जयपुर-सीकर हाईवे पर किसानों का भारी हंगामा! भारतमाला और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में सड़कों पर उतरे अन्नदाता
राजस्थान के परिवहन और कनेक्टिविटी के लिहाज से सबसे व्यस्त मार्गों में गिने जाने वाले जयपुर-सीकर नेशनल हाईवे पर इस वक्त भारी तनाव और जाम की स्थिति बनी हुई है। भारतमाला प्रोजेक्ट (Bharatmala Project) और प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के खिलाफ क्षेत्र के सैकड़ों किसान उग्र रूप धारण करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। किसानों के इस अचानक और आक्रामक मार्च के कारण जयपुर-सीकर हाईवे पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।
किसानों ने क्यों शुरू किया भारतमाला और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का विरोध?
अन्नदाताओं का कहना है कि सरकार द्वारा बनाए जा रहे इन बड़े एक्सप्रेसवे और भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत उनकी उपजाऊ जमीनों का जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका और पुश्तैनी जमीन छिनने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों का यह भी आरोप है कि प्रशासन द्वारा उन्हें भूमि अधिग्रहण के बदले उचित और बाजार मूल्य के हिसाब से मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। इसी मांग और मनमाने रवैये के विरोध में विभिन्न किसान संगठनों के बैनर तले किसानों ने महापंचायत कर हाईवे की ओर कूच किया और मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया।
पुलिस और प्रशासन के पसीने छूटे, ट्रैफिक रूट डायवर्ट करने की कोशिश
जयपुर-सीकर हाईवे पर अचानक लगे इस भारी जाम के कारण आम यात्रियों, पर्यटकों और कमर्शियल वाहनों चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौके की नजाकत को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने का दौर जारी है। ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक रास्तों और ग्रामीण लिंक मार्गों से गाड़ियों को डायवर्ट किया जा रहा है, ताकि लोगों को कुछ हद तक राहत मिल सके। हालांकि, किसानों के तेवर को देखकर लगता है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस प्रशासनिक आश्वासन नहीं मिलता, तब तक यह गतिरोध जारी रह सकता है।
क्षेत्रीय राजनीति और किसानों के आंदोलन का बढ़ता असर
भौगोलिक और कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण राजस्थान में इस प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर किसानों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति अक्सर देखने को मिलती है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी जमीनों के अधिग्रहण के नियमों में पारदर्शिता नहीं लाई गई और उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। फिलहाल, प्रशासन उच्च स्तर पर किसानों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के जरिए इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश में जुटा हुआ है।