भीलवाड़ा के रूणिया बरड़ा में मतदान के चार दिन बाद अधजले मतपत्र मिलने से मचा हड़कंप

भीलवाड़ा के रूणिया बरड़ा में मतदान के चार दिन बाद अधजले मतपत्र मिलने से मचा हड़कंप

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत रूणिया बरड़ा में मतदान की प्रक्रिया संपन्न होने के चार दिन बाद जले हुए मतपत्र मिलने की घटना से इलाके में भारी सनसनी फैल गई है. स्थानीय ग्रामीणों और विपक्षी समर्थकों को मतदान केंद्र और उसके आसपास की झाड़ियों के पास जले तथा अधजले स्थिति में दर्जनों मतपत्र पड़े हुए मिले. जैसे ही यह खबर गांव में आग की तरह फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण और विभिन्न प्रत्याशियों के समर्थक मौके पर इकट्ठा हो गए और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद पूरे भीलवाड़ा जिले के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर उठते सवालों के बीच आनन-फानन में स्थानीय पुलिस और चुनाव अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली.

प्रशासनिक टीम की सफाई और आधिकारिक बयान में 'नमूना मतपत्र' का दावा

बढ़ते बवाल और ग्रामीणों के भारी आक्रोश को देखते हुए स्थानीय निर्वाचन अधिकारी और पुलिस प्रशासन की टीम ने तुरंत घटनास्थल का मुआयना किया और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया. अधिकारियों ने पूरे इलाके को सील करते हुए जले हुए मतपत्रों के अवशेषों को जब्त किया और जांच शुरू की. प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि पाए गए मतपत्र असली वोटिंग में इस्तेमाल किए गए बैलेट पेपर नहीं हैं. अधिकारियों के अनुसार ये केवल मतदान कर्मियों के प्रशिक्षण और प्रक्रियात्मक प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सैंपल (नमूना) या डमी मतपत्र थे, जिन्हें प्रक्रिया पूरी होने के बाद निस्तारित किया जा रहा था. हालांकि, इस सफाई के बाद भी ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं का गुस्सा शांत नहीं हुआ है और वे इस स्पष्टीकरण पर खुलकर सवाल खड़े कर रहे हैं.

ग्रामीणों और उम्मीदवारों का विरोध तथा चुनावी निष्पक्षता पर उठते तीखे सवाल

प्रशासनिक स्पष्टीकरण के बावजूद भीलवाड़ा के रूणिया बरड़ा गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है. चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों और ग्रामीणों ने प्रशासन के इस तर्क को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि यदि ये केवल सैंपल मतपत्र थे, तो उन्हें मतदान केंद्र के पास इस तरह खुले में क्यों जलाया गया या फेंका गया. लोगों का आरोप है कि मतपत्रों पर मुहर और क्रम संख्या के निशान मौजूद थे, जिससे धांधली और वोटों की हेराफेरी की आशंका को बल मिलता है. उम्मीदवारों ने पूरी चुनाव प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराने, संबंधित मतदान केंद्र का रिकॉर्ड दोबारा चेक करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. इस घटना ने न केवल स्थानीय चुनाव परिणामों की वैधता पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.