गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भांजे सचिन थापन ने तोड़ी भूख हड़ताल, जानिए पूरा मामला

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भांजे सचिन थापन ने तोड़ी भूख हड़ताल, जानिए पूरा मामला

राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित देश और प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली घूघरा हाई सिक्योरिटी जेल से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है। कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भांजे और कई गंभीर मामलों में आरोपी सचिन थापन उर्फ सचिन विश्नोई ने आखिरकार अपनी लंबी भूख हड़ताल को समाप्त कर दिया है। जेल प्रशासन और डॉक्टरों की टीम द्वारा की गई समझाइश के बाद उसने यह बड़ा फैसला लिया है। पिछले करीब 19 दिनों से उसने अन्न और जल का पूरी तरह से त्याग कर रखा था, जिसके कारण उसकी शारीरिक स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। इस घटना के बाद से ही प्रशासनिक अमले और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा हुआ था, क्योंकि मामला सीधे तौर पर एक हाई-प्रोफाइल अपराधी और उसकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।

19 दिनों तक अन्न-जल का त्याग और जेल प्रशासन के साथ खींचतान की पूरी कहानी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विचाराधीन बंदी सचिन थापन ने बीते 5 अक्टूबर से जेल के भीतर भोजन ग्रहण करने से साफ इनकार कर दिया था। वह लगातार भूख हड़ताल पर बैठा हुआ था। जेल सूत्रों और शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, सचिन अपनी कुछ मांगों को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था। उसकी मुख्य मांग यह थी कि हाई सिक्योरिटी जेल में बंद उसके कुछ अन्य साथियों को भी उसी की बैरक में या उसके आसपास शिफ्ट किया जाए। हालांकि, जेल प्रशासन का यह स्पष्ट कहना था कि इस संबंध में बंदी की तरफ से कोई भी आधिकारिक या लिखित आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया था। जेल नियमों और सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए प्रशासन ने उसकी मौखिक मांगों को मानने से इनकार कर दिया था, जिसके विरोध में उसने यह कदम उठाया था। इस लंबी प्रशासनिक खींचतान के चलते जेल के भीतर तनाव का माहौल भी देखने को मिला था।

तबीयत बिगड़ने के बाद जेएलएन अस्पताल में हुआ भर्ती, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

लगातार 18 से 19 दिनों तक भूखे रहने के कारण सचिन थापन के स्वास्थ्य में भारी गिरावट दर्ज की गई। जब उसकी हालत अत्यधिक नाजुक हो गई, तो जेल प्रशासन ने बिना कोई जोखिम उठाए उसे तुरंत अजमेर के सुप्रसिद्ध जवाहरलाल नेहरू (JLN) अस्पताल के कैदी वार्ड में भर्ती कराया। अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद भी शुरुआती दौर में उसका रवैया असहयोगपूर्ण रहा और उसने डॉक्टरों से अपना इलाज कराने से भी इनकार कर दिया था। बंदी की जिद और उसकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर को पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। वहां तीन स्तर की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, जिसमें कमांडो और सशस्त्र गार्ड हर पल मुस्तैद नजर आ रहे थे ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से लेकर प्रत्यर्पण तक का लंबा और आपराधिक इतिहास

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सचिन थापन उर्फ सचिन बिश्नोई कोई आम कैदी नहीं है, बल्कि वह देश भर में चर्चित रहे पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मुख्य और मास्टरमाइंड आरोपियों में से एक है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि मूसेवाला की हत्या की साजिश रचने, वारदात से पहले रेकी करने और शूटरों को अत्याधुनिक हथियारों व अन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराने में उसकी बहुत बड़ी भूमिका थी। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद वह फर्जी पासपोर्ट के जरिए भारत से फरार होकर पहले दुबई और फिर वहां से अज़रबैजान भाग गया था। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और इंटरपोल के प्रयासों के चलते 1 अगस्त 2023 को उसका अज़रबैजान से प्रत्यर्पण कराया गया था और भारत आते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से वह कानून के शिकंजे में है और विभिन्न अदालती प्रक्रियाओं के तहत राजस्थान की इस सुरक्षित जेल में न्यायिक हिरासत में काट रहा है।

भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद जेल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने ली राहत की सांस

मामले की गंभीरता को समझते हुए शुक्रवार को जेल अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारियों की एक विशेष टीम ने अस्पताल पहुंचकर सचिन थापन से लंबी बातचीत की। अधिकारियों ने उसे उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक प्रभावों, शरीर के अंगों पर होने वाले गंभीर नुकसान और जीवन की महत्ता के बारे में समझाया। प्रशासनिक और चिकित्सकीय समझाइश का आखिरकार असर हुआ और सचिन ने बिना किसी शर्त के स्वेच्छा से अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का फैसला किया। उसने डॉक्टरों की देखरेख में भोजन ग्रहण किया, जिसके बाद जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस महकमे ने बड़ी राहत की सांस ली है। डॉक्टरों के मुताबिक, अस्पताल में उसका स्वास्थ्य स्थिर होने के बाद उसे चिकित्सकीय निगरानी में वापस जेल भेज दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से देश की हाई-सिक्योरिटी जेलों में बंद कुख्यात अपराधियों की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से बहस के केंद्र में ला दिया है।