सीएम भगवंत मान ने मुख्य चुनाव आयुक्त के भाई पर लगाया सनसनीखेज आरोप

सीएम भगवंत मान ने मुख्य चुनाव आयुक्त के भाई पर लगाया सनसनीखेज आरोप

राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से घमासान मच गया है और इस बार मामला सीधे तौर पर देश की प्रशासनिक व्यवस्था, चुनाव आयोग और एक मुख्यमंत्री के बीच आमने-सामने के टकराव का बन गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फ्रांस की राजधानी पेरिस से भारत लौटने के दौरान इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर हुई अपनी चेकिंग और कार्रवाई को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज बयान दिया है जिसने राजनीतिक तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार और प्रशासनिक महकमे पर बदले की भावना से काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब आम आदमी पार्टी (AAP) और चुनाव आयोग के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर पहले से ही तनातनी का माहौल बना हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने एक बार फिर देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है कि आखिर एयरपोर्ट पर ऐसा क्या हुआ था जिसके बाद मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से यह तीखा आरोप लगाना पड़ा।

पेरिस यात्रा से लौटने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर क्या हुआ था पूरा मामला

पूरा घटनाक्रम उस वक्त शुरू हुआ जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान फ्रांस के पेरिस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय फूड फेस्टिवल में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौटे थे। मार्केटफेड के निमंत्रण पर इस दौरे के लिए उन्हें शुरुआत में कुछ प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और अदालत से मंजूरी मिलने के बाद ही वे पेरिस के लिए रवाना हुए थे। अपनी इस आधिकारिक यात्रा को पूरा करने के बाद जब वे और उनकी पत्नी गुरप्रीत कौर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, तो सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग के अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री और उनके साथ मौजूद अधिकारियों के सामान की सघन तलाशी ली गई। हालांकि घंटों चली इस जांच के दौरान अधिकारियों को उनके सामान से कोई भी आपत्तिजनक या अवैध सामग्री नहीं मिली, लेकिन इसके बावजूद उन पर पचास हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया गया और उन्हें करीब दो से तीन घंटे तक एयरपोर्ट पर ही रोककर रखा गया।

'ज्ञानेश कुमार के भाई हैं कस्टम चीफ', सीएम भगवंत मान का बड़ा दावा

चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और आधिकारिक बयानों के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरी घटना की परतें खोलते हुए एक बड़ा दावा किया जिसने सबको चौंका दिया। भगवंत मान ने आरोप लगाया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर तैनात सीमा शुल्क विभाग के प्रमुख मनीष कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के सगे भाई हैं। सीएम मान ने दावा किया कि चूँकि आम आदमी पार्टी और उनकी पार्टी के नेता लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और उनके फैसलों के खिलाफ मुखर होकर विरोध दर्ज करा रहे हैं और उनका इस्तीफा मांग रहे हैं, इसी राजनीतिक खुन्नस को निकालने के लिए एयरपोर्ट पर उनके साथ ऐसा बर्ताव किया गया। मान ने दो टूक शब्दों में कहा कि अधिकारियों को ऊपर से दबाव दिया गया था ताकि उनकी छवि को मीडिया और जनता के बीच धूमिल किया जा सके और उन्हें अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब अधिकारियों पर दबाव की बात सामने आई तो उन्होंने खुद कह दिया कि अगर यह उनकी नौकरी का सवाल है तो वे फॉर्मेलिटी पूरी कर लें, लेकिन इस तरह की ओछी राजनीति से वे डरने वाले नहीं हैं।

आम आदमी पार्टी और चुनाव आयोग के बीच बढ़ती तल्खियाँ और राजनीतिक संघर्ष

यह पूरा वाकया सिर्फ एक एयरपोर्ट की चेकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और संस्थागत संघर्ष की एक लंबी दास्तान जुड़ी हुई है। पिछले कुछ समय से आम आदमी पार्टी और देश के चुनाव आयोग के बीच संबंधों में काफी खटास देखने को मिली है। आप नेताओं ने देश की चुनावी प्रक्रिया, मतदान के तरीकों और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर कई बार सवाल उठाए हैं। पार्टी ने खुलकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है और उनके इस्तीफे की मांग तक कर डाली है। ऐसे संवेदनशील माहौल में पंजाब के एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री का एयरपोर्ट पर इस तरह रोका जाना और उस पर से कस्टम प्रमुख का सीधा संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त से जोड़ा जाना, इस लड़ाई को एक नए और आक्रामक मोड़ पर ले आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मामले भविष्य में केंद्र और राज्यों के संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना सकते हैं। आम आदमी पार्टी का यह भी आरोप है कि देश में अब लोकतांत्रिक व्यवस्था की आड़ में ऐसी तानाशाही प्रवृत्तियां पनप रही हैं जो विपक्षी नेताओं को मानसिक रूप से परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़तीं।

लोकतांत्रिक व्यवस्था और 'डेमोकेटर' की नई बहस, विपक्ष के तीखे तेवर

इस पूरी घटना के बाद से देश की राजनीति में एक बार फिर तानाशाही बनाम लोकतंत्र की बहस छिड़ गई है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उनका कहना है कि आज के दौर में चुनी हुई सरकारों और विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र का बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है। चुनाव के समय विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों जैसे ईडी और सीबीआई के सक्रिय होने और चुनाव खत्म होने के बाद उन मामलों के ठंडे पड़ जाने का हवाला देते हुए पार्टी ने देश की लोकतांत्रिक सेहत पर गहरे सवाल खड़े किए हैं। भगवंत मान ने एक नया कटाक्ष करते हुए कहा है कि देश अब एक ऐसी व्यवस्था की तरफ बढ़ रहा है जहाँ औपचारिक रूप से लोकतंत्र तो है, लेकिन अंदरखाने तानाशाही चलाई जा रही है, जिसे उन्होंने 'डेमोकेटर' का नाम दिया है। एयरपोर्ट पर हुई इस घटना को इसी व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है जहाँ एक तरफ सत्ता पक्ष अपनी नीतियों और नियमों का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे सीधे तौर पर व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रहा है।

भविष्य के राजनीतिक समीकरण और प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठते गंभीर सवाल

फ्रांस के दौरे से लौटने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई इस घटना ने प्रशासनिक महकमे की कार्यप्रणाली पर भी कई बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। क्या एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री को विदेश यात्रा से लौटने पर इस तरह से रोककर रखना और भारी जुर्माना लगाना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या फिर इसके पीछे वाकई कोई राजनीतिक बदले की भावना काम कर रही थी? इन सवालों के जवाब भले ही आने वाले दिनों में जांच और राजनीतिक बयानों के जरिए सामने आएंगे, लेकिन इसने यह जरूर साबित कर दिया है कि भारत की सियासत में संस्थाओं की स्वायत्तता और उनके निष्पक्ष चरित्र को लेकर विवाद अब किस हद तक गहरे हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाने का मन बना लिया है, वहीं प्रशासनिक हलकों से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जैसे-जैसे मामले की गर्माहट बढ़ेगी, यह देखना दिलचस्प होगा कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त कार्यालय और केंद्र सरकार इस तीखे आरोप पर क्या रुख अपनाते हैं और पंजाब के मुख्यमंत्री की यह लड़ाई राष्ट्रीय राजनीति में क्या नया रंग दिखाती है।