पंजाब की सियासत गरमाई: कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने आप सरकार पर बोला बड़ा हमला

पंजाब की सियासत गरमाई: कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने आप सरकार पर बोला बड़ा हमला

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर अनुभवी नेताओं की तीखी बयानबाजी ने बड़ा भूचाल ला दिया है। जालंधर छावनी से कांग्रेस विधायक और पूर्व ओलंपियन परगट सिंह ने मौजूदा आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है। परगट सिंह ने राज्य में चल रही धान की खरीद प्रक्रिया को लेकर एक बहुत बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है, जिसमें उन्होंने करोड़ों रुपये के भारी-भरकम घोटाले की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में लगातार बिगड़ती जा रही कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। उनका यह हमला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य के किसान मंडियों में अपनी फसल बेचने को लेकर पहले से ही तमाम तरह की परेशानियों और व्यवस्थाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। इस तीखे हमले के बाद से पंजाब की सियासत में एक बार फिर नया उबाल आ गया है और विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह से आक्रामक हो गए हैं।

धान खरीद प्रक्रिया और करोड़ों के घोटाले का सनसनीखेज दावा

परगट सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और विभिन्न सार्वजनिक मंचों से बोलते हुए सीधे तौर पर यह दावा किया है कि राज्य में धान खरीद के नाम पर बड़ा वित्तीय भ्रष्टाचार चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र और बिचौलियों की मिलीभगत से धान की खरीद, बारदाने के आवंटन और भुगतान प्रक्रिया में करोड़ों रुपये का हेरफेर किया जा रहा है, जिससे सीधे तौर पर किसानों और राज्य के खजाने दोनों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। उनका कहना है कि कागजों पर सब कुछ दुरुस्त और पारदर्शी दिखाया जा रहा है, लेकिन मंडियों की ज़मीनी हक़ीक़त इसके बिल्कुल विपरीत है। मंडियों में किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने और समय पर भुगतान करने के बड़े-बड़े दावे केवल कागजी साबित हो रहे हैं। परगट सिंह ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और इस महाघोटाले के पीछे छिपे असली चेहरों को जनता के सामने बेनकाब किया जा सके।

पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहरे सवाल और अपराधियों के बढ़ते हौसले

धान खरीद में कथित भ्रष्टाचार के अलावा परगट सिंह ने पंजाब में कानून-व्यवस्था के मौजूदा हालात को लेकर भी सरकार को बुरी तरह घेरा है। उन्होंने कहा कि राज्य में आए दिन फिरौती, डकैती, लूटपाट, हत्या और गैंगवार की घटनाएं आम हो चुकी हैं, जिससे आम जनता और कारोबारियों में भारी खौफ का माहौल बना हुआ है। अपराधियों के मन से कानून का डर पूरी तरह समाप्त हो चुका है और पुलिस प्रशासन सरकार के राजनीतिक दबाव के चलते खुलकर काम करने में असमर्थ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां सरकार राज्य में शांति, सुरक्षा और सुशासन के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ रोजाना सामने आने वाली सनसनीखेज आपराधिक वारदातें इन दावों की पोल खोल देती हैं। परगट सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि जिस राज्य में आम नागरिक, माता-बहनें और व्यापारी अपने ही घरों और कार्यस्थलों पर सुरक्षित महसूस न करें, वहां विकास और बदलाव की बातें करना पूरी तरह बेमानी है।

किसानों की समस्याओं और मंडियों की बदहाली पर सरकार की कार्यशैली पर प्रहार

पंजाब को देश का अन्नदाता कहा जाता है और यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कृषि पर आधारित है, लेकिन मौजूदा समय में राज्य का किसान हर तरफ से बुरी तरह पिस रहा है। परगट सिंह ने आरोप लगाया कि धान के सीजन के दौरान मंडियों में बारदाने की भारी कमी, उठान में देरी और नमी के नाम पर किसानों का शारीरिक व आर्थिक शोषण किया जा रहा है। किसानों को अपनी धान की फसल बेचने के लिए कई-कई दिनों तक मंडियों में खुले आसमान के नीचे और रात-रातभर ठिठुरते हुए इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। सरकार के नुमाइंदे और मंत्री केवल विज्ञापनों और जुबानी جمع-खर्च की राजनीति में व्यस्त हैं, जबकि ज़मीन पर अन्नदाता लाचार और बेबस नजर आ रहा है। कांग्रेस विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही मंडियों की व्यवस्था में सुधार नहीं किया और किसानों की इन गंभीर समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो उनकी पार्टी किसानों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर एक बड़ा जन आंदोलन छेड़ेगी।

राजनीतिक गलियारों में हलचल और सरकार की ओर से पलटवार की तैयारी

परगट सिंह के इन तीखे और बेबाक हमलों के बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी काफी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए भ्रष्टाचार के इन तमाम मामलों में कड़े जवाब तलब करना शुरू कर दिया है। हालांकि, आम आदमी पार्टी और सरकार के प्रवक्ताओं की तरफ से हमेशा की तरह इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया जा रहा है। सरकार का आधिकारिक पक्ष यह है कि धान की खरीद और किसानों को भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और निर्धारित नियमों के तहत सीधे किसानों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे केवल अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इस तरह की बेबुनियाद बयानबाजी कर रहे हैं। इसके बावजूद, जिस तरह से परगट सिंह ने तथ्यों और ज़मीनी हक़ीक़तों का हवाला देते हुए सरकार को घेरा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर आम जनता के बीच एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा करेगा, जिसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ना तय है।