ट्रक के अंदर समा गई कार, परिवार की मौत से मचा कोहराम

ट्रक के अंदर समा गई कार, परिवार की मौत से मचा कोहराम

राजस्थान की धरा पर एक बार फिर सड़क हादसों का खौफनाक चेहरा देखने को मिला है, जिसने सुनने और देखने वाले हर शख्स की रूह को झकझोर कर रख दिया है। राज्य के चूरू जिले से एक ऐसा मर्मस्पर्शी और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। एक हंसता-खेलता परिवार जो किसी काम से या यात्रा पर निकला था, पल भर में मौत के आगोश में समा गया। तेज रफ्तार का कहर इस कदर बरपा कि एक कार अनियंत्रित होकर सीधे आगे चल रहे भारी-भरकम ट्रक के अंदर जा घुसी। टक्कर इतनी भयानक और जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसके अंदर बैठे लोग बुरी तरह फंस गए। इस वीभत्स दुर्घटना में वाहन के ड्राइवर समेत परिवार के सभी सदस्यों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, इस पूरे खौफनाक मंजर के बीच एक ऐसा चमत्कार भी देखने को मिला जिसे कुदरत का करिश्मा ही कहा जा सकता है, क्योंकि इस भीषण हादसे में परिवार का सिर्फ एक नन्हा सा सदस्य यानी एक दुधमुंही बच्ची सुरक्षित बच गई है, जिसे खरोंच तक नहीं आई।

एक ही झटके में उजड़ गया पूरा हंसता-खेलता परिवार, मातम में डूबे रिश्तेदार

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब स्थानीय पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे, तो उन्हें कार के बचे हुए अवशेषों को काटकर शवों को बाहर निकालना पड़ा। गाड़ी के भीतर का नजारा बेहद वीभत्स था, जिसे देखकर मजबूत दिल वाले लोग भी सिहर उठे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक सड़क दुर्घटना में मरने वाले लोग एक ही परिवार के सदस्य थे जो आपसी किसी सिलसिले में सफर कर रहे थे। परिवार के मुखिया, उनकी पत्नी और अन्य करीबी रिश्तेदार या बच्चे इस वाहन में सवार थे। किसी को यह अंदेशा तक नहीं था कि जिस सफर की शुरुआत उन्होंने अपनों के साथ मुस्कुराते हुए की थी, वह उनके जीवन का अंतिम सफर साबित होगा। जब इस हादसे की खबर उनके पैतृक गांव और दूर-दराज बैठे रिश्तेदारों तक पहुंची, तो वहां कोहराम मच गया। घर की खुशियां एक पल में मातम और चीख-पुकार में बदल गईं। रिश्तेदारों और पड़ोसियों के लिए इस सच को स्वीकार करना बेहद कठिन हो रहा था कि एक ही पल में पूरा परिवार काल के गाल में समा गया है।

मौत के आगोश में चमत्कार: खौफनाक मंजर के बीच कैसे सुरक्षित बची दुधमुंही बच्ची

इस दर्दनाक और मातम भरे हादसे के बीच जिस एक बात ने हर किसी को हैरान भी किया और थोड़ा सुकून भी दिया, वह थी एक दुधमुंही बच्ची की सुरक्षित जिंदगी। जब राहत कार्य के दौरान पुलिस और बचाव कर्मियों ने क्षतिग्रस्त कार के भीतर झांका, तो उन्हें एक कोने में पड़ी मासूम बच्ची की रोने की आवाज सुनाई दी। जब उसे सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया, तो डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों की आंखें भर आईं। इतनी भयानक टक्कर जिसमें कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया था और बड़े-बड़े लोग अपनी जान गंवा बैठै, उसी गाड़ी के एक सुरक्षित कोने में वह नन्हीं सी जान सही-سلامत मिल गई। स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीम का कहना है कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि मौत ने उस मासूम को छूकर निकल जाने के बावजूद उसकी जिंदगी बख्श दी। हालांकि, वह बच्ची अभी इस बात से पूरी तरह अनजान है कि उसने अपने माता-पिता और परिवार के सभी सदस्यों को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया है। उसके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है, जिसे लेकर हर संवेदनशील नागरिक का दिल पसीज रहा है।

पुलिस और प्रशासन की राहत-बचाव कार्रवाई, अस्पताल में मची चीख-पुकार

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए आसपास के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में वहां एकत्र हो गए। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से बेहद मशक्कत के बाद कार में फंसे शवों को बाहर निकाला और उन्हें नजदीकी अस्पताल की मोर्चरी में पहुंचाया। वहीं, चमत्कारिक रूप से बची हुई उस दुधमुंही बच्ची को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका मेडिकल परीक्षण किया गया। गनीमत यह रही कि बच्ची को कोई गंभीर अंदरूनी चोट नहीं आई थी, लेकिन वह सदमे और डर की वजह से लगातार रो रही थी। पुलिस ने मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उनके परिजनों को इस हृदयविदारक घटना की आधिकारिक सूचना दे दी गई है। अस्पताल परिसर में जब पीड़ित परिवार के अन्य दूर के रिश्तेदार पहुंचे, तो वहां का माहौल बेहद गमगीन हो गया और हर तरफ रोने-बिलखने की आवाजें गूंज उठीं।

राजस्थान के हाईवे पर लगातार बढ़ते हादसे और सुरक्षा पर खड़े होते गंभीर सवाल

चूरू की यह घटना एक बार फिर से राजस्थान के नेशनल और स्टेट हाईवे पर बेलगाम दौड़ते वाहनों और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख देती है। आए दिन सूबे की सड़कों पर ओवरस्पीडिंग, नींद की झपकी लगने, गलत ओवरटेकिंग और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण दर्जनों हंसते-खेलते परिवार उजड़ रहे हैं। रात के वक्त भारी-भरकम ट्रकों के पीछे या उनके आगे चलने वाले वाहन चालकों की जरा सी लापरवाही बड़े हादसों को न्योता दे देती है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि हाईवे पर ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम कसने के लिए आधुनिक कैमरे और पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए। यदि समय रहते ड्राइवरों की थकान और रफ्तार पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इसी तरह मासूम जिंदगियां और परिवार सड़क पर दम तोड़ते रहेंगे। चूरू के इस दर्दनाक हादसे ने पीछे एक ऐसा खालीपन और दर्द छोड़ दिया है जिसे कभी नहीं भरा जा सकता, और वह दुधमुंही बच्ची अब पूरी जिंदगी इस भयानक दुर्घटना के साये में जीने को मजबूर होगी।