Prohibition of Begging Bill 2025 : मिजोरम में भीख मांगने पर लगा बैन, पर इस कानून पर क्यों उठे हैं सवाल

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News India Live, Digital Desk: Prohibition of Begging Bill 2025 : मिजोरम की विधानसभा ने हाल ही में एक ऐसा कानून पास किया है, जिसको लेकर पूरे राज्य में एक नई बहस छिड़ गई है। इस कानून का नाम है 'मिजोरम भिक्षावृत्ति निषेध विधेयक, 2025', जिसका सीधा सा मतलब है कि अब राज्य में भीख मांगना गैर-कानूनी होगा। सरकार का कहना है कि इसका मकसद सिर्फ भीख मांगना रोकना नहीं, बल्कि ऐसा करने वालों की मदद करना और उन्हें सम्मानजनक जीवन देना भी है।

लेकिन यह फैसला जितना सीधा दिखता है, उतना है नहीं। इस बिल के पास होते ही विपक्ष ने इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है।

सरकार ने यह कानून क्यों बनाया?

मिजोरम सरकार के अनुसार, फिलहाल राज्य में भिखारियों की संख्या ज्यादा नहीं है। एक सर्वे के मुताबिक, राजधानी आइजोल में 30 से कुछ ज्यादा भिखारी हैं, जिनमें से ज्यादातर दूसरे राज्यों के हैं।सरकार की असली चिंता भविष्य को लेकर है। जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य में बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन करने वाले हैं, जिससे मिजोरम की राजधानी रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगी। सरकार को डर है कि ट्रेन की आवाजाही शुरू होने के बाद दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में भिखारी मिजोरम आ सकते हैं, जिससे यह एक बड़ी समस्या बन सकती है।

इस नए कानून के तहत, एक 'रिलीफ बोर्ड' बनाया जाएगा और कुछ 'रिसीविंग सेंटर' स्थापित किए जाएंगे।भीख मांगने वाले लोगों को पहले इन सेंटरों में रखा जाएगा और अगर वे दूसरे राज्य के हैं, तो 24 घंटे के अंदर उन्हें उनके घर वापस भेजने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का जोर भिखारियों को पुनर्वास और आजीविका के साधन मुहैया कराने पर भी है।

विपक्ष क्यों कर रहा है इसका विरोध?

मुख्य विपक्षी दल मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) इस कानून का पुरजोर विरोध कर रहा है। विपक्ष के नेता लालछनदामा राल्ते का कहना है कि यह कानून ईसाई धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ है, जो हमें गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति दया और करुणा सिखाता है।उनका मानना है कि इस तरह का प्रतिबंध लगाकर मिजोरम की छवि को नुकसान पहुंचेगा। विपक्ष की दलील है कि कानून बनाने की जगह सरकार को चर्चों और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए।

सरकार का क्या है कहना?

वहीं, मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि इस बिल का मकसद किसी को सजा देना या गरीबी को अपराध बनाना नहीं है। बल्कि, इसका असली उद्देश्य जरूरतमंदों की मदद करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है, और यह काम सरकार, चर्च और एनजीओ के साथ मिलकर ही किया जाएगा।

यह कानून अब एक तरफ सरकार की दूरदर्शिता और दूसरी तरफ मानवीय मूल्यों के बीच बहस का मुद्दा बन गया है। अब देखना यह होगा कि मिजोरम "भिखारी-मुक्त राज्य" बनने के अपने लक्ष्य को कैसे हासिल करता है और इस कानून को जमीन पर किस तरह से लागू किया जाता है।