पंजाब कांग्रेस में मचेगा सियासी भूचाल! राहुल गांधी के करीबी चन्नी की नाराजगी से बढ़ीं मुश्किलें, रंधावा की अमित शाह से मुलाकात ने दी संकेत
पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही सियासी उठापटक अब एक निर्णायक मोड़ पर आ पहुंची है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले चरणजीत सिंह चन्नी की बढ़ती नाराजगी ने पार्टी आलाकमान की नींद उड़ा दी है। इसी बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। राज्य में आगामी चुनावों से ठीक पहले इस तरह की हलचल से कयास लगाए जा रहे हैं कि पंजाब कांग्रेस में कोई बड़ा 'खेला' होने वाला है।
चन्नी की नाराजगी और पार्टी के भीतर गुटबाजी
चरणजीत सिंह चन्नी, जो दलित चेहरा होने के साथ-साथ राहुल गांधी की पसंद भी रहे हैं, पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा को लेकर खफा चल रहे हैं। चर्चा है कि पंजाब कांग्रेस में मची वर्चस्व की लड़ाई और टिकट वितरण को लेकर उनकी राय को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे वे असहज हैं। सूत्रों की मानें तो चन्नी के समर्थकों ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जताना शुरू कर दिया है, जो पंजाब में पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है। कांग्रेस के भीतर चन्नी जैसे कद्दावर नेता की नाराजगी का सीधा असर आगामी चुनाव में वोट बैंक पर पड़ना तय माना जा रहा है।
रंधावा की शाह से मुलाकात ने बढ़ाई तल्खी
दूसरी ओर, सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई गुप्त मुलाकात ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में भूचाल ला दिया है। रंधावा का शीर्ष भाजपा नेतृत्व से मिलना यह संकेत देता है कि पंजाब कांग्रेस के कई बड़े नेता अब अपने राजनीतिक भविष्य के लिए दूसरे विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से इसे औपचारिक मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन पंजाब की सियासत के जानकार इसे 'बड़े बदलाव' की आहट मान रहे हैं। अगर रंधावा जैसे अनुभवी नेता पार्टी छोड़ते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक अपूरणीय क्षति होगी।
चुनाव से पहले होगा 'बड़ा खेला'?
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस की यह आंतरिक कलह विपक्षी दलों के लिए एक खुला अवसर बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आलाकमान ने समय रहते चन्नी की नाराजगी दूर नहीं की और टूट को नहीं रोका, तो पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। राज्य में गठबंधन की राजनीति और नए सियासी समीकरणों के बीच, यह स्पष्ट है कि अगले कुछ दिनों में पंजाब कांग्रेस की तस्वीर बदल सकती है। क्या चन्नी कोई अलग रास्ता चुनेंगे या रंधावा की अगली पारी भाजपा के साथ होगी? यह सवाल पंजाब की हर जनसभा में चर्चा का विषय बना हुआ है।