बीसलपुर बांध के कैचमेंट एरिया से आई राहत भरी खबर, त्रिवेणी नदी की तेज आवक से महज 48 घंटे में 27 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर
राजस्थान के लाखों लोगों की प्यास बुझाने वाले और अजमेर, जयपुर तथा टोंक जिलों की लाइफलाइन कहे जाने वाले प्रसिद्ध बीसलपुर बांध (Bisalpur Dam) को लेकर एक बेहद सुकूनभरी और उत्साहजनक खबर सामने आई है. पिछले कुछ हफ्तों से मानसून के सुस्त रवैये और बारिश की कमी के चलते बांध के घटते जलस्तर को लेकर आम जनता के साथ-साथ जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की भी चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही थीं. लेकिन कहते हैं कि प्रकृति जब मेहरबान होती है तो उम्मीदों के सारे दरवाजे अपने आप खुल जाते हैं. पिछले कुछ दिनों से बांध के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) में हुई झमाझम बारिश के बाद अब त्रिवेणी नदी का जल प्रवाह पूरे उफान पर आ चुका है, जिससे बीसलपुर बांध में पानी की ऐतिहासिक और तेज आवक दर्ज की गई है. इस प्राकृतिक जल बहाव के चलते मात्र 48 घंटे के भीतर बांध का जलस्तर चौंकाने वाले रूप से 27 सेंटीमीटर तक ऊपर उठ गया है, जिसने एक बार फिर से इस रेगिस्तानी सूबे के लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है.
त्रिवेणी नदी की तेज आवक और जलस्तर में अचानक आया भारी उछाल
जल संसाधन विभाग और स्थानीय मौसम विज्ञान केंद्र से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बीसलपुर बांध में पानी की आवक का मुख्य स्रोत मानी जाने वाली त्रिवेणी नदी इस समय अपनी पूरी रफ्तार के साथ बह रही है. बनास, डाई और खारी नदियों के संगम से मिलकर बनने वाली त्रिवेणी नदी का जलस्तर जैसे ही बढ़ा, वैसे ही उसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव बीसलपुर बांध के जल संग्रह पर पड़ना शुरू हो गया. पिछले दो दिनों के भीतर जिस तेजी से बांध के वाटर लेवल में 27 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, उसने पिछले सभी रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है. पानी के इस भारी सैलाब को देखकर बांध परियोजना से जुड़े इंजीनियर और अधिकारी भी पूरी तरह से मुस्तैद हो चुके हैं और लगातार 24 घंटे हर एक इंच पानी की निगरानी डिजिटल सेंसर तथा आधुनिक उपकरणों के जरिए की जा रही है. त्रिवेणी का यह तेज बहाव इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहा है कि यदि आने वाले कुछ और दिनों तक कैचमेंट एरिया में ऐसा ही बारिश का दौर जारी रहा, तो बांध का यह जलस्तर बहुत जल्द खतरे के निशान या पूर्ण भराव क्षमता की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा.
जयपुर, अजमेर और टोंक के निवासियों के लिए पानी की बड़ी चिंता हुई कम
बीसलपुर बांध केवल पानी का एक सामान्य जलाशय नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के तीन बड़े जिलों—जयपुर, अजमेर और टोंक के शहरी व ग्रामीण इलाकों की पेयजल आपूर्ति का एकमात्र सबसे बड़ा और मजबूत जरिया है. गर्मियों और मानसून के शुरुआती दौर में जब बारिश नहीं हो रही थी, तब बांध का गिरता हुआ जलस्तर हर किसी के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी बन चुका था, और यह डर सताने लगा था कि आने वाले महीनों में पानी का भीषण संकट पैदा हो सकता है. लेकिन पिछले 48 घंटों में हुई इस बंपर पानी की आवक और 27 सेंटीमीटर की शानदार बढ़ोतरी ने फिलहाल उस बड़े संकट को काफी हद तक टाल दिया है. स्थानीय प्रशासन और वाटर वर्क्स डिपार्टमेंट ने राहत की सांस ली है, क्योंकि इस अतिरिक्त पानी के संग्रह से आगामी महीनों के लिए पेयजल का कोटा सुरक्षित होने की उम्मीद बंध गई है. फिर भी, जल विभाग ने सभी नागरिकों से यह अपील करना नहीं भूला है कि पानी जीवन का सबसे अनमोल रत्न है, इसलिए जल संरक्षण के नियमों का पालन करना हमेशा हमारी नैतिक जिम्मेदारी रहनी चाहिए.
मानसून का नया दौर और बांध के पूर्ण भराव की उम्मीदें
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों के अनुसार, आने वाले दिनों में राजस्थान के कई जिलों में मानसून के और अधिक सक्रिय होने की पूरी संभावना है, जिससे बीसलपुर बांध के कैचमेंट एरिया में एक बार फिर से भारी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है. यदि ऊपर के इलाकों से पानी की यह निरंतर आवक ऐसे ही बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब बीसलपुर बांध अपने पूर्ण जलभराव क्षमता (Full Reservoir Level) के करीब पहुंच जाएगा और इसके गेट खोलने की नौबत आ सकती है. बांध के ओवरफ्लो होने का यह नजारा देखने के लिए हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग दूर-दूर से टोंक जिले का रुख करते हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन को भी भारी बढ़ावा मिलता है. किसानों के लिए भी यह जलस्तर किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि बांध से मिलने वाले सिंचाई के पानी से आगामी रबी की फसल को बंपर फायदा पहुंचेगा. कुल मिलाकर, त्रिवेणी नदी की इस मेहरबानी ने पूरे प्रदेश में एक नया उत्साह भर दिया है और हर कोई अब प्रकृति के इस अद्भुत रूप की सराहना कर रहा है.