पूर्व MLA भड़ाना हत्याकांड में मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म पर लगे संगीन आरोप
राजस्थान के भरतपुर जिले में पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता अतर सिंह भड़ाना की नृशंस हत्या के मामले ने अब अत्यंत विकराल राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड को लेकर राज्य की सियासत से लेकर पड़ोसी राज्य हरियाणा तक में भारी उबाल देखने को मिल रहा है। पीड़ित परिवार और गुर्जर समाज के नेताओं ने राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म पर इस पूरे घटनाक्रम में संलिप्तता और मुख्य आरोपियों को संरक्षण देने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। हरियाणा के सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दिग्गजों ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। "अगर प्रशासन ने सही तरीके से इलाज (न्याय) नहीं किया, तो हमें दूसरा इलाज भी आता है," जैसी सख्त चेतावनियां अब सार्वजनिक मंचों से गूंज रही हैं, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।
क्रेशर प्लांट और रास्ते के विवाद में ली गई पूर्व विधायक की जान
यह पूरा मामला भरतपुर जिले के भौंडा गांव स्थित एक स्टोन क्रेशर प्लांट और वहां तक जाने वाले रास्ते के लंबे समय से चले आ रहे विवाद से जुड़ा हुआ है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, 11 अक्टूबर की शाम जब पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना अपने क्रेशर प्लांट पर पहुंचे, तो पूर्व नियोजित साजिश के तहत दर्जनों हथियारों से लैस लोगों की भीड़ ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों, सरियों और गंडासे से उन पर तब तक ताबड़तोड़ वार किए जब तक कि वे लहूलुहान होकर गिर नहीं पड़े। उनके निजी सुरक्षा गार्ड ने जान पर खेलकर उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह भी गंभीर रूप से घायल हो गया। गंभीर हालत में एसएमएस अस्पताल जयपुर ले जाते समय पूर्व विधायक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म पर क्यों उठ रही हैं उंगलियां?
इस जघन्य हत्याकांड के बाद से ही गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म लगातार सवालों के घेरे में हैं। घटना से महज कुछ ही दिन पहले (27 सितंबर) पीडब्ल्यूडी डाक बंगले में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना और मंत्री बेढ़म के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। भड़ाना ने सार्वजनिक रूप से मंत्री पर उपेक्षा करने और विरोधी गुट को बढ़ावा देने के आरोप लगाए थे। अब भड़ाना के परिजनों और उनके समर्थकों का साफ कहना है कि इस हत्याकांड के मुख्य मास्टरमाइंड को मंत्री का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। हालांकि, दूसरी ओर मंत्री बेढ़म ने अपने सफाई में कहा है कि यह दो पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहा आपसी विवाद था और सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है।
'दूसरा इलाज भी आता है': हरियाणा से उठी निष्पक्ष CBI जांच और न्याय की मांग
अतर सिंह भड़ाना के तार हरियाणा के गुर्जर बाहुल्य इलाकों और राजनीतिक घरानों से भी गहराई से जुड़े हुए थे। उनकी निर्मम हत्या की खबर फैलते ही हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल और आसपास के जिलों में भारी जनाक्रोश देखा जा रहा है। हरियाणा से पहुंचे विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों ने भरतपुर पहुंचकर पुलिस और प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि राजनीतिक प्रभाव के कारण मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी में ढील बरती गई या मामले की लीपापोती करने की कोशिश हुई, तो हरियाणा से लेकर राजस्थान तक बड़ा उग्र आंदोलन खड़ा किया जाएगा। समाज के नेताओं ने स्पष्ट कहा कि अगर कानून निष्पक्षता से काम नहीं करेगा, तो जनता को अपना अधिकार छीनना और 'दूसरा इलाज' करना बखूबी आता है। पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्षता के लिए सीबीआई (CBI) जांच की मांग भी दोहराई है।
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई, आरोपियों के ठिकानों पर दबिश जारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राजस्थान पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर 30 नामजद और 60 से अधिक अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या, जानलेवा हमला और आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस की दर्जनों टीमें मुख्य आरोपी मुकेश फौजी और अन्य फरार हमलावरों की तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून के समक्ष सभी बराबर हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। बहरहाल, राजस्थान और हरियाणा की सीमाओं पर उपजे इस राजनीतिक और सामाजिक तनाव को देखते हुए पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है।