घर की रसोई में रेंगता दिखा विशालकाय मगरमच्छ! कोटा के निमोला गांव में फैली सनसनी
राजस्थान के कोटा (Kota) जिले से वन्यजीवों की रिहायशी इलाकों में पैठ बनाने और उससे जुड़ी दिल दहला देने वाली घटनाओं का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप सकती है। कोटा के ग्रामीण इलाके निमोला गांव में एक आम दिन तब अचानक खौफनाक मंजर में बदल गया जब एक परिवार के सदस्य सुबह-ससुबह अपनी रसोई (Kitchen) में पहुंचे और वहां फर्श पर एक विशालकाय मगरमच्छ (Crocodile) को आराम से रेंगते हुए देखा। घर के अंदर इतने खतरनाक और खूंखार जलीय जीव को देखकर परिजनों के होश उड़ गए और उनकी चीख निकल गई। मगरमच्छ के घर के भीतर घुस आने की खबर इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई, जिससे पूरे गांव में भारी दहशत का माहौल बन गया और देखते ही देखते घर के बाहर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि, परिवार के सदस्यों ने घबराने के बजाय गजब की सूझबूझ और संयम का परिचय देते हुए तुरंत रसोई का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और सुरक्षित दूरी बना ली, जिससे एक बड़ा और जानलेवा हादसा टल गया। आइए आज विस्तार से जानते हैं कि कोटा के निमोला गांव में चंबल नदी के पास बसे इलाकों में हुई इस घटना की पूरी दास्तान क्या है और वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर कैसे मगरमच्छ को सुरक्षित बाहर निकाला।
कोटा और चंबल नदी के तटीय इलाकों में क्यों बढ़ रहा है वन्यजीवों का रिहायशी बस्तियों में आना?
कोटा और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र चंबल नदी (Chambal River) और उसकी सहायक नदियों के घड़ियाल तथा मगरमच्छ अभयारण्य (Sanctuary) के अंतर्गत आता है। चंबल नदी में मगरमच्छों की संख्या काफी अधिक है, और मानसून के मौसम में या जलस्तर बढ़ने तथा अन्य प्राकृतिक कारणों से कई बार ये जीव पानी के तेज बहाव या रास्तों से भटककर खेतों और इंसानी बस्तियों के नजदीक आ जाते हैं। निमोला गांव भी नदी के कछार के पास स्थित है, जिसके कारण अक्सर इस इलाके में वन्यजीवों की आवाजाही की खबरें सामने आती रहती हैं। लेकिन इस बार मगरमच्छ सीधे किसी खेत या रास्ते पर मिलने के बजाय एक पक्के मकान की रसोई के भीतर जा पहुंचा, जो इस बात का सबूत है कि वन्यजीव अब भोजन या सुरक्षित स्थान की तलाश में कितनी गहराई तक रिहायशी इलाकों में दाखिल होने लगे हैं। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में अपने बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता और डर का माहौल बना हुआ है।
रसोई के अंदर मगरमच्छ को देख उड़े होश, परिवार की सूझबूझ से टला बड़ा खतरा
घटना के संबंध में पीड़ित परिवार के मुखिया ने बताया कि तड़के सुबह जब घर की महिलाएं चाय बनाने और नाश्ता तैयार करने के लिए किचन की ओर गईं, तो उन्हें फर्श पर कुछ हलचल महसूस हुई। जब उन्होंने पास जाकर देखा तो एक भारी-भरकम मगरमच्छ ठंडे फर्श पर आराम से कुंडली मारकर बैठा हुआ था और अपनी आंखें टिमटिमा रहा था। इस खौफनाक दृश्य को देखकर महिलाओं के हाथ से बर्तन छूट गए और वे घबराकर चीखते हुए पीछे भागीं। परिवार के अन्य सदस्य तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बिना एक पल गंवाए रसोई का भारी दरवाजा बाहर से मजबूती के साथ बंद कर दिया और कुंडी लगा दी। यदि परिवार के किसी सदस्य को अंधेरे में या अनजाने में मगरमच्छ का अहसास न होता और वे उसके बेहद करीब चले जाते, तो वह उन पर हमला कर सकता था। परिवार की उस वक्त की गई सतर्कता और सूझबूझ के कारण ही किसी भी प्रकार की अनहोनी होने से बच गई और सभी की जान सुरक्षित रह गई।
वन विभाग की रेस्क्यू टीम का सफल ऑपरेशन और मगरमच्छ को चंबल नदी में सुरक्षित वापसी
घर के अंदर मगरमच्छ बंद होने की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस और कोटा वन विभाग (Forest Department Kota) की वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग के विशेष प्रशिक्षित कर्मचारी और वन्यजीव बचाव दल के सदस्य जरूरी उपकरणों, जालों और लोहे के पिंजरे के साथ तुरंत निमोला गांव स्थित उस घर पर पहुंचे। वन कर्मियों ने अत्यंत सावधानी और पेशेवर तरीके से रसोई के अंदर का मुआयना किया और मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से काबू में करने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद विशेषज्ञों ने उस खतरनाक मगरमच्छ को रस्सी और जाल की मदद से सुरक्षित रूप से बांधकर पिंजरे के अंदर कैद कर लिया। जैसे ही मगरमच्छ को पिंजरे में बंद करके घर से बाहर निकाला गया, ग्रामीणों ने चैन की सांस ली। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उस मगरमच्छ को उसके प्राकृतिक आवास यानी चंबल नदी के सुरक्षित और गहरे पानी में ले जाकर सकुशल छोड़ दिया। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को वन्यजीवों की आवाजाही को लेकर हमेशा कितना सतर्क रहने की जरूरत है।