अमृतसर में सिख पंथ का अनोखा उत्साह; मीरी-पीरी दिवस के पावन अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब से निकला भव्य खालसा मार्च
सिख इतिहास के महान सिद्धांत 'मीरी और पीरी' के पावन दिवस के अवसर पर धार्मिक नगरी अमृतसर में एक बेहद भव्य और उत्साह से भरा नजारा देखने को मिला है। सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब से मीरी-पीरी दिवस के मौके पर एक विशाल और पारंपरिक खालसा मार्च (नगर कीर्तन) की शुरुआत की गई है। इस धार्मिक मार्च में बड़ी संख्या में निहंग सिखों, गतका पार्टियों और श्रद्धालुओं ने पूरी आन-बान और शान के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वाहेगुरु के जयकारों और गंतव्य की ओर बढ़ते इस मार्च का सिख संगत द्वारा जगह-जगह जोरदार स्वागत किया जा रहा है। यह पारंपरिक खालसा मार्च अमृतसर से अपनी पूरी भव्यता के साथ रवाना होकर कल ऐतिहासिक नगरी तरनतारन साहिब पहुंचेगा, जहाँ इसका समापन और विशेष दीवान सजाया जाएगा।
श्री अकाल तख्त साहिब से पारंपरिक वाद्य यंत्रों और जयकारों के साथ हुआ आगाज
मीरी-पीरी के सिद्धांत के संस्थापक और सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व व मीरी-पीरी दिवस को समर्पित इस आयोजन की शुरुआत श्री अकाल तख्त साहिब से हुई। सिंह साहिबान और विभिन्न पंथक शख्सियतों की छत्रछाया में अरदास करने के बाद खालसा मार्च की शुरुआत की गई। इस दौरान पारंपरिक शस्त्रों के साथ गतका के जौहर दिखाते नौजवान और खालिसाई बाने में सजे श्रद्धालु आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। अमृतसर की सड़कों पर गूंजते 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के जयकारों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक और ऊर्जावान बना दिया, जिसे देखने के लिए सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
सिख इतिहास का अनूठा संदेश है 'मीरी-पीरी', अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक
इतिहासकारों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, 'मीरी' राजनीतिक और सांसारिक प्रभुत्व का प्रतीक है, जबकि 'पीरी' आध्यात्मिक मार्गदर्शन का। सिखों के छठे पातशाही गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने दो तलवारें धारण कर यह संदेश दिया था कि एक सिख को आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ समाज में हो रहे अन्याय और जुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए अपनी रक्षा करने में भी सक्षम होना चाहिए। मीरी-पीरी दिवस का यह पावन पर्व हमें हमेशा दीन-दुखियों की रक्षा करने और सच्चाई के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। यही वजह है कि इस दिन निकलने वाले इस खालसा मार्च में पंजाब के कोने-कोने से संगत बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है।
कल तरनतारन साहिब पहुंचेगा खालसा मार्च, सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम
अमृतसर से रवाना हुआ यह भव्य खालसा मार्च विभिन्न गांवों और कस्बों से होते हुए अपनी तय यात्रा पूरी करेगा और कल ऐतिहासिक श्री दरबार साहिब तरनतारन पहुंचेगा। यात्रा के मार्ग में आने वाले सभी पड़ावों पर स्थानीय संगत द्वारा लंगर और चाय-पानी की विशेष व्यवस्था की गई है। इस विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की ट्रैफिक समस्या या असुविधा से बचने के लिए अमृतसर और तरनतारन जिला प्रशासन तथा पुलिस विभाग ने सुरक्षा और रूट डायवर्जन के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन से पूरे माझा क्षेत्र में एक बार फिर से धार्मिक और उल्लासपूर्ण माहौल देखने को मिल रहा है।