लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) का बवाल और सुर्खियों में आए फरहत देव
पंजाब के फगवाड़ा स्थित प्रसिद्ध लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) परिसर में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शन, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो और छात्रों के बयानों के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और विश्वविद्यालय से जुड़े छात्र मोहम्मद फरहत (जो इंटरनेट पर 'फरहत देव' के नाम से लोकप्रिय हैं) आ गए हैं। आधुनिक गूगल डिस्कवर, आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO), सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) और जनरेटिव एआई सर्च (AI Search) के इस डिजिटल दौर में इस हाई-प्रोफाइल मामले से जुड़े हर एक अपडेट को इंटरनेट पर बेहद तेजी से खोजा जा रहा है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर फरहत देव कौन हैं और LPU हिंसा मामले में उनकी भूमिका को लेकर जांच क्यों की जा रही है।
कौन हैं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फरहत देव और क्या है उनका बैकग्राउंड?
मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले मोहम्मद फरहत, जिन्हें सोशल मीडिया पर 'फरहत देव' के नाम से जाना जाता है, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) से जुड़े रहे हैं। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी सक्रिय रहते हैं और एक इन्फ्लुएंसर के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। यूनिवर्सिटी के भीतर विभिन्न मुद्दों पर मुखरता से अपनी बात रखने और सोशल मीडिया पर अपने वीडियो के माध्यम से चर्चा में रहने के कारण वह छात्रों के बीच एक जाने-पहचाने चेहरे के रूप में उभरे। हालांकि, जब LPU कैंपस में छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया और प्रशासनिक भवनों तथा परिसरों को नुकसान पहुंचाया गया, तब अचानक विभिन्न वीडियो क्लिप्स और साथी छात्रों के बयानों में उनका नाम सामने आने के बाद वह देश भर की मीडिया और जांच एजेंसियों की नजरों में आ गए।
LPU हिंसा और DSW ऑफिस में तोड़फोड़ के गंभीर आरोप
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में भड़की हिंसा के दौरान डायरेक्टरेट ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर (DSW) ऑफिस और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की गई थी। इस दौरान सामने आए कुछ वीडियो और एक छात्रा रम्या मिश्रा द्वारा सार्वजनिक किए गए बयानों व दावों ने इस मामले को पूरी तरह से पलट दिया। इन आरोपों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में उग्र भीड़ को उकसाने और व्यवस्था को बिगाड़ने में कुछ चुनिंदा चेहरों की भूमिका रही है। आरोप यह भी लगाया गया कि परिसरों के भीतर अनधिकृत प्रवेश और तोड़फोड़ की गतिविधियों के दौरान कुछ खास लोग आक्रामक रूप से सक्रिय थे, जिससे स्थिति को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए बेहद मुश्किल हो गया था। लोकल (Geographical) और रीजनल ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से इस घटना ने पंजाब के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और अनुशासन के स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फरहत देव की सफाई और उनके ऊपर मिल रही धमकियों का दावा
अपने ऊपर लग रहे तमाम गंभीर आरोपों और सोशल मीडिया पर चल रही तीखी चर्चाओं के बीच, फरहत देव ने सामने आकर इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। उनका यह पक्ष सामने आया है कि उन्हें एक वीडियो के आधार पर गलत तरीके से पूरे मामले के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उनका कहना है कि वह उस रात केवल सामान्य परिस्थितियों में अंदर गए थे और उन्होंने किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या हिंसा में हिस्सा नहीं लिया, बल्कि कई मौकों पर स्थिति को शांत करने की कोशिश की थी। इसके साथ ही, उनके समर्थकों और उनके द्वारा यह भी दावा किया गया है कि इस विवाद के बाद से उन्हें सोशल मीडिया पर धमकियां मिल रही हैं। हालांकि, इस पूरे प्रकरण में पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गहन तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पर्दे के पीछे असल साजिशकर्ता कौन थे।
पुलिस जांच का दायरा और एसआईटी (SIT) की पैनी नजर
लगातार सामने आ रहे नए वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट्स और अफवाहों के मद्देनजर पंजाब पुलिस और गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। विश्वविद्यालय के भीतर लगभग 30 से 40 छात्रों को इस पूरी जांच के दायरे में रखा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन किस प्रकार एक बड़ी हिंसा और आगजनी में बदल गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जो लोग भी ऑनलाइन माध्यमों से अफवाहें फैलाने या भीड़ को उकसाने में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) और डिजिटल एनेलिटिक्स यह दर्शाते हैं कि जब भी इस तरह के मामलों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों के नाम जुड़ते हैं, तो मामले की ऑनलाइन रीच और चर्चा कई गुना बढ़ जाती है।