जयपुर में ट्रैफिक का जानलेवा मकड़जाल, बेलगाम अतिक्रमण और पार्किंग का संकट
राजस्थान की विश्व प्रसिद्ध विरासत और राजधानीजयपुरClick to open side panel for more information में हर दिन सड़कों पर उतरने वाले लाखों आम नागरिकों, व्यापारियों और पर्यटकों के लिए ट्रैफिक की बदहाली एक विकराल और दर्दनाक समस्या बन चुकी है। 'पिंक सिटी' की खूबसूरती और ऐतिहासिक आकर्षण पर अतिक्रमण के काले बादल और पार्किंग की घोर किल्लत ग्रहण लगा रहे हैं। शहर के व्यस्ततम चौराहों से लेकर परकोटे के पारंपरिक बाज़ारों तक में वाहनों की लंबी-लंबी कतारें, पैदल चलने वालों के लिए जगह की कमी और घंटों लगने वाले ट्रैफिक जाम ने जनता का जीना मुहाल कर दिया है। पब्लिक ओपिनियन (Public Opinion) के माध्यम से जब जयपुर की आम जनता, दुकानदारों, युवाओं और दैनिक यात्रियों से इस ज्वलंत मुद्दे पर बात की गई, तो उनका गुस्सा प्रशासन की उदासीनता और नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली पर जमकर फूटा। लोगों ने सीधे तौर पर सवाल उठाते हुए शहर को इस ट्रैफिक के मकड़जाल से मुक्ति दिलाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है।
#1 जयपुर के परकोटे से लेकर वीआईपी इलाकों तक ट्रैफिक का बुरा हाल: जनता ने बयां किया अपना दर्द
जयपुरClick to open side panel for more informationशहर की रीढ़ माने जाने वाले चारदीवारी क्षेत्र (परकोटा)—जैसे जौहरी बाज़ार, बापू बाज़ार, चांदपोल, और हवामहल मार्ग—में स्थिति दिन-ब-दिन बेहद विस्फोटक होती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुबह की शुरुआत होते ही सड़कों पर गाड़ियों का रेंगना शुरू हो जाता है, जो देर रात तक बदस्तूर जारी रहता है। सिर्फ ऐतिहासिक परकोटा ही नहीं, बल्कि मानसरोवर, वैशाली नगर, मालवीय नगर और टोंक रोड जैसे नए और पॉश इलाकों में भी चौराहे जाम की चपेट में हैं। स्कूल जाने वाले नन्हें बच्चे, दफ्तर समय पर पहुंचने की जद्दोजहद में लगे नौकरीपेशा लोग और आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस में फंसे मरीज हर दिन इस जाम की भारी कीमत चुका रहे हैं। जनता का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस केवल चालान काटने और कैमरों के जरिए फाइन भेजने में व्यस्त है, लेकिन जमीनी स्तर पर जाम खुलवाने के लिए चौराहों पर होमगार्ड या सिपाही तक तैनात नहीं नजर आते।
#1 सड़कों और फुटपाथों पर अवैध कब्जे: अतिक्रमणकारियों के आगे लाचार दिखा नगर निगम प्रशासन
पब्लिक ओपिनियन के दौरान शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और व्यापारियों ने खुलकर कहा कि जयपुर में ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी और मूल वजह सड़कों और फुटपाथों पर पसर चुका अवैध अतिक्रमण है। बाज़ारों में मुख्य सड़कों के किनारों पर ठेलों, ढाबों, अस्थायी दुकानों और रेहड़ी-पटरी वालों ने इस तरह कब्जा कर रखा है कि पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। मजबूरी में पैदल चलने वाले लोग जब मुख्य सड़क पर चलते हैं, तो हादसों का खतरा बढ़ जाता है और गाड़ियों की रफ्तार थम जाती है। दुकानदारों का आरोप है कि नगर निगम का सतर्कता दस्ता (Vigilance Team) और स्थानीय पुलिस केवल खानापूर्ति के नाम पर कभी-कभार छोटी-मोटी कार्रवाई करती है, लेकिन उनके जाते ही कुछ ही घंटों में अतिक्रमणकारी दोबारा काबिज हो जाते हैं। मिलीभगत और हफ्ता वसूली के चलते इस अवैध कब्जे पर कोई स्थायी बुलडोजर या सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
#1 स्मार्ट सिटी में पार्किंग की भारी किल्लत: नो-पार्किंग में गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर हैं वाहन चालक
जयपुर को 'स्मार्ट सिटी' का दर्जा दिए जाने के बावजूद शहर में व्यवस्थित और बहुस्तरीय पार्किंग (Multilevel Parking) का भारी अभाव है। जयपुर की आबादी और वाहनों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है, उसके मुकाबले सार्वजनिक पार्किंग स्थलों का विकास बिल्कुल शून्य के बराबर रहा है। खरीदारी करने या काम के सिलसिले में बाज़ार आने वाले लोगों को अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए कई किलोमीटर तक भटकना पड़ता है। पार्किंग स्पेस न मिलने के कारण मजबूरी में लोग सड़कों के किनारों पर या नो-पार्किंग ज़ोन में वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे पहले से संकरी सड़कें और अधिक तंग हो जाती हैं। ट्रैफिक क्रेन द्वारा नो-पार्किंग से गाड़ियां उठाकर भारी-भरकम जुर्माना वसूलना तो आसान है, लेकिन नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) जनता को पर्याप्त पार्किंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।
#1 जयपुर को जाम मुक्त बनाने के लिए जनता ने सरकार और प्रशासन के सामने रखीं ये बड़ी मांगें
शहर के भविष्य और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए जयपुरवासियों ने शासन-प्रशासन के सामने बेहद व्यावहारिक सुझाव और मांगें रखी हैं। आम जनता का कहना है कि सबसे पहले परकोटे और मुख्य बाज़ारों को पूरी तरह से 'नो-एनक्रोचमेंट ज़ोन' (No-Encroachment Zone) घोषित किया जाए और अवैध कब्जों को बुलडोजर चलाकर स्थायी रूप से हटाया जाए। इसके अलावा, व्यस्त इलाकों में खाली पड़ी जमीनों का अधिग्रहण कर अत्याधुनिक मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स बनाए जाएं। जनता ने यह भी मांग उठाई है कि ई-रिक्शा और सिटी बसों के लिए अलग लेन और रूट निर्धारित किए जाएं क्योंकि बिना किसी परमिट के बेतरतीब चलने वाले ई-रिक्शा भी जाम की बहुत बड़ी वजह बन चुके हैं। यदि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने समय रहते इन जमीनी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले समय में जयपुर का ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो जाएगा और पर्यटन व्यवसाय को भी भारी नुकसान पहुंचेगा।