कनाडा में पीआर पाना हुआ और भी मुश्किल; 516 तक पहुंचा CRS स्कोर, पंजाबियों के लिए रातों-रात बदली इमिग्रेशन की रणनीति

कनाडा में पीआर पाना हुआ और भी मुश्किल; 516 तक पहुंचा CRS स्कोर, पंजाबियों के लिए रातों-रात बदली इमिग्रेशन की रणनीति

कनाडा में बसने और वहां की स्थायी नागरिकता यानी पीआर (PR - Permanent Residency) हासिल करने का सपना देखने वाले भारतीय और खासकर पंजाबी युवाओं के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। कनाडा के इमिग्रेशन सिस्टम में लगातार हो रहे कड़े बदलावों के बीच एक्सप्रेस एंट्री (Express Entry) का कटऑफ स्कोर यानी सीआरएस (CRS Score) बढ़कर 516 तक पहुंच गया है। इस भारी-भरकम स्कोर ने उन हजारों छात्रों और वर्क परमिट धारकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जो लंबे समय से कनाडा में अपने परमानेंट रेजिडेंसी के रास्ते खुलने का इंतजार कर रहे थे। इस नई चुनौती के सामने आने के बाद अब पंजाब और देश के अन्य हिस्सों से विदेश जाने वाले युवाओं को अपनी इमिग्रेशन रणनीतियों में बड़ा बदलाव करना पड़ रहा है।

क्यों बढ़ रहा है सीआरएस स्कोर और क्या हैं कनाडा की नई नीतियां?

कनाडा की सरकार लगातार अपनी इमिग्रेशन नीतियों को सख्त कर रही है ताकि देश के हाउसिंग सेक्टर, हेल्थ केयर और जॉब मार्केट पर पड़ रहे दबाव को नियंत्रित किया जा सके। एक्सप्रेस एंट्री के इतिहास में 516 का सीआरएस स्कोर काफी ऊंचा माना जाता है, जिसका सीधा मतलब यह है कि अब केवल औसत स्कोर या साधारण वर्क एक्सपीरियंस वाले उम्मीदवारों के लिए पीआर हासिल करना लगभग असंभव सा हो गया है। कनाडा में इमिग्रेशन नियमों के कड़े होने से उन युवाओं के माथे पर शिकन आ गई है जो पढ़ाई पूरी करने के बाद पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) पर रह रहे थे और कम स्कोर के सहारे ही पीआर का सपना देख रहे थे।

पंजाबियों पर सबसे बड़ा असर और भविष्य के लिए क्या हैं विकल्प?

चूंकि पंजाब से हर साल हजारों छात्र और युवा बेहतर भविष्य की आस में कनाडा का रुख करते हैं, इसलिए इस नई नीति का सबसे गहरा प्रभाव पंजाबी परिवारों और युवाओं पर पड़ा है। जानकारों का कहना है कि अब केवल ट्रेडिशनल स्टडी वीज़ा या जनरल रूट के जरिए कनाडा जाना सुरक्षित नहीं रह गया है। युवाओं को अब प्रांतीय नामांकित कार्यक्रमों यानी पीएनपी (PNP Options), फ्रेंच भाषा सीखने (French Language Skills) या फिर लेबर मार्केट की डिमांड के अनुसार खास स्किल्स हासिल करने पर जोर देना होगा ताकि वे इस बढ़े हुए सीआरएस स्कोर की रेस में टिक सकें। इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आंख मूंदकर विदेश जाने के बजाय अब पूरी प्लानिंग और लीगल गाइडेंस के साथ ही आगे कदम बढ़ाना समझदारी होगी।

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