राजस्थान निकाय चुनाव शेड्यूल बदला: 9 और 11 सितंबर को होगी वोटिंग, 14 को आएंगे नतीजे; जानें अपने क्षेत्र की नई तारीखें

राजस्थान निकाय चुनाव शेड्यूल बदला: 9 और 11 सितंबर को होगी वोटिंग, 14 को आएंगे नतीजे; जानें अपने क्षेत्र की नई तारीखें

राजस्थान में बजने वाली चुनावी रणभेरी के साथ ही सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश के कुल 309 नगरीय निकायों के लिए चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा किए जाने के बाद से ही शहरी इलाकों में राजनीतिक दलों और मतदाताओं के बीच हलचल तेज हो गई है। इस बार के चुनाव प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इसमें नगर निगमों से लेकर नगर परिषदों और पालिकाओं की तकदीर तय होनी है। चुनाव आयोग ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए कमर कस ली है। जैसे-जैसे तारीखें नजदीक आ रही हैं, प्रत्याशियों ने भी अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। गली-मोहल्लों से लेकर बड़े चौराहों तक हर तरफ चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। इस बार के चुनाव में कई तरह के नए बदलाव और निर्देश भी देखने को मिल रहे हैं, जिनकी जानकारी हर एक मतदाता के लिए होना बेहद जरूरी है ताकि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। आइए जानते हैं कि आपके अपने क्षेत्र में मतदान कब है और इस पूरे चुनाव शेड्यूल में क्या कुछ खास बदलाव किए गए हैं।

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 का पूरा शेड्यूल और चरणों की जानकारी

राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव इस बार दो मुख्य चरणों में संपन्न कराए जा रहे हैं। प्रशासनिक सुविधा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मतदान की तारीखों का जो नया शेड्यूल तय किया गया है, उसके तहत प्रथम चरण का मतदान 9 सितंबर को होगा, जबकि दूसरे चरण के तहत 11 सितंबर को वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव प्रक्रिया में कुल 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि कुछ चुनिंदा बड़े नगर निगमों और नगर परिषदों के मतदान की तिथियों में स्थानीय और प्रशासनिक समीकरणों को देखते हुए विशेष ध्यान रखा गया है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही संबंधित शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता पूरी तरह से प्रभावी हो चुकी है, जिसके बाद से किसी भी प्रकार की नई घोषणाओं या राजनीतिक फायदों पर रोक लग गई है। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है, ताकि कामगार और आम नागरिक भी बिना किसी परेशानी के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। इसके बाद सभी चरणों के मतों की गिनती एक साथ 14 सितंबर को की जाएगी, जिसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस शहर की सरकार पर किस दल का कब्जा होने जा रहा है। निकाय प्रमुखों और उपप्रमुखों के चुनाव के लिए भी तिथियां तय कर दी गई हैं, जिससे सितंबर के अंत तक पूरी प्रशासनिक तस्वीर साफ हो जाएगी।

नामांकन प्रक्रिया, नाम वापसी और चुनाव चिन्हों का पूरा गणित

शहरी निकाय चुनावों की इस सरगर्मी के बीच प्रत्याशियों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रत्याशियों को अपने-अपने वार्डों से पर्चा भरने का मौका दिया गया है। हालांकि, बीच में कुछ छुट्टियां होने के कारण नामांकन के दिनों को लेकर विशेष ध्यान रखना पड़ा है। सभी संबंधित कलेक्ट्रेट कार्यालयों और स्थानीय निकायों के दफ्तरों में नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए विशेष काउंटर बनाए गए हैं, जहां सुबह से ही उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। नामांकन पत्र दाखिल होने के बाद अगले दिन उनकी बारीकी से जांच की जाएगी, ताकि किसी भी अपात्र या त्रुटिपूर्ण आवेदन को समय रहते बाहर किया जा सके। इसके बाद उम्मीदवारों के पास अपने नाम वापस लेने का एक निश्चित समय होगा, जो कि चुनावी समीकरणों को पलटने में अहम भूमिका निभाता है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के ठीक बाद मैदान में डटे अंतिम प्रत्याशियों को चुनाव आयोग की तरफ से उनके अधिकारिक चुनाव चिन्ह यानी सिंबल आवंटित किए जाएंगे। चुनाव चिन्ह मिलते ही चुनावी प्रचार अपने चरम पर पहुंच जाएगा, क्योंकि प्रत्याशियों के पास अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए बहुत कम और सीमित समय बचेगा। राजनीतिक दलों के अलावा इस बार कई निर्दलीय और नए चेहरे भी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिससे मुकाबला काफी रोमांचक हो गया है।

मतदान के लिए वोटर लिस्ट और पहचान पत्र से जुड़े जरूरी निर्देश

किसी भी चुनाव में वोट डालने के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त यह होती है कि मतदाता का नाम संबंधित क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज हो। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन युवाओं की उम्र 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष पूरी हो चुकी है और यदि उनका नाम किसी कारणवश मतदाता सूची में नहीं जुड़ पाया था, तो उन्हें अपनी औपचारिकताएं पूरी करने का अंतिम अवसर दिया गया था। इसके बाद 31 अगस्त को फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है, जो इस चुनाव के लिए मुख्य आधार बनेगी। मतदान केंद्र पर वोट डालने जाने वाले नागरिकों के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य किया गया है। यदि किसी मतदाता के पास मुख्य मतदाता पहचान पत्र यानी एपिक कार्ड उपलब्ध नहीं है, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने इसके विकल्प के तौर पर 11 अन्य फोटोयुक्त वैकल्पिक दस्तावेजों को मान्यता दी है। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड, स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड या केंद्र-राज्य सरकार द्वारा जारी कर्मचारियों के आधिकारिक पहचान पत्र शामिल हैं। मतदाता इनमें से कोई भी एक मूल दस्तावेज दिखाकर आसानी से अपना वोट डाल सकेंगे। प्रशासन की ओर से सभी मतदाताओं से यह अपील की गई है कि वे किसी भी प्रलोभन या अफवाह से दूर रहकर अपने विवेक का इस्तेमाल करें और बढ़-चढ़कर इस लोकतांत्रिक पर्व में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करें।

आचार संहिता, ड्राई डे और सुरक्षा के कड़े प्रशासनिक इंतजाम

स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए हैं। आचार संहिता लागू होने के बाद से ही सार्वजनिक संपत्तियों पर पोस्टर-बैनर लगाने और दीवारों पर नारे लिखने जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके अलावा चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अशांति को रोकने के लिए निषेधाज्ञा लागू की गई है, जिसके तहत बिना अनुमति के जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने या हथियार लेकर चलने पर सख्त पाबंदी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, एक्स, व्हाट्सएप और यूट्यूब पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि कोई असामाजिक तत्व धार्मिक उन्माद या जातिगत द्वेष फैलाने वाला संदेश न फैला सके। आबकारी नियमों और चुनाव आचार संहिता के तहत मतदान के चरणों को ध्यान में रखते हुए विशेष 'ड्राई डे' (शुष्क दिवस) की घोषणा की गई है। प्रत्येक चरण के मतदान समाप्त होने से ठीक 48 घंटे पहले से लेकर मतदान संपन्न होने तक और मतगणना के दिन पूरे क्षेत्र में शराब की बिक्री, भंडारण और परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस दौरान होटल, बार, पब और देशी-अंग्रेजी शराब के ठेके पूरी तरह बंद रहेंगे। यदि कोई भी व्यक्ति या दुकानदार इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आबकारी अधिनियम के तहत भारी जुर्माने और जेल की सजा जैसी कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून तोड़ने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा ताकि आम जनता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का उपयोग कर सके।

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