Pitru Paksha 2025 : द्वादशी श्राद्ध पर पितरों को कैसे करें प्रसन्न, जानें सही समय और सरल विधि
News India Live, Digital Desk: पितृ पक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का महापर्व है। इन 16 दिनों में हम श्राद्ध और तर्पण के माध्यम से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं, जिससे उनका आशीर्वाद हम पर और हमारे परिवार पर बना रहता है। हर तिथि का श्राद्ध उस दिन किया जाता है, जिस तिथि पर परिजन की मृत्यु हुई हो। इसी क्रम में द्वादशी श्राद्ध का भी विशेष महत्व है।
द्वादशी श्राद्ध, जिसे बरस श्राद्ध भी कहा जाता है, उन पितरों के लिए किया जाता है जिनका निधन शुक्ल या कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को हुआ हो। इस दिन का एक और खास महत्व है; यह उन लोगों के श्राद्ध के लिए भी उत्तम माना जाता है जिन्होंने संन्यास लिया हो।
आइए, जानते हैं कि पितृ पक्ष 2025 में द्वादशी श्राद्ध की सही तिथि क्या है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और पितरों का तर्पण करने की सरल विधि क्या है।
द्वादशी श्राद्ध 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि का श्राद्ध शुक्रवार, 26 सितंबर 2025 को किया जाएगा। इस दिन श्राद्ध कर्म करने के लिए तीन मुहूर्त सबसे उत्तम माने जाते हैं:
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:41 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:28 बजे से दोपहर 01:16 बजे तक
- अपराह्न काल: दोपहर 01:16 बजे से दोपहर 03:40 बजे तक
इन शुभ मुहूर्तों में श्राद्ध कर्म करने से पितरों को शांति मिलती है और वे संतुष्ट होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
कैसे करें तर्पण और श्राद्ध? (सरल विधि)
द्वादशी श्राद्ध के दिन आप घर पर ही बहुत सरल तरीके से अपने पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं:
- सुबह की तैयारी: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, धुले हुए वस्त्र (आमतौर पर सफेद धोती) पहनें।
- तर्पण की सामग्री: एक तांबे के बर्तन में शुद्ध जल भरें। उसमें थोड़े से काले तिल, जौ, कुशा (एक प्रकार की पवित्र घास) और सफेद फूल डालें।
- दक्षिण दिशा की ओर मुख: घर में किसी शांत और साफ जगह पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- पितरों का आह्वान: अपने हाथ में जल, अक्षत और तिल लेकर अपने पितरों का ध्यान करें और उनसे श्राद्ध ग्रहण करने के लिए प्रार्थना करें।
- जल अर्पण करें: अब उस जल को धीरे-धीरे किसी दूसरे पात्र में या जमीन पर छोड़ें। जल देते समय अपने पितरों के नाम का स्मरण करें और "ॐ पितृदेवताभ्यो नम:" मंत्र का जाप करें।
- ब्राह्मण भोजन: अपनी श्रद्धा के अनुसार, किसी ब्राह्मण को घर पर बुलाकर आदरपूर्वक भोजन कराएं। भोजन में पितरों की पसंदीदा कोई वस्तु जरूर शामिल करें। यदि ब्राह्मण को बुलाना संभव न हो, तो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं या कच्चा राशन (सीधा) दान कर सकते हैं।
- पंचबलि: भोजन का कुछ अंश गाय, कुत्ते, कौवे, देवता और चींटी के लिए अवश्य निकालें।
- क्षमा याचना: अंत में हाथ जोड़कर अपने पितरों से जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें और उनसे परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें।
इस सरल विधि से किया गया श्राद्ध भी पूर्ण फलदायी होता है और इससे आपके पूर्वज प्रसन्न होकर सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।