फील्ड फायरिंग रेंज में चूका बम का निशाना: सीधा आ गिरा तुलसाराम के खेत में
राजस्थान के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज से सटे ग्रामीण इलाके में उस वक्त हड़कंप और दहशत का माहौल बन गया, जब युद्धाभ्यास के दौरान दागा गया एक जिंदा बम अपने तय निशाने से पूरी तरह भटक गया। निशाने से चूकते ही यह विस्फोटक सीधा पास के गांव में स्थित किसान तुलसाराम के कृषि खेत में आ गिरा। खेत की जमीन से टकराते ही इतना भीषण और जोरदार धमाका हुआ कि आसपास का कई किलोमीटर का इलाका थर्रा उठा और ग्रामीण डर के मारे अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह मिसाइल या बम खेत में गिरा, उस समय खेत के उस हिस्से में कोई मजदूर या परिवार का सदस्य मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा और दर्दनाक हादसा टल गया। हालांकि, धमाके का असर इतना जबरदस्त था कि खेत में कई फीट गहरा गड्ढा बन गया और आसपास की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
#1 फील्ड फायरिंग रेंज से दागा गया विस्फोटक भटक गया रास्ता: जानिए कैसे हुआ यह बड़ा हादसा
पोकरण और आसपास का सीमावर्ती रेगिस्तानी क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां भारतीय सेना और रक्षा एजेंसियां नियमित रूप से अपने तोपखानों, टैंकों और मिसाइल प्रणालियों का अभ्यास करती हैं। मिली जानकारी के अनुसार, फील्ड फायरिंग रेंज में सामान्य दिनों की तरह ही सैन्य अभ्यास और फायरिंग का दौर चल रहा था। इसी दौरान दागा गया एक भारी विस्फोटक गोला तकनीकी खामी या हवा की रफ्तार के कारण अपनी निर्धारित रेंज की सीमा को पार कर गया। फायरिंग रेंज की बाउंड्री से बाहर निकलकर यह सीधा सिविलियन एरिया यानी नागरिक आबादी के करीब बने तुलसाराम के खेत में जाकर गिरा। धमाके की गूंज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर स्थित गांवों में भी खिड़कियां और दरवाजे कांप उठे, जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।
#1 किसान तुलसाराम के खेत में बना 10 फीट गहरा गड्ढा, ग्रामीणों में भारी दहशत और आक्रोश
हादसे के तुरंत बाद किसान तुलसाराम और आसपास के दर्जनों ग्रामीण बदहवास हालत में मौके पर पहुंचे। वहां का नजारा देखकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए। जिस जगह पर बम गिरा था, वहां धुएं का गुबार उड़ रहा था और खेत की उपजाऊ जमीन पर लगभग 8 से 10 फीट गहरा और चौड़ा गड्ढा बन चुका था। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब फायरिंग रेंज से छूटकर कोई बम या गोला उनके रिहाइशी इलाकों या खेतों में आकर गिरा हो। इस तरह की घटनाओं से हमेशा जान-माल का खतरा बना रहता है। इस घटना से गुस्साए स्थानीय लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था और रेंज की बाउंड्री वॉल की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है और मुआवजे की मांग की है।
#1 सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और सेना की टीम मौके पर पहुंची: जांच के आदेश जारी
घटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस थाने और जिला प्रशासन के अधिकारियों को दी गई। खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम, प्रशासनिक अधिकारी और सेना के सुरक्षा विशेषज्ञ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे इलाके को सील (Cordon Off) कर दिया। सेना और पुलिस के तकनीकी विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर मलबे के नमूनों को एकत्रित किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह किस प्रकार का गोला या मिसाइल थी और किस तकनीकी चूक के कारण यह रिहाइशी इलाके की तरफ भटक गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने किसान तुलसाराम और ग्रामीणों को शांत कराते हुए आश्वस्त किया है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और नियमानुसार हुए नुकसान का आकलन कर मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
#1 रिहाइशी इलाकों की सुरक्षा बढ़ाने और सुरक्षा मानकों को सख्त करने की उठी मांग
इस गंभीर घटना के बाद पोकरण और आसपास के सीमावर्ती गांवों के जन प्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों ने रक्षा मंत्रालय और जिला प्रशासन से फायरिंग रेंज के सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने की पुरजोर मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि रेंज के आसपास आबादी का विस्तार हो चुका है, ऐसे में अभ्यास के दौरान दिशा और दूरी का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि यह बम खेत के बजाय किसी मकान या मवेशियों के बाड़े पर गिरता, तो भारी तबाही मच सकती थी। फिलहाल सेना की ओर से भी इस मामले की आंतरिक जांच (Court of Inquiry) शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा चूकों की पुनरावृत्ति को पूरी तरह से रोका जा सके।