जयपुर सड़क हादसे में सामने आया CCTV सच; पूर्व मंत्री अशोक चांदना की पत्नी की एंडेवर कार नहीं बल्कि तेज रफ्तार थार ने मचाया था कहर
राजस्थान की राजधानी जयपुर के व्यस्त और प्रमुख इलाकों में शुमार मानसरोवर क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया जब आधी रात को एक भीषण सड़क हादसा पेश आया। यह घटना मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के ठीक नीचे न्यू सांगानेर रोड पर बने तिराहे पर हुई, जहां दो लग्जरी गाड़ियां और एक ई-रिक्शा आपस में बुरी तरह टकरा गए। इस दुर्घटना की भयावहता इतनी अधिक थी कि टक्कर के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग सहम गए। हादसे के तुरंत बाद से ही यह मामला राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया क्योंकि इस दुर्घटना में शामिल एक एसयूवी कार का संबंध सीधे तौर पर प्रदेश के एक कद्दावर राजनेता और कांग्रेस के पूर्व मंत्री अशोक चांदना के परिवार से जुड़ा हुआ है। आम जनता से लेकर प्रशासनिक अमले तक हर कोई यह जानने के लिए बेचैन था कि आखिर उस आधी रात को उस सड़क पर ऐसा क्या हुआ था जिसके कारण तीन बेकसूर मजदूरों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी।
सामने आए नए CCTV फुटेज से खुली हादसे की असल सच्चाई और थार की रफ्तार का आतंक
इस सनसनीखेज हादसे के शुरुआती घंटों में तरह-तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन जब पुलिस ने मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो एक बिल्कुल नया और चौंकाने वाला सच सामने आया। वायरल और पुलिस के पास मौजूद सीसीटीवी फुटेज से यह स्पष्ट हो गया कि पूर्व मंत्री अशोक चांदना की पत्नी ललिता चांदना के नाम से रजिस्टर्ड एंडेवर कार की रफ्तार बिल्कुल भी तेज नहीं थी, बल्कि वह सामान्य गति से गुजर रही थी। असल कहर उस वक्त बरपा जब गुर्जर की थड़ी की ओर से आ रही एक बेकाबू और तेज रफ्तार थार कार ने चौराहे पर मुड़ते समय एंडेवर को जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो फुटेज के अनुसार, थार की रफ्तार इतनी खतरनाक थी कि वह केवल एंडेवर से ही नहीं टकराई, बल्कि उसके बाद वहां से गुजर रहे एक ई-रिक्शा को भी अपनी चपेट में लेते हुए हवा में उछाल दिया।
ई-रिक्शा पर कहर बनकर टूटी गाड़ियां, हवा में उछलकर दूर जा गिरे तीन मासूम मजदूर
इस दर्दनाक दुर्घटना का सबसे ज्यादा खामियाजा उस ई-रिक्शा में सवार गरीब मजदूरों को भुगतना पड़ा जो किसी समारोह में आइसक्रीम सप्लाई का काम खत्म करके अपने घर लौट रहे थे। तेज रफ्तार थार की टक्कर इतनी जोरदार थी कि ई-रिक्शा के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार तीनों मजदूर छिटककर करीब पचास फीट दूर सड़क पर जा गिरे। इस भीषण टक्कर में घायल हुए मजदूरों की पहचान शंकर सिंह, मुकेश जावली और उमाशंकर के रूप में हुई है, जिन्हें तुरंत गंभीर हालत में सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल और अन्य निजी चिकित्सालयों में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक इनमें से कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। हादसे के तुरंत बाद दोनों ही गाड़ियों यानी थार और एंडेवर के चालक और उसमें सवार लोग मौके से फरार हो गए, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे कि आखिर इस तरह की लापरवाही करने वाले लोग कानून की गिरफ्त से इतनी आसानी से कैसे बच निकलते हैं।
गाड़ियों के पुराने चालान और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर खड़े होते बड़े सवाल
पुलिस की शुरुआती जांच और परिवहन विभाग के रिकॉर्ड खंगालने पर इस मामले से जुड़े कुछ और हैरान करने वाले तथ्य भी प्रकाश में आए हैं। जांच में यह बात सामने आई कि पूर्व मंत्री की पत्नी के नाम से दर्ज एंडेवर कार पर पहले से ही ओवरस्पीड और यातायात नियमों के उल्लंघन के कई चालान पेंडिंग बोल रहे थे। वहीं दूसरी ओर, इस हादसे की मुख्य वजह बनी तेज रफ्तार थार गाड़ी पर भी ओवरस्पीड के चालान दर्ज होना पाया गया है। बार-बार ट्रैफिक नियम टूटने और ऑनलाइन चालान कटने के बावजूद सड़कों पर इस तरह बेखौफ होकर वाहन दौड़ाना यह साबित करता है कि शहर के भीतर आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर किस स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। पुलिस ने दोनों दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को अपने कब्जे में लेकर क्रेन की मदद से थाने भिजवा दिया है और कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है।
पुलिस की गहन जांच और सड़क सुरक्षा को लेकर नागरिकों की बढ़ती चिंताएं
घटना के तूल पकड़ने के बाद जयपुर कमिश्नरेट की ट्रैफिक और स्थानीय पुलिस यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि इस हादसे में असल दोषी कौन था और गाड़ी कौन चला रहा था। हालांकि कागजों में एंडेवर कार पूर्व मंत्री के परिवार से जुड़ी है, लेकिन सीसीटीवी फुटेज ने यह साफ कर दिया है कि गलती का मुख्य कारक तेज रफ्तार थार की reckless driving थी। इस पूरी घटना ने एक बार फिर जयपुर की सड़कों पर नाइट ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग और रफ ड्राइविंग के बढ़ते मामलों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आम जनता और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि शहर की मुख्य सड़कों पर पुलिस की गश्त और स्पीडोमीटर कैमरे मुस्तैद नहीं किए गए, तो ऐसे हादसे निर्दोष लोगों की जान लेते रहेंगे। बहरहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर इस गुत्थी को पूरी तरह सुलझाने में लगी है ताकि घायलों को न्याय मिल सके और कानून तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सके।