एशियन गेम्स : भारत-पाकिस्तान हॉकी महामुकाबला देखने जापान जाना चाहते थे सीएम भगवंत मान
अंतरराष्ट्रीय खेल के मैदानों और कूटनीतिक गलियारों से इस वक्त एक बहुत ही बड़ी, दिलचस्प और राजनीतिक हलचल पैदा करने वाली खबर सामने आ रही है। एशियाई खेलों के महासमर यानी एशियन गेम्स 2026 (Asian Games 2026) के दौरान जब भी भारत और पाकिस्तान (India vs Pakistan) के बीच कोई हाई-वोल्टेज मुकाबला होता है, तो पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों की सांसे थम जाती हैं। इस बार भी भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले बहुप्रतीक्षित हॉकी महामुकाबले को मैदान पर बैठकर लाइव देखने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (CM Bhagwant Mann) बेहद उत्सुक थे और उन्होंने जापान जाने की अपनी पूरी तैयारी कर ली थी। मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से उनकी इस जापानी यात्रा और मैच देखने के आधिकारिक कार्यक्रम के लिए केंद्रीय विदेश मंत्रालय और संबंधित विभागों से नियमों के तहत जरूरी राजनीतिक राजनीतिक क्लीयरेंस और अनुमति मांगी गई थी। लेकिन केंद्र सरकार (Central Government) की तरफ से इस यात्रा को हरी झंडी नहीं दी गई और कूटनीतिक तथा प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए सीएम भगवंत मान के जापान जाने के प्रस्ताव को अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। आज के इस विस्तृत, राजनीतिक और खेल-विश्लेषणात्मक आलेख में हम आपको इस हाई-प्रोफाइल मामले के सभी अंदरूनी पहलुओं, केंद्र और राज्य के बीच की इस प्रशासनिक प्रक्रिया और इसके सियासी मायने के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
एशियन गेम्स में भारत-पाकिस्तान हॉकी मैच का रोमांच और सीएम भगवंत मान की उत्सुकता
खेलों के प्रति अपने जुझारू और उत्साही स्वभाव के लिए जाने जाने वाले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान हमेशा से देश के पारंपरिक खेलों और विशेष रूप से हॉकी के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं। जब जापान की मेजबानी में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 के इस बड़े टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक हॉकी चिर-प्रतिद्वंद्वी मुकाबला तय हुआ, तो हर खेल प्रेमी की तरह मुख्यमंत्री मान के मन में भी इस ऐतिहासिक मैच को सीधे स्टेडियम में बैठकर देखने की इच्छा जाग उठी। पंजाब का भारतीय हॉकी के साथ एक बहुत पुराना, गहरा और भावनात्मक नाता रहा है क्योंकि देश की राष्ट्रीय टीम में खेलने वाले अधिकांश दिग्गज खिलाड़ी इसी माटी से निकलकर आते हैं। मुख्यमंत्री यह चाहते थे कि वे जापान के खेल मैदान पर जाकर भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएं और अपनी उपस्थिति से देश के खिलाड़ियों में जीत का नया जोश भरें। इसी खेल प्रेम और व्यक्तिगत भावना के तहत उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय यात्रा का पूरा कार्यक्रम तैयार किया था और आधिकारिक माध्यमों से इसकी औपचारिकताएं पूरी करनी शुरू कर दी थीं।
केंद्र सरकार द्वारा अनुमति न मिलने के प्रशासनिक और कूटनीतिक कारण
किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री जब किसी आधिकारिक या व्यक्तिगत दौरे पर देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से बाहर किसी विदेशी दौरे पर जाते हैं, तो देश के प्रोटोकॉल और नियमों के अनुसार केंद्रीय विदेश मंत्रालय (MEA) तथा गृह मंत्रालय से राजनीतिक क्लीयरेंस (Political Clearance) लेना अनिवार्य होता है। जब पंजाब सरकार की तरफ से सीएम भगवंत मान की जापान यात्रा की यह फाइल केंद्र सरकार के पास भेजी गई, तो उस पर उच्च स्तर पर विचार-विमर्श किया गया। कूटनीतिक सूत्रों और प्रशासनिक जानकारों का यह मानना है कि इस प्रकार के उच्च पदों पर बैठे संवैधानिक पदाधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए समय, सुरक्षा प्रबंध, राजकीय व्यस्तताएं और अन्य कूटनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखा जाता है। केंद्र सरकार के संबंधित विभागों ने तमाम प्रशासनिक और कूटनीतिक पहलुओं की समीक्षा करने के बाद इस यात्रा के प्रस्ताव को मंजूरी देने से मना कर दिया, जिसके बाद मुख्यमंत्री का यह जापान दौरा रद्द करना पड़ा। इस फैसले के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है कि आखिर किन विशेष कारणों से इस यात्रा को अनुमति नहीं मिल सकी।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं
जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई कि मुख्यमंत्री भगवंत मान का एशियन गेम्स में भारत-पाकिस्तान का मैच देखने के लिए जापान जाने का कार्यक्रम केंद्र सरकार की अनुमति न मिलने के कारण रद्द हो गया है, वैसे ही राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं की जा रही हैं कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस तरह के प्रशासनिक विषयों पर किस प्रकार के समन्वय काम करते हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और समर्थकों का एक वर्ग इसे खेल प्रेम पर लगने वाला एक प्रशासनिक ब्रेक मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक जानकारों का यह स्पष्ट मत है कि ऐसे मामलों को किसी राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय नियमों और प्रोटोकॉल के दायरे में ही देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से फिलहाल इस विषय पर कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन खेल प्रेमियों के बीच इस बात की चर्चा जरूर है कि काश मुख्यमंत्री मैदान पर पहुंचकर टीम का हौसला बढ़ा पाते।
भारतीय हॉकी टीम का मैदान पर शानदार प्रदर्शन और देश भर का बढ़ता उत्साह
भले ही मुख्यमंत्री भगवंत मान व्यक्तिगत रूप से जापान के स्टेडियम में जाकर भारत-पाकिस्तान के इस महामुकाबले का लुत्फ नहीं उठा सके, लेकिन देश भर के करोड़ों खेल प्रेमियों की तरह वे भी टीवी और लाइव ब्रॉडकास्ट के जरिए अपनी टीम के हर एक गोल पर नजर बनाए हुए थे। भारतीय हॉकी टीम ने हमेशा की तरह इस एशियन गेम्स में भी अपने बेहतरीन खेल, गजब की फुर्ती और अनुशासित रणनीति का प्रदर्शन करते हुए विपक्षी टीमों के पसीने छुड़ा दिए हैं। पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों का मानसिक और शारीरिक संतुलन हमेशा से देखने लायक होता है, और इस बार भी मैदान पर खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि वे देश का नाम रोशन करने के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। खेल चाहे कोई भी हो और दर्शक दीर्घा में कोई बैठे या न बैठे, जब देश का तिरंगा फहराता है और राष्ट्रगान गूंजता है, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।