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कनाडा एयरपोर्ट पर ही रोक दिए गए अकाली दल के दिग्गज नेता बंटी रोमाणा! इमिग्रेशन विभाग ने वापस पंजाब डिपोर्ट करने का दिया आदेश

पंजाब की सियासत और अंतरराष्ट्रीय इमिग्रेशन के गलियारों से इस वक्त की एक बेहद बड़ी, सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बेहद कद्दावर नेता, मुख्य प्रवक्ता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के बेहद करीबी माने जाने वाले परमबंस सिंह बंटी रोमाणा (Parambans Singh Bunty Romana) को लेकर एक बहुत बड़ा झटका लगा है। निजी दौरे पर कनाडा पहुंचे बंटी रोमाणा को कनाडाई इमिग्रेशन और बॉर्डर सिक्योरिटी एजेंसी के अधिकारियों ने एयरपोर्ट के भीतर प्रवेश करने से साफ इनकार कर दिया और उन्हें वहीं से वापस भारत (पंजाब) डिपोर्ट करने का फरमान सुना दिया। कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उठाए गए इस बेहद कड़े और अचानक उठाए गए कदम के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर से भारी खलबली मच गई है। सूत्रों के मुताबिक, बंटी रोमाणा के खिलाफ पंजाब के अलग-अलग थानों में दर्ज आपराधिक मुकदमों और पुलिस केसों के कारण कनाडाई अधिकारियों ने उनकी एंट्री पर यह बड़ा वीटो लगाया है। आइए एक खोजी राजनीतिक रिपोर्टर की नजर से देखते हैं कि कनाडा के उस हवाई अड्डे पर आखिर क्या हुआ और इस पूरे मामले के पीछे के असली कानूनी और सियासी मायने क्या हैं।

कनाडा की धरती पर कदम रखते ही इमिग्रेशन काउंटर पर घिरे अकाली नेता, घंटों हुई कड़ी पूछताछ

पूरा वाकया तब शुरू हुआ जब अकाली दल के युवा चेहरा परमबंस सिंह बंटी रोमाणा भारत से उड़ान भरकर कनाडा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। विमान से उतरने के बाद जैसे ही वे अपने पासपोर्ट और वीजा के साथ इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए काउंटर पर पहुंचे, वहां मौजूद कनाडाई अधिकारियों के कंप्यूटर सिस्टम पर उनके नाम को लेकर एक रेड फ्लैग या अलर्ट दिखाई दिया। अधिकारियों ने उन्हें तुरंत सामान्य लाइन से हटाकर एक अलग सुरक्षा केबिन में बिठा दिया। सुरक्षा जांच एजेंसियों और इमिग्रेशन विभाग के उच्च अधिकारियों ने बंटी रोमाणा से उनके दौरे के मकसद, उनके प्रोफाइल और विशेष रूप से भारत में उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों को लेकर कई घंटों तक बेहद कड़ी और तीखी पूछताछ की।

पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज पुराने मुकदमों और सोशल मीडिया विवादों ने कनाडाई धरती पर बिगाड़ा खेल

कनाडाई दूतावास और एयरपोर्ट सूत्रों से मिल रही पुख्ता जानकारी के अनुसार, बंटी रोमाणा की एंट्री रोके जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण पंजाब में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले हैं। पिछले कुछ सालों के दौरान पंजाब पुलिस ने उन पर सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने, सार्वजनिक शांति भंग करने के प्रयास और राजनीतिक धरना-प्रदर्शनों के दौरान दर्जनों मामले दर्ज किए हैं। कनाडाई इमिग्रेशन कानून (Canadian Immigration Law) के तहत यदि किसी विदेशी नागरिक के खिलाफ उसके गृह देश में गंभीर आपराधिक मामले या अदालती कार्रवाई लंबित होती है, तो उसे देश की सुरक्षा और शांति के लिए खतरा मानते हुए प्रवेश देने से इनकार किया जा सकता है। इसी सख्त नियम का हवाला देते हुए कनाडाई अथॉरिटी ने बंटी रोमाणा के वीजा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड या होल्ड कर दिया और उन्हें अगली ही उपलब्ध फ्लाइट से वापस पंजाब लौटने का आदेश थमा दिया।

सुखबीर बादल के सबसे वफादार सिपहसालार हैं बंटी रोमाणा, शिरोमणि अकाली दल के कैंप में पसरा सन्नाटा

परमबंस सिंह बंटी रोमाणा को शिरोमणि अकाली दल के भीतर एक बेहद आक्रामक और पढ़ा-लिखा नेता माना जाता है। वे अकाली दल के यूथ विंग के अध्यक्ष रह चुके हैं और हर मोर्चे पर सुखबीर सिंह बादल के साथ चट्टान की तरह खड़े दिखाई देते हैं। टीवी डिबेट्स और प्रेस कॉन्फ्रेंस में आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस सरकार को घेरने वाले रोमाणा के साथ विदेश में हुए इस बड़े घटनाक्रम के बाद चंडीगढ़ स्थित अकाली दल के मुख्य दफ्तर में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है। पार्टी के कई बड़े नेता इस मुद्दे पर कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से पूरी तरह बच रहे हैं। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी की कानूनी टीम इस पूरे मामले का अध्ययन कर रही है कि क्या यह कोई तकनीकी खामी थी या फिर कनाडाई सरकार ने जानबूझकर यह सख्त रुख अपनाया है।

विरोधी दलों को मिला अकाली दल पर हमले का मौका, सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस

बंटी रोमाणा को कनाडा एयरपोर्ट से डिपोर्ट किए जाने की खबर जैसे ही पंजाब के न्यूज़ चैनल्स पर फ्लैश हुई, वैसे ही सूबे की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने अकाली दल पर तीखे तंज कसना शुरू कर दिया। विरोधी नेताओं का कहना है कि जो लोग खुद को पंजाब का मसीहा बताते हैं, उनके कारनामों की फाइलें अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुल रही हैं और विदेशी सरकारें भी उन्हें अपने देश में घुसने नहीं दे रही हैं। वहीं दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर भी इंटरनेट यूजर्स के बीच इस घटना को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ लोग कनाडाई सरकार के इस फैसले को सही ठहरा रहे हैं, तो कुछ अकाली समर्थकों का कहना है कि यह पंजाब सरकार द्वारा दर्ज किए गए राजनीतिक प्रतिशोध के मामलों का नतीजा है, जिसके कारण एक वरिष्ठ नेता को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। बहरहाल, इस इंटरनेशनल डिपोर्टेशन ने पंजाब की राजनीति को एक नया और बेहद गरमा-गरम मुद्दा दे दिया है।

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