जालंधर में यूथ कांग्रेस को बड़ा झटका, नेता अंशुमन कालिया ने छोड़ा हाथ का साथ; 'आप' का थामा दामन

जालंधर में यूथ कांग्रेस को बड़ा झटका, नेता अंशुमन कालिया ने छोड़ा हाथ का साथ; 'आप' का थामा दामन

पंजाब के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त जालंधर से एक बड़ी और चौंकाने वाली सियासी खबर सामने आ रही है। जालंधर की राजनीति में सक्रिय युवा चेहरा और यूथ कांग्रेस के प्रमुख नेता अंशुमन कालिया ने कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़कर आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल होने का बड़ा ऐलान कर दिया है। पंजाब सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने पार्टी मुख्यालय में अंशुमन कालिया का विधिवत स्वागत किया और उन्हें पार्टी का पटका पहनाकर आम आदमी पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस सियासी फेरबदल के बाद जालंधर के राजनीतिक समीकरणों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इसका असर स्थानीय निकाय चुनावों पर भी साफ देखने को मिल सकता है।

क्यों बदला अंशुमन कालिया ने पाला और क्या है 'आप' की रणनीति?

कांग्रेस पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थामने वाले अंशुमन कालिया का जालंधर के युवा मतदाताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा से नाराज चल रहे कालिया ने अंततः आप के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए पार्टी ज्वाइन करने का फैसला किया। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी इस सियासी सेंधमारी के जरिए जालंधर शहरी क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने की जुगत में है। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने पार्टी में उनका स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में हो रहे जनहित के विकास कार्यों से प्रभावित होकर लगातार युवा नेता 'आप' परिवार से जुड़ रहे हैं, जिससे संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी।

जालंधर की राजनीति पर क्या पड़ेगा इस बड़े बदलाव का असर?

अंशुमन कालिया के कांग्रेस से आम आदमी पार्टी में जाने को जालंधर में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद स्थानीय स्तर पर युवा चेहरों का पार्टी छोड़कर जाना संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जालंधर में आप की यह रणनीति विरोधी दलों के वोट बैंक में सेंध लगाने और आगामी चुनावों से पहले मजबूत मोर्चेबंदी तैयार करने का हिस्सा है। अंशुमन कालिया के 'आप' में शामिल होने से जहां एक तरफ आम आदमी पार्टी का कुनबा मजबूत हुआ है, वहीं कांग्रेस खेमे में मायूसी और सुगबुगाहट का दौर शुरू हो गया है।

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