अजमेर के एक प्रसिद्ध स्कूल परिसर में कैसे ताश के पत्तों की तरह ढह गई भारी-भरकम और लंबी दीवार

अजमेर के एक प्रसिद्ध स्कूल परिसर में कैसे ताश के पत्तों की तरह ढह गई भारी-भरकम और लंबी दीवार

राजस्थान के ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी कहे जाने वाले अजमेर शहर से एक बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक लापरवाही को बेनकाब करने वाली घटना सामने आई है, जिसने वाहन चालकों और स्थानीय नागरिकों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। अजमेर के एक प्रतिष्ठित स्कूल की भारी-भरकम और पुरानी चारदीवारी अचानक से आधी रात को या तड़के ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर नीचे आ गिरी, जिसकी चपेट में वहां पार्क की गई कई महंगी और शानदार गाड़ियां आ गईं। जिस समय यह हादसा हुआ, उस दौरान आसपास कोई इंसान मौजूद नहीं था, वरना एक बहुत बड़ा जानी नुकसान भी हो सकता था, लेकिन गाड़ियों की जो दुर्गति हुई उसे देखकर हर किसी का कलेजा कांप उठा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दीवार काफी समय से जर्जर हालत में थी और इसके रख-रखाव को लेकर स्कूल प्रबंधन तथा स्थानीय प्रशासन को कई बार चेताया भी गया था, लेकिन किसी ने समय रहते इस पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा। जब सुबह के वक्त आसपास के लोगों ने इस भयंकर मलबे का ढेर और उसके नीचे दबी हुई गाड़ियों को देखा, तो उनके होश उड़ गए और तुरंत इसकी सूचना पुलिस तथा संबंधित अधिकारियों को दी गई।

500 रुपये की भारी-भरकम पार्किंग फीस चुकाकर गाड़ी खड़ी करने वाले चालकों पर क्या बीती?

इस हादसे का सबसे दर्दनाक और हैरान करने वाला पहलू यह था कि जिन लोगों की गाड़ियां इस मलबे के नीचे दबकर कबाड़ बन चुकी हैं, उन्होंने कोई मुफ्त में अपनी गाड़ियां वहां नहीं खड़ी की थीं। वाहन चालकों ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा और संरक्षा का भरोसा जताते हुए संबंधित पार्किंग प्रबंधकों को पूरे 500 रुपये की भारी-भरकम पार्किंग फीस (Parking Fee) चुकाई थी, यह सोचकर कि उनकी गाड़ियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। लेकिन सुबह जब वे अपनी गाड़ियां लेने पहुंचे, तो उन्हें पार्किंग की जगह केवल ईंटों, पत्थरों और मलबे का एक विशाल ढेर दिखाई दिया, जिसके नीचे उनकी गाड़ियां बुरी तरह पिचक चुकी थीं। अपनी गा गाड़ियों की इस हालत को देखकर वाहन मालिकों के सिर पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और वे गुस्से से आगबबूला हो गए कि जब पैसे वसूलने के बाद भी गाड़ियों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है, तो ऐसी अवैध या लापरवाह पार्किंग चलाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

प्रशासनिक लापरवाही और स्कूल प्रबंधन की सुस्ती के खिलाफ स्थानीय लोगों और वाहन मालिकों का क्यों फूटा गुस्सा?

घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने स्कूल प्रबंधन तथा पार्किंग ठेकेदारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शहर के बीचों-बीच इस तरह के जर्जर निर्माणों की समय पर जांच न होना और मानसून या बारिश के मौसम में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना नगर निगम और प्रशासन की बड़ी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है। लोगों का कहना है कि यदि यह हादसा दिन के वक्त हुआ होता जब स्कूल के बच्चे या आम राहगीर इस रास्ते से गुजरते हैं, तो कई मासूमों की जान भी जा सकती थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करते हुए क्रेन की मदद से मलबे को हटवाने का काम शुरू किया, साथ ही यह आश्वासन दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करके दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

इस बड़े हादसे से शहर के अन्य स्कूलों और सार्वजनिक परिसरों के जर्जर निर्माणों को लेकर क्या सबक मिलता है?

अजमेर की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे राज्य के प्रशासनिक अमले को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या शहर के अन्य पुराने स्कूलों, सरकारी इमारतों और सार्वजनिक परिसरों की चारदीवारी भी इसी तरह खतरे के साए में जी रही हैं। बारिश के मौसम में नमी और सीलन के कारण पुरानी ईंटों की पकड़ कमजोर हो जाती है, और यदि समय रहते उनकी मरम्मत या प्लास्टर न कराया जाए, तो वे कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती हैं। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने शहर के सभी स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों के जर्जर भवनों का सर्वे कराने के निर्देश जारी किए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। 500 रुपये की पार्किंग फीस के बदले गाड़ियों के मलबे में तब्दील हो जाने की यह घटना भले ही वाहन मालिकों के लिए एक आर्थिक और मानसिक झटका हो, लेकिन यह पूरे सिस्टम के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि जनसुरक्षा से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ अब और सहन नहीं किया जाना चाहिए।