सड़ा हुआ सिस्टम ही कॉकरोच पैदा करता है', जयपुर पहुंचे अभिजीत दीपके ने खोला CJP नाम के पीछे का सबसे बड़ा राज

सड़ा हुआ सिस्टम ही कॉकरोच पैदा करता है', जयपुर पहुंचे अभिजीत दीपके ने खोला CJP नाम के पीछे का सबसे बड़ा राज

गुलाबी नगरी जयपुर में आयोजित एक विशेष वैचारिक टॉक शो के दौरान जाने-माने सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और कंटेंट क्रिएटर अभिजीत दीपके ने अपने चिरपरिचित अंदाज में देश की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक विमर्श पर तीखा प्रहार किया है। युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय दीपके ने देश की मौजूदा व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब किसी देश या राज्य का सिस्टम पूरी तरह सड़ जाता है, तो वह केवल 'कॉकरोच' जैसी प्रवृत्तियों को ही जन्म देता है। इसी के साथ उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया स्पेस में लंबे समय से चर्चा का विषय बने 'CJP' नाम के पीछे के छिपे हुए पूरे सच और रहस्य से भी पहली बार पर्दा उठा दिया। उनके इस बेबाक बयान और खुलासे के बाद जयपुर के बौद्धिक और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है।

जयपुर के मंच से व्यवस्था पर अभिजीत दीपके का सीधा प्रहार जयपुर में प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं की भारी मौजूदगी के बीच बोलते हुए अभिजीत दीपके ने समाज और प्रशासन के विभिन्न पहलुओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जमीनी हकीकत को समझने के लिए हमें व्यवस्था के खोखलेपन को देखना होगा। 'सड़ा सिस्टम कॉकरोच पैदा करता है' वाले अपने बयान को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जब बुनियादी संस्थाएं अपनी जवाबदेही भूल जाती हैं, तो समाज में नकारात्मक तत्वों का प्रभाव तेजी से बढ़ने लगता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे केवल मूकदर्शक न बनें, बल्कि सोशल मीडिया और अन्य लोकतांत्रिक माध्यमों का उपयोग कर व्यवस्था को आईना दिखाने का काम लगातार करते रहें।

डिजिटल गलियारों में गूंजने वाले 'CJP' नाम का असली राज खुला इस कार्यक्रम का सबसे प्रतीक्षित और रोचक क्षण वह था जब अभिजीत दीपके ने 'CJP' शब्द के पीछे की इनसाइड स्टोरी साझा की। इंटरनेट और यूट्यूब की दुनिया में इस नाम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। दीपके ने हंसते हुए मंच से इसका पूरा राज खोलते हुए बताया कि इस नाम की उत्पत्ति किसी बड़े रणनीतिक विचार से नहीं, बल्कि एक खास परिस्थितियों और सामाजिक-राजनीतिक विमर्श को धार देने के उद्देश्य से हुई थी। उन्होंने बताया कि किस तरह एक छोटा सा विचार देखते ही देखते एक बड़े डिजिटल अभियान में बदल गया और आज यह लाखों लोगों की आवाज बन चुका है। इस नाम के पीछे की कहानी सुनकर हॉल में बैठे सभी दर्शक दंग रह गए।

सोशल मीडिया का बदलता ट्रेंड और युवाओं की वैचारिक जिम्मेदारी दीपके ने अपने संबोधन में आधुनिक पत्रकारिता और पारंपरिक मीडिया के ढर्रे पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि आज के दौर में स्वतंत्र आवाजें और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स ही जनता से जुड़े असली मुद्दों को बिना किसी डर के उठा पा रहे हैं। जयपुर के इस मंच से उन्होंने कंटेंट क्रिएशन की बारीकियों को समझाते हुए कहा कि आज का युवा केवल मनोरंजन नहीं चाहता, बल्कि वह तार्किक और तथ्यात्मक विश्लेषण को ज्यादा पसंद करता है। यही वजह है कि लीक से हटकर की जाने वाली टिप्पणियां और सटीक विश्लेषण आज के डिजिटल दौर में सबसे ज्यादा वायरल हो रहे हैं।

जयपुर के युवाओं में भारी क्रेज, कार्यक्रम के बाद लगी प्रशंसकों की भीड़ राजस्थान की राजधानी जयपुर हमेशा से ही वैचारिक क्रांतियों और विमर्श का केंद्र रही है। यही कारण रहा कि अभिजीत दीपके को सुनने के लिए जयपुर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और सामाजिक संगठनों से जुड़े युवा बड़ी संख्या में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे। व्याख्यान समाप्त होने के बाद भी युवाओं के बीच उनके साथ बातचीत करने और सेल्फी लेने की होड़ मची रही। स्थानीय आयोजकों का कहना है कि इस तरह के बेबाक और स्वतंत्र विचार आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत हैं ताकि समाज में हर मुद्दे के दोनों पहलुओं पर खुलकर बात हो सके।

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