
26 मार्च 2025 की सुबह देश के करोड़ों वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं के लिए फिर से वही पुराना नज़ारा सामने आया—पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल कंपनियों ने ताज़ा रेट्स जारी कर दिए हैं, लेकिन उम्मीदों के बावजूद राहत नहीं मिली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल, घरेलू कीमतें स्थिर
दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कभी दाम बढ़ रहे हैं, तो कभी गिरावट आ रही है। बावजूद इसके, भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी स्थिर बनी हुई हैं। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां कीमतों में बदलाव करने के मूड में नहीं हैं।
कब हुआ था आखिरी बदलाव?
अगर पिछली बार के संशोधन की बात करें, तो पेट्रोल और डीजल के दामों में आखिरी बार बदलाव मार्च 2024 में किया गया था। उस समय तेल कंपनियों ने प्रति लीटर 2 रुपये की कटौती की थी, जिसे आम जनता ने राहत की तरह महसूस किया था। लेकिन तब से अब तक कोई नया बदलाव नहीं आया है, जिससे लोगों को अब अगली राहत की उम्मीद सताने लगी है।
बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल के मौजूदा दाम (रुपये प्रति लीटर):
शहर | पेट्रोल (₹) | डीजल (₹) |
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दिल्ली | 94.72 | 87.62 |
मुंबई | 103.44 | 89.97 |
कोलकाता | 103.94 | 90.76 |
चेन्नई | 100.85 | 92.44 |
बेंगलुरु | 102.86 | 88.94 |
लखनऊ | 94.65 | 87.76 |
नोएडा | 94.87 | 88.01 |
गुरुग्राम | 95.19 | 88.05 |
चंडीगढ़ | 94.24 | 82.40 |
पटना | 105.18 | 92.04 |
इन रेट्स में किसी प्रकार का अंतर इस वजह से है क्योंकि हर राज्य में टैक्स की दरें अलग-अलग होती हैं, जिससे फ्यूल की कीमतों पर फर्क पड़ता है।
कीमतें तय कैसे होती हैं?
भारत में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां रोज़ाना पेट्रोल-डीजल की कीमतें निर्धारित करती हैं। इनकी गणना करते वक्त कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों को ध्यान में रखा जाता है, जैसे:
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें
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डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर
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केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स
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ट्रांसपोर्टेशन और रिफाइनिंग का खर्च
इन सभी तत्वों के आधार पर हर दिन सुबह 6 बजे के आसपास नई कीमतें जारी की जाती हैं।
फिलहाल कोई राहत नहीं, आगे क्या होगा?
अभी तक सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कोई संकेत नहीं मिला है कि आने वाले दिनों में कीमतों में बदलाव किया जाएगा। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट होती है, तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।