ा गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है, जिसकी पूरे देश में सराहना हो रही है।
कैंसर के खिलाफ जंग में मील का पत्थर साबित होगा यह कदम
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का नाम सुनते ही मरीजों और उनके परिवारों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है और खासकर जब बीमारी अंतिम यानी चौथे स्टेज पर पहुंच जाती है, तो उम्मीदें पूरी तरह टूट जाती हैं। ऐसे समय में पीबीएम अस्पताल में कार्टी सेल थेरेपी सेंटर की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय चिकित्सा विज्ञान अब दुनिया के किसी भी विकसित देश के मुकाबले पीछे नहीं है और अत्याधुनिक तकनीकों को छोटे शहरों तक पहुंचाया जा रहा है। इस सेंटर के शुरू होने से न केवल मौतों के आंकड़ों में कमी आएगी, बल्कि कैंसर रिसर्च और ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में काम करने वाले युवा डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को भी बहुत कुछ सीखने का अवसर मिलेगा। अस्पताल प्रशासन ने इस सेंटर के लिए उच्च कोटि के उपकरण, विशेष रूप से प्रशिक्षित डॉक्टर, सर्जन, इम्यूनोलॉजिस्ट और तकनीशियनों की एक समर्पित टीम तैयार करनी शुरू कर दी है ताकि इलाज की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कोई कमी न रहे। आने वाले समय में यह केंद्र राजस्थान के चिकित्सा इतिहास में एक स्वर्णिम मील का पत्थर साबित होगा, जो अनगिनत बेसहारा और लाचार मरीजों की जिंदगी में फिर से रोशनी भरने का काम करेगा।