मदन राठौड़ के 'भेड़चाल' बयान पर सियासी घमासान तेज: BAP सांसद राजकुमार रोत ने कहा- बेनकाब हुई बीजेपी

मदन राठौड़ के 'भेड़चाल' बयान पर सियासी घमासान तेज: BAP सांसद राजकुमार रोत ने कहा- बेनकाब हुई बीजेपी

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों बयानों का दौर और तीखी बयानबाजी अपने चरम पर है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ (Madan Rathore) के एक विवादित बयान ने राज्य के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। उनके द्वारा दिए गए 'भेड़चाल' वाले बयान के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के राष्ट्रीय सांसद राजकुमार रोत (Rajkumar Roat) ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सीधा हमला बोला है और कहा है कि इस बयान से आदिवासियों और आम जनता के प्रति बीजेपी की वास्तविक सोच और मानसिकता पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। इस गरमागरम सियासी माहौल में कांग्रेस पार्टी ने भी कूदते हुए बीजेपी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ने के आसार हैं।

क्या है मदन राठौड़ का 'भेड़चाल' बयान और क्यों मचा है बवाल?

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने एक जनसभा या मीडिया बातचीत के दौरान जनता के मतदान और राजनीतिक रुझानों को लेकर 'भेड़चाल' शब्द का इस्तेमाल किया। विपक्ष का आरोप है कि मदन राठौड़ ने जनता और विशेषकर आदिवासी तथा ग्रामीण अंचल के मतदाताओं की समझ पर सवाल उठाया है और उन्हें अपमानित किया है। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक घमासान मच गया। विपक्षी दलों ने इसे जनता का सीधा अपमान बताते हुए बीजेपी पर अहंकारी राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है, जिससे सत्तारूढ़ दल के लिए बचाव करना मुश्किल साबित हो रहा है।

सांसद राजकुमार रोत और कांग्रेस के तीखे हमलों के क्या हैं मायने?

इस पूरे प्रकरण पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया बांसवाड़ा से सांसद और BAP नेता राजकुमार रोत की ओर से आई है। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए मदन राठौड़ पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि बीजेपी हमेशा से शोषित, वंचित और आदिवासी समाज को कमजोर समझती आई है और यह बयान उनकी उसीन सोच का जीता-जाता सबूत है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मौके को भुनाते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से पहले यह मुद्दा विपक्ष को एक बड़ा हथियार दे गया है, जिसका असर मैदानी स्तर के समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

 

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