Pitru Paksha 2025 : क्या आप भी हैं चतुर्दशी श्राद्ध की चिंता में? जानें शुभ मुहूर्त और ये अचूक विधि, मिलेगी पितरों की मुक्ति
News India Live, Digital Desk: सनातन धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक बेहद महत्वपूर्ण अवसर होता है. यह वो 15 दिन होते हैं जब हम अपने दिवंगत पितरों को तर्पण, श्राद्ध और दान के ज़रिए तृप्त करते हैं. पितृ पक्ष में हर तिथि का अपना एक विशेष महत्व होता है और इन तिथियों पर उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु उस तिथि को हुई होती है. इसी कड़ी में चतुर्दशी श्राद्ध भी काफी अहम माना जाता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी मृत्यु अकाल मृत्यु (दुर्घटना या असमय निधन) के कारण हुई हो.
पितृ पक्ष 2025 में चतुर्दशी श्राद्ध कब होगा?
आने वाले पितृ पक्ष 2025 में, चतुर्दशी श्राद्ध की तारीखें और शुभ मुहूर्त भी जल्दी ही निर्धारित होंगे. यह तिथि हर साल हिंदी पंचांग के अनुसार बदलती रहती है. इसलिए, अगले साल जब पितृ पक्ष शुरू होगा, तो हमें चतुर्दशी तिथि का सही समय और उससे जुड़ा शुभ मुहूर्त देखना होगा. पारंपरिक तौर पर चतुर्दशी श्राद्ध मुख्य रूप से उन लोगों के लिए किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो. बाकी सभी के लिए उनकी मृत्यु तिथि पर ही श्राद्ध करने का विधान है.
चतुर्दशी श्राद्ध और तर्पण की विधि:
पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण करने का विधान बहुत सरल है, लेकिन इसके नियम बहुत महत्वपूर्ण हैं:
- स्वच्छता: सबसे पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- तर्पण सामग्री: पितरों के तर्पण के लिए तांबे के पात्र में गंगाजल या साफ़ जल, काले तिल, चावल और कुशा (पवित्र घास) लेकर तैयार रहें.
- तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें. अपने दोनों हाथों में जल लेकर पितरों का आह्वान करें. उनका नाम लेते हुए 'गोत्र' का उच्चारण करते हुए ॐ अद्य अमुकगोत्र अमुक शर्मणः (या अमुक देव्याः) प्रेतस्य सद्यो मुक्ति प्राप्यते, अस्य देहत्यागादि कृते कृतकार्यार्थं तर्पणम्' कहकर जल धरती पर धीरे-धीरे छोड़ें. इस दौरान अंगूठे से तर्पण करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे पितृदेवों का मार्ग माना गया है.
- पिंड दान और भोजन: इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना बहुत शुभ माना जाता है. संभव हो तो पितरों की पसंद का भोजन बनवाएं. भोजन के बाद अपनी क्षमतानुसार दान-दक्षिणा अवश्य दें.
- क्षमा याचना: तर्पण और श्राद्ध कर्म के बाद, अपने पूर्वजों से अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें और उनका आशीर्वाद लें.
पितृ पक्ष में श्रद्धाभाव से किए गए इन कार्यों से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं, जिससे सुख-शांति और समृद्धि आती है.