आयुष्मान भारत योजना का संकट: लंबे अरसे से अटके पड़े हैं अस्पतालों के क्लेम, 98 हजार से ज्यादा शिकायतों के बीच अधिकारियों का बड़ा बयान

आयुष्मान भारत योजना का संकट: लंबे अरसे से अटके पड़े हैं अस्पतालों के क्लेम, 98 हजार से ज्यादा शिकायतों के बीच अधिकारियों का बड़ा बयान

देश के गरीबों और जरूरतमंदों को मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के मकसद से शुरू की गई महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक संकट से गुजर रही है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इलाज मुहैया कराने वाले अस्पतालों और लाभार्थियों के करोड़ों रुपये के क्लेम लंबे अरसे से अटके पड़े हैं, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. स्थिति यह है कि योजना के तहत भुगतान न होने या अन्य गड़बड़ियों को लेकर देश भर से 98 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं. इस बढ़ते दबाव के बीच अब योजना से जुड़े अधिकारियों ने चुप्पी तोड़ते हुए सफाई दी है और दावा किया है कि इनमें से अधिकांश यानी करीब 72 प्रतिशत मामलों की जांच पूरी कर ली गई है और जल्द ही स्थिति को पूरी तरह सुधार लिया जाएगा.

अटके हुए क्लेम और अस्पतालों की बढ़ती चिंताएं

आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत निजी और सरकारी अस्पतालों का आरोप है कि समय पर क्लेम का भुगतान न होने के कारण उनके सामने वित्तीय संकट खड़ा हो गया है. कई अस्पतालों ने तो यहां तक चेतावनी दी है कि यदि उनके बकाये का भुगतान जल्द नहीं किया गया तो उन्हें मरीजों का मुफ्त इलाज जारी रखने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. दूसरी तरफ, योजना के पोर्टल और तकनीकी प्रक्रियाओं में आ रही दिक्कतों के कारण भी शिकायतों का अंबार लग गया है. अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन के बीच तालमेल की कमी के चलते आम मरीजों को भी कई बार इलाज के दौरान परेशानियों से जूझना पड़ता है, जिससे सरकार की इस लोकप्रिय योजना की साख पर असर पड़ रहा है.

अधिकारियों का दावा: 72 फीसदी मामलों का निस्तारण पूरा

सामने आई 98 हजार से अधिक शिकायतों के मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए संबंधित अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विभाग इस पूरी समस्या को लेकर पूरी तरह गंभीर है. अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त कुल शिकायतों में से लगभग 72 प्रतिशत मामलों की जांच प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और नियमों के तहत उनका समाधान भी किया जा रहा है. जिन मामलों में तकनीकी खामियां पाई गई हैं, उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है ताकि अस्पतालों को उनके अटके हुए क्लेम का भुगतान जल्द से जल्द मिल सके. सरकार का यह भी कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की पेंडेंसी और शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो सके.

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