कनाडा सरकार द्वारा अस्थायी निवासियों और अप्रवासियों पर शिकंजा कसने का यह नया और बड़ा कदम क्या

कनाडा सरकार द्वारा अस्थायी निवासियों और अप्रवासियों पर शिकंजा कसने का यह नया और बड़ा कदम क्या

उत्तर अमेरिका के बेहद लोकप्रिय देश कनाडा की राजनीति और आव्रजन नीतियों में इन दिनों एक बहुत बड़ा भूचाल आया हुआ है, जिसने दुनियाभर के छात्रों और कामगारों की नींद उड़ा दी है। कनाडा की संघीय सरकार ने देश के भीतर लगातार बढ़ रहे आवास संकट, स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे भारी दबाव और बुनियादी ढांचे की समस्याओं से निपटने के लिए अस्थायी निवासियों की संख्या पर ऐतिहासिक और बेहद कड़ी नकेल कसने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। कैनेडियन सरकार की नई और संशोधित आव्रजन योजना के अनुसार, आने वाले वर्ष यानी 2027 तक देश के भीतर गैर-स्थायी आबादी (Non-Permanent Residents) के अनुपात को काफी हद तक घटाकर एक निश्चित और सीमित दायरे में लाया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों, विदेशी कामगारों (Temporary Foreign Workers) और शरण चाहने वालों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसके कारण वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई थी। अब जस्टिन ट्रूडो प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि देश की आंतरिक व्यवस्था को संभालने के लिए आव्रजन के नियमों को कड़ा करना और वीजा की सीमाओं को तय करना बेहद अनिवार्य हो चुका है, जिसका सीधा और गंभीर असर उन तमाम विदेशी नागरिकों पर पड़ेगा जो कनाडा जाकर बसने का सपना देख रहे हैं।

पंजाब और हरियाणा के युवाओं के लिए कनाडा की इस नई आव्रजन नीति और वीजा नियमों में सख्ती का क्या मतलब है?

भारत के उत्तरी राज्यों, विशेषकर पंजाब और हरियाणा के लाखों युवाओं के बीच पिछले कई दशकों से कनाडा जाने का क्रेज एक सांस्कृतिक और सामाजिक ट्रेंड की तरह बन चुका है, जहाँ हर साल हजारों छात्र स्टडी वीजा और वर्क परमिट पर वहां जाते हैं। कनाडा सरकार द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम के बाद सबसे बड़ा झटका पंजाब के उन युवाओं और उनके परिवारों को लगा है जिन्होंने अपनी जमीनों को बेचकर या भारी-भरकम कर्ज लेकर अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए कनाडा भेजा था या भेजने की तैयारी कर रहे थे। नए नियमों के तहत अब स्टडी वीजा की संख्या में भारी कटौती की जाएगी, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के दाखिले के कोटे सीमित किए जाएंगे और साथ ही पढ़ाई के बाद मिलने वाले वर्क परमिट (PGWP) के नियमों को भी इतना पेचीदा बना दिया जाएगा कि वहां परमानेंट रेजिडेंसी (PR) हासिल करना पहले के मुकाबले बेहद कठिन हो जाएगा। पंजाब के हर दूसरे गांव में आपको ऐसे युवा मिल जाएंगे जो या तो कनाडा में पढ़ रहे हैं या वहां जाने के लिए आईलेट्स (IELTS) की तैयारी में जुटे हैं, ऐसे में सरकार के इस अचानक और कड़े फैसले ने उन सभी परिवारों के सपनों पर पानी फेरने का काम किया है जो कनाडा को अपनी मंजिल मानते थे।

कनाडा के इस कड़े फैसले के पीछे वहां का गहराता हाउसिंग संकट और स्थानीय नागरिकों का बढ़ता आक्रोश क्या भूमिका निभा रहा है?

कनाडा में अचानक से बदले इस आव्रजन रुख के पीछे वहां की जमीनी हकीकत और स्थानीय नागरिकों का लगातार बढ़ता हुआ गुस्सा सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से कनाडा के बड़े शहरों जैसे टोरंटो, वैंकूवर और कैलगरी में मकानों के किराए आसमान छू रहे हैं और आम नागरिकों के लिए किफायती आवास मिलना लगभग असंभव सा हो गया है, जिससे जनता के बीच भारी असंतोष फैल रहा था। इसके अलावा, अस्पतालों में लंबी कतारें, रोजगार के अवसरों में कमी और सार्वजनिक परिवहन पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव के लिए वहां की विपक्षी पार्टियों और स्थानीय लोगों ने अंधाधुंध अप्रवासन को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया था। सरकार पर लगातार बढ़ रहे राजनीतिक दबाव के चलते ही ट्रूडो प्रशासन को यह मजबूरन कदम उठाना पड़ा है ताकि वह अगले चुनावों से पहले अपनी घरेलू जनता को यह विश्वास दिला सके कि देश की अर्थव्यवस्था और संसाधनों की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है। इस प्रकार की नीतियों के चलते अब केवल वही लोग कनाडा में प्रवेश पा सकेंगे जिनके पास उच्च कोटि के कौशल या बेहद दुर्लभ पेशेवर योग्यताएं होंगी, जबकि आम और औसत पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए वहां का रास्ता अब आसान नहीं रहने वाला है।

इस स्थिति के बाद पंजाब के युवाओं के पास अब क्या विकल्प बचे हैं और क्या विदेश जाने का सपना अब धीरे-धीरे धूमिल हो रहा है?

कनाडा के दरवाजे अप्रवासियों के लिए धीरे-धीरे संकुचित होते देख पंजाब के युवाओं और उनके अभिभावकों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। जो एजेंट कुछ समय पहले तक युवाओं को आसानी से कनाडा का वीजा दिलाने के बड़े-बड़े सपने दिखाया करते थे, वे अब खुद इस असमंजस में हैं कि आने वाले दिनों में उनका यह बिजनेस कैसे चल पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं को अब केवल कनाडा के भरोसे बैठने के बजाय दुनिया के अन्य देशों जैसे यूरोप, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया या फिर खुद अपने देश भारत के भीतर ही रोजगार और शिक्षा के नए और आधुनिक अवसरों की तलाश करनी चाहिए। इसके अलावा, यदि युवा विदेश जाना ही चाहते हैं तो उन्हें अपनी तकनीकी स्किल्स, भाषा की दक्षता और उच्च शिक्षा के स्तर को इतना मजबूत करना होगा कि वे किसी भी देश के कड़े नियमों की कसौटी पर आसानी से खरे उतर सकें। कुल मिलाकर, कनाडा द्वारा उठایا गया यह कड़ा कदम इस बात का स्पष्ट संदेश है कि अब विदेश जाने का दौर पूरी तरह बदल चुका है और केवल भीड़ का हिस्सा बनकर विदेश जाने वाले दिनों का हमेशा के लिए अंत हो रहा है।