Rajasthan court verdict : मरने से पहले पत्नी ने खोल दिया था राज, अब पति को फांसी पर लटकाएगा कानून

Post

News India Live, Digital Desk: Rajasthan court verdict :  चरित्र पर शक के चलते अपनी ही पत्नी को जिंदा जलाकर मार डालने वाले एक हैवान पति को अदालत ने उसके किए की सबसे कठोर सजा सुनाई है। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की एक अदालत ने इस नृशंस हत्याकांड को "रेयरेस्ट ऑफ द रेयर" (विरल से विरलतम) मामला मानते हुए आरोपी पति मुकेश को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला उस मृत पत्नी के लिए न्याय की एक बड़ी जीत है, जिसने अपनी आखिरी सांसों में अपने पति के खौफनाक गुनाह का पर्दाफाश कर दिया था।

क्या थी वो खौफनाक रात?

यह दिल दहला देने वाली वारदात करीब दो साल पहले, 2023 में हुई थी। आरोपी पति मुकेश को अपनी पत्नी सुनीता के चरित्र पर शक था। उसे लगता था कि उसकी पत्नी का किसी और से अवैध संबंध है। इस शक ने उसे अंदर ही अंदर इतना अंधा कर दिया था कि एक रात उसने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं।

उस काली रात में, मुकेश ने अपने ही घर में पहले अपनी पत्नी सुनीता के हाथ-पैर बांधे। इसके बाद उसने बेबस सुनीता पर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। सुनीता की दर्दनाक चीखें भी उसके पत्थर दिल पति को पिघला नहीं पाईं।

एक बयान जो बना फांसी का फंदा

आग में बुरी तरह झुलस चुकी सुनीता को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। मौत से लड़ते हुए, सुनीता ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना मृत्यु-पूर्व बयान (Dying Declaration) दर्ज कराया। अपनी आखिरी सांसों में उसने पूरी हिम्मत के साथ अपने पति मुकेश की हैवानियत की पूरी कहानी बयां कर दी। उसने साफ-साफ बताया कि कैसे उसके पति ने ही उसे बांधकर जिंदा जलाया है।

सुनीता का यही आखिरी बयान इस केस में सबसे बड़ा और सबसे निर्णायक सबूत बना। इसी बयान के आधार पर पुलिस ने मुकदमा चलाया और अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखा।

अदालत का ऐतिहासिक फैसला

सोमवार को, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) महेंद्र कुमार मेहता की अदालत में जब यह मामला फैसले के लिए आया, तो लोक अभियोजक (Public Prosecutor) ने इसे समाज को झकझोर देने वाला 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' केस बताते हुए आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग की।

तमाम सबूतों और गवाहों, खासकर मृतका के मृत्यु-पूर्व बयान को आधार मानते हुए, अदालत ने आरोपी मुकेश को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी करार दिया और उसे फांसी की सजा सुनाई। जैसे ही जज ने यह फैसला सुनाया, अदालत में मौजूद मृतका के परिवार वालों की आंखों में आंसू आ गए। यह फैसला घरेलू हिंसा और शक के नाम पर होने वाली क्रूरता के खिलाफ एक बड़ी मिसाल कायम करता है।