बीजेपी-अकाली दल गठबंधन पर अभी भी संशय बरकरार: पीएम मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात से शुरू हुई चर्चा
भारतीय राजनीति के गलियारों में एक बार फिर पुराने राजनीतिक गठबंधनों के पुनरुद्धार को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। पंजाब की राजनीति में अहमियत रखने वाले शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच एक बार फिर साथ आने की चर्चाओं ने उस वक्त जोर पकड़ लिया जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की हाई-प्रोफाइल मुलाकात सामने आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के बीच हुई इस मुलाकात के बाद से राजनीतिक विश्लेषकों ने दोनों दलों के बीच पुरानी दोस्ती के दोबारा पटरी पर लौटने के कयास लगाने शुरू कर दिए थे। हालांकि, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के एक स्पष्ट बयान ने इन चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है और मामला ठंडा पड़ता नजर आ रहा है।
पीएम मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात से गरमाया सियासी बाजार
कुछ समय पहले कृषि कानूनों और अन्य राजनीतिक मुद्दों के चलते अकाली दल ने एनडीए (NDA) से अपना पुराना नाता तोड़ लिया था, जिसके बाद से दोनों दल अलग-अलग राहों पर चल रहे थे। लेकिन हाल ही में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल आमने-सामने आए और उनके बीच बातचीत हुई, तो पंजाब की सियासत में हलचल मच गई। इस मुलाकात को दोनों दलों के बीच बर्फ पिघलने और आगामी चुनावों के मद्देनजर गठबंधन की संभावनाओं के तौर पर देखा जाने लगा। राजनीतिक जानकारों का मानना था कि पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने के लिए दोनों दलों का साथ आना दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
सीएम नायब सिंह सैनी के बयान से ठंडा पड़ा मामला
प्रधानमंत्री और सुखबीर बादल की मुलाकात से जहां सियासी गलियारों में गर्मजोशी थी, वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Nayab Singh Saini) के एक बयान ने तमाम अटकलों पर पानी फेर दिया। सैनी ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल इस तरह के किसी भी गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक या पक्की बात नहीं हुई है। उनके इस दो-टूक बयान के सामने आते ही गठबंधन की चर्चाएं ठंडी पड़ गई और यह साफ हो गया कि अभी दोनों दलों के बीच दूरियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। बहरहाल, आने वाले दिनों में राजनीतिक परिस्थितियां क्या रुख लेती हैं, यह देखने वाली बात होगी, लेकिन फिलहाल भाजपा-अकाली गठबंधन पर संशय के बादल बरकरार हैं।