जालंधर की मोदी फार्म मैट्रेस फैक्ट्री में लगी भीषण आग, कई जोरदार धमाकों के बाद आसमान में छाया धुएं का गुबार; मची अफरातफरी
पंजाब के औद्योगिक और व्यस्त शहरों में शुमार जालंधर से एक बेहद डरावनी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे इलाके में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। जालंधर के एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में स्थित मोदी फार्म गद्दा यानी मैट्रेस निर्माण फैक्ट्री (Modi Form Mattress Factory) में अचानक से भयंकर आग भड़क उठी, जिसने कुछ ही पलों में विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि दूर से ही आसमान में काले धुएं का विशाल गुबार साफ-साफ देखा जा सकता था। आग लगने की इस घटना के दौरान फैक्ट्री के अंदर रखे केमिकल, फोम और अन्य ज्वलनशील पदार्थों के कारण कई जोरदार धमाके भी हुए, जिनकी आवाज से आसपास का पूरा इलाका दहल उठा। इस भयंकर हादसे के बाद से स्थानीय निवासियों और फैक्ट्रियों के मालिकों में भारी दहशत फैल गई है और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तरफ भागते नजर आए। आज के इस विस्तृत और गहराई से विश्लेषण वाले लेख में हम जालंधर की इस भीषण आग की घटना के हर एक पहलू, दमकल विभाग की रेस्क्यू कार्रवाई और औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आप इस बड़ी लोकल न्यूज से पूरी तरह वाकिफ हो सकें।
कैसे शुरू हुई जालंधर की इस मैट्रेस फैक्ट्री में आग और क्या था शुरुआती मंजर
घटना के दिन जालंधर की उस मैट्रेस फैक्ट्री में रोज की तरह काम चल रहा था, तभी अचानक दोपहर या शाम के वक्त फैक्ट्री के किसी कोने से धुएं का हल्का गुबार उठता हुआ दिखाई दिया। जब तक वहां काम कर रहे कर्मचारी कुछ समझ पाते और आग पर काबू पाने की कोशिश करते, तब तक सूखी फोम और गद्दों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायनों के कारण आग ने पूरी इमारत को अपनी आगोश में ले लिया। आग की भीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देखते ही देखते लपटें खिड़कियों और दरवाजों से बाहर निकलने लगीं और आसपास के आसमान में कोहराम जैसा माहौल बन गया। फैक्ट्री के अंदर बड़ी मात्रा में गद्दे बनाने वाला स्पंज, फॉर्म और ज्वलनशील कैमिकल रखा हुआ था, जो आग के लिए ईंधन का काम कर रहा था। गनीमत यह रही कि जैसे ही आग ने विकराल रूप लेना शुरू किया, कर्मचारियों ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत फैक्ट्री से बाहर भागकर अपनी जान बचाई, वरना एक बड़ा जानी नुकसान भी हो सकता था।
सिलसिलेवार जोरदार धमाकों से दहला इलाका, मची भारी भगदड़
इस भीषण अग्निकांड के दौरान सबसे डरावना पहलू वे लगातार होने वाले जोरदार धमाके थे, जिन्होंने पूरे जालंधर शहर में सनसनी फैला दी। मैट्रेस और फोम फैक्ट्रियों में आग लगने पर वहां रखे केमिकल के ड्रम, प्रेशर सिलिंडर और कंप्रेसर अत्यधिक गर्मी के कारण एक के बाद एक बम की तरह फटने लगते हैं। मोदी फार्म स्थित इस फैक्ट्री में भी जब आग अंदर तक पहुंची, तो एक के बाद एक कई भयंकर धमाके हुए, जिनकी आवाजें कई किलोमीटर दूर तक सुनी गईं। इन धमाकों की गूंज सुनते ही आसपास की कॉलोनियों और अन्य फैक्ट्रियों के लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर सड़कों पर निकल आए। लोगों को लगा कि शायद कोई बड़ा बम धमाका या औद्योगिक हादसा हो गया है। इस अफरातफरी के माहौल में ट्रैफिक पूरी तरह से ठप हो गया और पुलिस प्रशासन को तुरंत एहतियात के तौर पर उस पूरे मार्ग को बंद करना पड़ा ताकि किसी राहगीर को कोई नुकसान न पहुंच सके।
दमकल विभाग की लंबी मशक्कत और आग बुझाने का चुनौतीपूर्ण अभियान
घटना की सूचना मिलते ही जालंधर फायर ब्रिगेड विभाग (Jalandhar Fire Department) के होश उड़ गए और तुरंत शहर के विभिन्न फायर स्टेशनों से एक के बाद एक दमकल की दर्जनों गाड़ियां मौके के लिए रवाना कर दी गईं। आग इतनी भयानक थी कि उस पर काबू पाने के लिए दमकल कर्मियों को अपनी जान हथेली पर रखकर घंटों कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। आसपास की संकीर्ण गलियों और भारी धुएं के गुबार के कारण दमकल की गाड़ियों को फैक्ट्री के अगदी और पिछवाड़े तक पानी की बौछार करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसपास की अन्य इकाइयों से भी पानी के टैंकर मंगवाए। कई घंटों की लगातार मेहनत के बाद फायर फाइटर्स ने आग के मुख्य हिस्से को तो शांत कर लिया, लेकिन अंदर सुलग रही आग और धुएं को पूरी तरह से बुझाने में काफी समय लग गया। इस राहत और बचाव कार्य में पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन ने भी पूरा सहयोग किया ताकि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में लाई जा सके।
औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर फिर उठे गंभीर सवाल
जालंधर की इस मोदी फार्म मैट्रेस फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने एक बार फिर से इस बेहद गंभीर और ज्वलंत मुद्दे को उजागर कर दिया है कि क्या शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में अग्निशमन सुरक्षा नियमों (Fire Safety Norms) का पालन पूरी सख्ती से किया जा रहा है या नहीं। जानकारों का कहना है कि शहर के भीतर घनी आबादी या मिश्रित इलाकों में इस तरह की ज्वलनशील सामग्री से जुड़ी फैक्टरियों का संचालन होना आम नागरिकों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है। कई फैक्ट्रियों में न तो उचित फायर एक्सटिंग्विशर होते हैं और न ही आपातकालीन निकास (Emergency Exit) के पर्याप्त रास्ते होते हैं, जिसके कारण ऐसी छोटी चिंगारियां पल भर में बड़े हादसों में बदल जाती हैं। जिला प्रशासन और नगर निगम को अब कड़े कदम उठाते हुए सभी औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) करानी चाहिए ताकि भविष्य में जालंधर या किसी अन्य शहर में ऐसी दिल दहला देने वाली घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।