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April 25 2026 10:23 pm

Punjab Political : बागी गुट को लगा तगड़ा झटका, तोता सिंह के बेटे ने फिर थामा सुखबीर बादल का हाथ

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News India Live, Digital Desk: पंजाब की राजनीति में मंगलवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय जत्थेदार तोता सिंह के बेटे बरजिंदर सिंह 'माखन' बरार ने आधिकारिक तौर पर शिरोमणि अकाली दल (बादल) में वापसी कर ली है। बागी गुट 'शिरोमणि अकाली दल (पुनः सुरजीत)' को करारा झटका देते हुए माखन बरार ने सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। इस घर वापसी को मोगा और मालवा बेल्ट में अकाली दल की मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है।

साजिश का आरोप लगाकर छोड़ी थी बागी पार्टी

माखन बरार ने महज तीन दिन पहले (4 अप्रैल 2026) शिरोमणि अकाली दल (पुनः सुरजीत) के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बागी गुट के अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह और विधायक मनप्रीत सिंह अयाली पर गंभीर आरोप लगाए थे। बरार का दावा था कि बागी गुट का गठन पंथ की सेवा के लिए नहीं, बल्कि केंद्रीय एजेंसियों और पंजाब की 'आप' सरकार के इशारे पर शिरोमणि अकाली दल को कमजोर करने के लिए एक 'साजिश' के तहत किया गया था।

सुखबीर बादल ने किया स्वागत, मालवा में बढ़ेगी ताकत

चंडीगढ़ में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने माखन बरार को सिरोपा भेंट कर पार्टी में शामिल किया। सुखबीर बादल ने कहा कि पुराने साथियों की वापसी से पार्टी फिर से अपने गौरवमयी इतिहास की ओर बढ़ रही है। माखन बरार के आने से मोगा जिले में अकाली दल को नई संजीवनी मिली है, क्योंकि जत्थेदार तोता सिंह का परिवार इस क्षेत्र में गहरा प्रभाव रखता है।

"जमीर की आवाज पर लिया फैसला": माखन बरार

पार्टी में शामिल होने के बाद माखन बरार ने कहा, "मेरा जमीर मुझे उस गुट में रहने की इजाजत नहीं दे रहा था जो अकाली दल की जड़ों को काटने के लिए बनाया गया था। मुझे एहसास हुआ कि पंथ और पंजाब का भला केवल शिरोमणि अकाली दल (बादल) ही कर सकता है। मैं बिना किसी शर्त के अपने घर वापस आया हूं और पार्टी की मजबूती के लिए एक साधारण कार्यकर्ता की तरह काम करूंगा।"

बागी गुट में मची खलबली, अयाली ने दी सफाई

माखन बरार के इस्तीफे और फिर बादल खेमे में जाने से बागी गुट के भीतर खलबली मची हुई है। हालांकि, विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने इन आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन एक बड़े चेहरे के जाने से बागी धड़े की साख पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और बागी नेता भी सुखबीर बादल के पाले में लौट सकते हैं।