कोटा मेडिकल केस : 4 प्रसूताओं की मौत का रहस्य बरकरार, स्वास्थ्य मंत्री बोले- ब्लड स्ट्रीम में हुआ तेज रिएक्शन

कोटा मेडिकल केस : 4 प्रसूताओं की मौत का रहस्य बरकरार, स्वास्थ्य मंत्री बोले- ब्लड स्ट्रीम में हुआ तेज रिएक्शन

कोटा के अस्पतालों में क्या हुआ? मंत्री खींवसर ने जताई बड़ी आशंका राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद चार महिलाओं की मौत और आठ अन्य की हालत बिगड़ने का मामला अब तक एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कोटा का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। मंत्री ने स्वीकार किया कि यह घटनाक्रम बेहद असामान्य और दुर्लभ है। उन्होंने अंदेशा जताया कि मरीजों के 'ब्लड स्ट्रीम' (रक्त प्रवाह) में किसी प्रकार का ऐसा तीव्र रिएक्शन हुआ है, जिसने डॉक्टरों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। फिलहाल, पूरी जांच रिपोर्ट आने तक मौत की असली वजह पर सस्पेंस बना हुआ है।

33 दवाओं के सैंपल और कोलकाता लैब की रिपोर्ट का इंतजार मंत्री खींवसर ने घटना के पीछे दवाओं की गुणवत्ता पर गहरा संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से प्रसूताओं के ऑर्गन फेल हुए, वह सामान्य 'सेप्टीसीमिया' की स्थिति में संभव नहीं है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग कंट्रोल विभाग ने अस्पतालों से उपयोग की जा रही 33 दवाओं के सैंपल लिए हैं। इनमें से 9 महत्वपूर्ण सर्जिकल सैंपल जांच के लिए कोलकाता की लैब भेजे गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद ही इस रहस्यमयी घटना की असली वजह साफ हो पाएगी।

170 मिनट का निरीक्षण और अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक कोटा पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री ने करीब 170 मिनट तक न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक और जेके लोन अस्पताल का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद कलेक्ट्रेट में अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर की गई हालिया कार्रवाई को जायज ठहराते हुए कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सख्त कार्रवाई: कई डॉक्टर और स्टाफ निलंबित इस दर्दनाक हादसे के बाद सरकार ने अब तक कई कड़े कदम उठाए हैं। 5 मई को हुई इस घटना के बाद 8 मई को ऑपरेटिंग सर्जन डॉ. श्रद्धा की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। इसके अलावा, कई वरिष्ठ डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। 12 मई को भी चार अन्य अधिकारियों पर गाज गिरी थी। हालांकि, मंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि किसी भी निर्दोष कर्मचारी को बिना वजह परेशान नहीं किया जाएगा और विभाग पूरी निष्पक्षता के साथ जांच कर रहा है।

सरकारी बनाम निजी अस्पताल: मंत्री की दोटूक मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री खींवसर ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में अक्सर फायदे के लिए सामान्य डिलीवरी को भी सिजेरियन में बदल दिया जाता है, जबकि सरकारी अस्पतालों में केवल जरूरत पड़ने पर ही सर्जरी की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ इस बात का सबूत है कि जनता का विश्वास इन संस्थानों पर बना हुआ है, लेकिन इस घटना ने सिस्टम में सुधार की गुंजाइश की ओर इशारा किया है।

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