एलन मस्क के X पर लगेगा पब्लिशर टैक्स? निशिकांत दुबे ने सामुदायिक नोट्स को लेकर दी बड़ी सलाह
News India Live, Digital Desk: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलती भ्रामक खबरों और सूचनाओं की सत्यता को लेकर जारी वैश्विक बहस के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक बड़ा और चौंकाने वाला सुझाव दिया है। संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के प्रमुख सदस्य रहे दुबे ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट 'X' (पूर्व में ट्विटर) के 'कम्युनिटी नोट्स' (Community Notes) फीचर को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि यदि प्लेटफॉर्म पब्लिशर की भूमिका निभा रहा है, तो उस पर 'पब्लिशर टैक्स' (Publisher Tax) लगाने पर विचार किया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने डिजिटल दुनिया और रेगुलेटरी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
क्या है कम्युनिटी नोट्स और क्यों उठी टैक्स की मांग?
X का 'कम्युनिटी नोट्स' फीचर वर्तमान में दुनिया भर के यूजर्स को किसी भी पोस्ट की सत्यता परखने और उसमें अतिरिक्त संदर्भ जोड़ने की अनुमति देता है। निशिकांत दुबे का तर्क है कि जब प्लेटफॉर्म खुद सूचनाओं को मॉडरेट करने या उनमें 'नोट्स' जोड़ने की प्रक्रिया में शामिल होता है, तो वह केवल एक मध्यस्थ (Intermediary) नहीं रह जाता, बल्कि एक पब्लिशर की तरह काम करने लगता है। ऐसे में उसे उन सभी नियमों और टैक्स के दायरे में आना चाहिए जो पारंपरिक मीडिया या पब्लिशिंग हाउस पर लागू होते हैं।
भ्रामक सूचनाओं पर लगाम लगाने की कवायद
सांसद दुबे ने इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि अगर कोई प्लेटफॉर्म किसी सूचना को 'सही' या 'गलत' बताने के लिए सक्रिय हस्तक्षेप करता है, तो उसे उस कंटेंट के लिए जवाबदेह भी होना चाहिए। पब्लिशर टैक्स का सुझाव इसी जवाबदेही को सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। डिजिटल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो यह सोशल मीडिया कंपनियों के राजस्व मॉडल और कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल सकता है।
सोशल मीडिया और सरकार के बीच छिड़ सकती है नई रार
निशिकांत दुबे का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत सरकार पहले से ही नए आईटी नियमों के जरिए सोशल मीडिया दिग्गजों पर नकेल कसने की तैयारी में है। अगर X जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अतिरिक्त टैक्स या पब्लिशर की श्रेणी वाले कड़े नियम लागू होते हैं, तो यह एलन मस्क और भारत सरकार के बीच संबंधों में नया मोड़ ला सकता है। फिलहाल, यह एक सुझाव है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी गूंज बता रही है कि आने वाले दिनों में डिजिटल पब्लिशिंग के नियम और कड़े हो सकते हैं।