अजमेर नगर निगम वार्ड आरक्षण की लॉटरी खुली: 20 एससी, 2 एसटी और 16 ओबीसी वार्ड आरक्षित, 27 सीटें महिलाओं के लिए तय

अजमेर नगर निगम वार्ड आरक्षण की लॉटरी खुली: 20 एससी, 2 एसटी और 16 ओबीसी वार्ड आरक्षित, 27 सीटें महिलाओं के लिए तय

राजस्थान के राजनीतिक गलियारों और स्थानीय शहरी निकायों के चुनाव को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां पूरी तरह से तेज हो चुकी हैं। इसी क्रम में अजमेर नगर निगम के वार्डों के आरक्षण को लेकर बहुप्रतीक्षित लॉटरी की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कर ली गई है। जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की देखरेख में निकाली गई इस आरक्षण सूची से अजमेर के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है, क्योंकि कई पुराने पार्षदों और दिग्गजों के चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। इस नई आरक्षण व्यवस्था के तहत विभिन्न श्रेणियों के लिए वार्डों का निर्धारण कर दिया गया है, जिससे आने वाले नगर निगम चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ होने लगी है। आइए आज के इस विस्तृत लेख में जानते हैं कि अजमेर नगर निगम के इस वार्ड आरक्षण में किस वर्ग को कितनी सीटें मिली हैं और इसका स्थानीय चुनावों पर क्या असर पड़ने वाला है।

अजमेर नगर निगम में एससी, एसटी और ओबीसी वार्डों का पूरा गणित

राज्य सरकार के निर्देशों और रोटेशन फॉर्मूले के आधार पर अजमेर नगर निगम के वार्डों का श्रेणीवार आरक्षण तय किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस बार अनुसूचित जाति (SC) के लिए कुल 20 वार्ड आरक्षित किए गए हैं, जिनमें इन वर्गों के उम्मीदवारों को अपनी राजनीतिक दावेदारी पेश करने का पूरा अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए 2 अंकों यानी 2 वार्ड आरक्षित किए गए हैं। दूसरी ओर, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग यानी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 16 वार्डों का आरक्षण तय किया गया है। इन तमाम आरक्षित श्रेणियों के तय होने से विभिन्न राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों ने अपने-अपने मोर्चे पर माथापच्ची शुरू कर दी है। राजनीतिक दलों के लिए अब यह अनिवार्य हो गया है कि वे इन वार्डों से जिताऊ और मजबूत चेहरों की तलाश करें ताकि चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।

महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों ने बदले कई दिग्गजों के चुनावी अरमान

स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं, और अजमेर नगर निगम के इस नए आरक्षण में भी महिलाओं को बड़ी हिस्सेदारी मिली है। कुल वार्डों में से 27 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं, जिसमें विभिन्न वर्गों की महिलाओं के लिए सीटें सुरक्षित हुई हैं। महिला आरक्षण के इस दायरे में आने के बाद कई पुरुष नेताओं के समीकरण ध्वस्त हो गए हैं, जो लंबे समय से अपने वार्डों में जमीन तैयार कर रहे थे। अब इन वार्डों से केवल महिला उम्मीदवार ही चुनावी मैदान में उतर सकेंगी, जिससे पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों या सक्रिय महिला नेत्रियों की पूछपरख अचानक बहुत बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि महिला आरक्षण का यह बड़ा पैमाना चुनाव परिणामों को प्रभावित करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा, क्योंकि महिला मतदाता और महिला उम्मीदवार दोनों ही इस बार चुनावी नतीजों की दिशा तय करेंगी।

रोटेशन फॉर्मूले और पारदर्शी प्रक्रिया से खुली लॉटरी

इस बार की वार्ड आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह से प्रशासनिक निगरानी और नियमानुसार संपन्न की गई है। जिला प्रशासन द्वारा अपनाए गए रोटेशन फॉर्मूले के तहत उन वार्डों को इस बार की सूची से बाहर रखा गया है जो पिछले चुनावों में लगातार आरक्षित रह चुके थे, ताकि अन्य वार्डों और क्षेत्रों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। लॉटरी प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, स्थानीय नेता और प्रशासनिक अधिकारी सभागार में मौजूद रहे ताकि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठ सके। जैसे ही एक-एक करके वार्डों के आरक्षण की पर्चियां खुलीं, वैसे ही कई वार्डों के दावेदारों के चेहरे की चमक बढ़ गई तो कई लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर गया। अजमेर के राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा आम हो गई है कि किस पार्टी का कौन सा नेता किस वार्ड से अपनी किस्मत आजमाने उतरेगा।

चुनाव की सरगर्मी तेज, टिकट के दावेदारों ने शुरू की दौड़भाग

अजमेर नगर निगम के वार्ड आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद अब शहर का चुनावी माहौल पूरी तरह से गर्मा गया है। टिकट की आस लगाए बैठे संभावित उम्मीदवारों ने अभी से ही अपने-अपने इलाकों में जनसंपर्क तेज कर दिया है और राजनीतिक दलों के कार्यालयों के चक्कर काटने शुरू कर दिए हैं। भाजपा और कांग्रेस जैसी प्रमुख पार्टियों के जिला कार्यालयों पर भी टिकटार्थियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। हर कोई यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसकी राजनीतिक पकड़ जिस वार्ड में मजबूत है, वहां पार्टी उसे ही अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाए। आने वाले कुछ हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल किस प्रकार से इन आरक्षित और सामान्य वार्डों पर अपने सबसे बेहतरीन और जिताऊ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते हैं।

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