सीएम के दौरे से पहले अनूपगढ़ में गरमाई सियासत, कांग्रेस नेताओं को थाने बुलाने पर भड़कीं विधायक शिमला नायक ने सरकार को घेरा

सीएम के दौरे से पहले अनूपगढ़ में गरमाई सियासत, कांग्रेस नेताओं को थाने बुलाने पर भड़कीं विधायक शिमला नायक ने सरकार को घेरा

राजस्थान के राजनीतिक पटल पर इन दिनों बयानों और प्रशासनिक एक्शन को लेकर माहौल लगातार गरमाया हुआ है. ऐसा ही एक तीखा मामला राज्य के अनूपगढ़ जिले से सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले पुलिस और स्थानीय राजनीतिक दलों के बीच जबरदस्त तनातनी देखने को मिली. अनूपगढ़ को पूर्व में मिले जिले का दर्जा निरस्त किए जाने के बाद से ही स्थानीय जनता और विपक्षी दलों में भारी आक्रोश व्याप्त है. इसी कड़ी में जब मुख्यमंत्री का यह पहला दौरा तय हुआ, तो राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई. स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर कांग्रेस पार्टी के कई प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं को थाने बुलाए जाने की खबर ने आग में घी का काम किया. इस कार्रवाई के बाद से ही कांग्रेस खेमे में भारी नाराजगी है और पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने इसे सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया है.

कांग्रेस नेताओं को थाने बुलाए जाने पर भड़कीं विधायक शिमला नायक

पुलिस द्वारा कांग्रेस पदाधिकारियों को थाने तलब किए जाने की खबर मिलते ही स्थानीय विधायक शिमला नायक अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ थाने पहुंच गईं. स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब विधायक के थाने पहुंचने पर पुलिस ने मुख्य द्वार को अंदर से बंद कर दिया. इसके बाद थाने के बाहर करीब एक घंटे तक पुलिस प्रशासन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और गहमागहमी का दौर चलता रहा. विधायक शिमला नायक ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की आवाज दबाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. उन्होंने अकेले अंदर जाने से इनकार करते हुए पुलिस के रवैए की कड़ी निंदा की. इस दौरान यूथ कांग्रेस सचिव और अन्य स्थानीय नेताओं को भी रोके जाने की बात सामने आई, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया.

पुलिस प्रशासन का पक्ष और कानून-व्यवस्था की दलील

इस पूरे घटनाक्रम के तूल पकड़ने के बाद पुलिस अधिकारियों ने अपनी सफाई पेश करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी नेता को अवैध रूप से हिरासत या डिटेन नहीं किया गया था. पुलिस का पक्ष था कि मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधों को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए केवल शिष्टाचार के तहत बातचीत हेतु बुलाया गया था. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कांग्रेस प्रतिनिधियों के साथ लंबी चर्चा के बाद यह स्पष्ट किया गया कि सभा के दौरान बिना अनुमति के किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन या काले झंडे दिखाने के कार्यक्रम से बचा जाना चाहिए. प्रशासन किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है और क्षेत्र में शांति बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है. हालांकि, पुलिस के इस स्पष्टीकरण के बावजूद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है.

जिला बहाली की मांग और आगामी राजनीतिक संघर्ष के संकेत

अनूपगढ़ के जिला दर्जे को लेकर उपजा यह असंतोष केवल एक थाने के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे जनता की एक बड़ी मांग जुड़ी हुई है. कांग्रेस पार्टी और स्थानीय नागरिक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि अनूपगढ़ का प्रशासनिक दर्जा बरकरार रखा जाए. मुख्यमंत्री के इस दौरे के दौरान काले झंडे दिखाने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी पहले ही दी जा चुकी थी, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क मुद्रा में नजर आ रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के बीच संवादहीनता इसी तरह बनी रही, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गंभीर रूप ले सकता है. फिलहाल, अनूपगढ़ की इस सियासी रार ने राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा और विरोध के बीच संतुलन कैसे साधा जाता है.

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