Rajasthan : फलोदी में 8 मौतों पर गरजा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र से पूछा जानलेवा सड़कें बनाने वालों पर क्या कार्रवाई हुई

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राजस्थान के फलोदी में हुआ वो भीषण सड़क हादसा, जिसमें एक ही परिवार के सात लोगों समेत आठ जिंदगियां खत्म हो गईं, अब देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट पर पहुँच गया है। इस दर्दनाक घटना पर गहरी चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कई कड़े और चुभने वाले सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) को नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा है।

यह मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जब एक जनहित याचिका में इस हादसे को "मानव निर्मित त्रासदी" बताते हुए सड़कों के गलत डिजाइन और निर्माण के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई।

क्या था वो दिल दहला देने वाला हादसा?

यह भयानक दुर्घटना फलोदी के पास एनएच-11 पर हुई थी, जब दो एसयूवी गाड़ियों की आमने-सामने से ज़ोरदार टक्कर हो गई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों गाड़ियाँ लोहे के ढेर में तब्दील हो गईं और उनमें सवार 8 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में एक ही परिवार के सात लोग शामिल थे, जो शादी के बाद दुल्हन को विदा कराकर अपने घर लौट रहे थे। इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के कड़े सवाल

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बेहद सख़्त रुख अपनाया। उन्होंने याचिकाकर्ता की इस दलील से सहमति जताई कि ऐसी घटनाएं सिर्फ लापरवाही का नतीजा नहीं, बल्कि गलत तरीके से सड़क बनाने का परिणाम भी होती हैं।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा:

  • गलत और ख़राब डिज़ाइन वाली सड़क बनाने वाले अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने के लिए क्या नियम हैं?
  • ऐसे हादसों के बाद दोषी लोगों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
  • भविष्य में इस तरह के "मौत के स्पॉट" (Black Spots) बनने से रोकने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है?

लापरवाही या सिस्टम की नाकामी?

याचिका में कहा गया है कि जहाँ यह हादसा हुआ, वहाँ सड़क का डिज़ाइन बेहद ख़राब था, कोई डिवाइडर नहीं था और न ही कोई चेतावनी वाले साइन बोर्ड लगे थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर सड़क बनाने में लापरवाही न की गई होती, तो इन आठ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम सड़क सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ने वाला है। यह सवाल अब सिर्फ फलोदी हादसे का नहीं, बल्कि देश भर में उन हजारों किलोमीटर लंबी सड़कों का है, जहाँ गलत डिजाइन और निर्माण की वजह से लोग रोज़ अपनी जान गंवा रहे हैं। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार कोर्ट के इन सवालों का क्या जवाब देती है और क्या सड़कों पर होने वाली इन मौतों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।