पंजाब सरकार के एक फैसले से कश्मीरी परिवारों की बढ़ी टेंशन, आखिर क्यों बंद करने पड़े शादियों के कार्ड बांटना
पंजाब सरकार के एक हालिया प्रशासनिक और नीतिगत फैसले ने कश्मीरी परिवारों और वहां के स्थानीय कारोबारियों के बीच अचानक एक बड़ी चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। इस फैसले का जमीनी असर कुछ इस कदर देखा जा रहा है कि कई परिवारों ने अपने घरों में होने वाले मांगलिक कार्यों और शादियों के निमंत्रण पत्र यानी कार्ड बांटने तक पर फिलहाल रोक लगा दी है। शादी-ब्याह के इस सीजन में अचानक आए इस संकट ने घाटी से लेकर पंजाब तक के व्यापारिक और पारिवारिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
इस वजह से कश्मीरी परिवारों के बीच मची है खलबली
दरअसल, पंजाब और कश्मीर के बीच दशकों पुराना व्यापारिक, सामाजिक और पारिवारिक नाता रहा है। पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में अंतरराज्यीय परिवहन, प्रवासन या स्थानीय व्यापारिक नियमों में किए गए कुछ कड़े बदलावों का सीधा असर उन कश्मीरियों पर पड़ा है जो शादियों की खरीदारी, कैटरिंग या लॉजिस्टिक्स के लिए पूरी तरह पंजाब के बाजारों पर निर्भर थे। नियमों के इस नए फेरबदल के कारण ऐन वक्त पर शादियों के बजट और व्यवस्थाओं में बड़ा व्यवधान आ गया है, जिससे लोग यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि तय तारीख पर कार्यक्रम कैसे संपन्न होंगे।
शादियों के कार्ड बांटने रोकने पर क्यों मजबूर हुए लोग?
कश्मीर में शादियों का आयोजन बेहद भव्य और कई दिनों तक चलने वाला होता है, जिसके लिए महीनों पहले से पंजाब के जालंधर, लुधियाना और अमृतसर जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों से कपड़ों, ड्राई फ्रूट्स के डिब्बों और विशेष उपहारों की बुकिंग की जाती है। पंजाब सरकार के नए आदेशों के बाद सप्लाई चेन प्रभावित होने और परिवहन पर लगी कुछ पाबंदियों के कारण सामान समय पर घाटी नहीं पहुंच पा रहा है। इसी अनिश्चितता को देखते हुए कई कश्मीरी परिवारों ने शादियों के कार्ड बांटने का काम बीच में ही रोक दिया है ताकि तारीखों में होने वाले संभावित बदलाव से बचा जा सके।
कश्मीरी कारोबारियों और स्थानीय बाजारों में भी गहराया संकट
इस पूरे घटनाक्रम से केवल आम परिवार ही नहीं, बल्कि कश्मीर और पंजाब दोनों जगहों के स्थानीय व्यापारी भी बेहद परेशान हैं। कश्मीरी कपड़ा व्यापारियों, ड्राई फ्रूट सप्लायर्स और वेडिंग प्लानर्स का कहना है कि पंजाब सरकार के इस अप्रत्याशित कदम से करोड़ों रुपये का कारोबार दांव पर लग गया है। दोनों राज्यों के व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और नियमों में ढील देने की मांग की है ताकि आम जनता को इस शादी के सीजन में और ज्यादा मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।