Pausha Amavasya 2025: साल के जाते जाते पितरों को ऐसे करें खुश, घर में आएगी सुख शांति

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News India Live, Digital Desk: साल 2025 अब अपने अंतिम पड़ाव पर है, यानी दिसंबर का महीना चल रहा है। सर्दियों की ठिठुरन बढ़ गई है, लेकिन भारतीय परंपरा और धर्म में इस महीने की अहमियत बहुत खास है। वजह है'पौष अमावस्या' (Paush Amavasya).

हमारे शास्त्रों में अमावस्या को सिर्फ अंधेरी रात नहीं, बल्कि पितरों (पूर्वजों) के मिलन की तिथि माना गया है। और जब बात पौष महीने की हो, तो इसे "छोटा पितृ पक्ष" भी कहा जाता है। अगर आपको लगता है कि घर में बरकत नहीं हो रही, आपसी झगड़े बढ़ रहे हैं या कोई अनजाना डर सता रहा है, तो हो सकता है यह 'पितृ दोष' के संकेत हों। और यकीन मानिए, दिसंबर की यह अमावस्या इन परेशानियों को दूर करने का सबसे बड़ा मौका है।

आइये, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस दिन आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

कब है यह खास अमावस्या?
दिसंबर के इस महीने में कृष्ण पक्ष की जो अमावस्या आ रही है, उसे ही पौष अमावस्या कहा जाएगा। धार्मिक नजरिये से यह दिन स्नान, दान और पितरों की शांति के लिए समर्पित है। अगर आप गंगा या किसी पवित्र नदी किनारे नहीं जा सकते, तो घर पर ही बाल्टी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर नहा लें, यह भी उतना ही फलदाई है।

पितरों को कैसे मनाएं? (Pitra Puja Vidhi)
ज्यादा ताम-झाम की जरूरत नहीं है। हमारे पूर्वज सिर्फ श्रद्धा के भूखे होते हैं।

  1. जल तर्पण: सुबह जल्दी उठकर, स्नान के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाएं। उसके बाद, दक्षिण दिशा (South Direction) की तरफ मुंह करके अपने पूर्वजों को याद करें और हाथ में काले तिल और जल लेकर उन्हें अर्पित करें। इसे ही 'तर्पण' कहते हैं।
  2. काले तिल का महत्व: इस महीने में ठंड होती है, और तिल की तासीर गर्म होती है। इसलिए पौष अमावस्या पर काले तिल का दान करना और उसका पूजा में इस्तेमाल करना बहुत शुभ माना गया है।

किसका दान करें?
इस दिन गरीबों या जरूरतमंदों को किया गया दान सीधे ईश्वर तक पहुँचता है। चूंकि सर्दी का मौसम है, तो गर्म कपड़े, ऊनी शॉल या कंबल का दान सबसे उत्तम है। इसके अलावा अनाज, गुड़ और तिल के लड्डू दान करने से भी शनि दोष (Shani Dosh) कम होता है।

कुछ सावधानियां (Rules to follow)
दोस्तो, अमावस्या के दिन कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए, नहीं तो बनते काम बिगड़ सकते हैं:

  • इस दिन घर में मांस-मदिरा या तामसिक भोजन (Non-veg & Alcohol) बिल्कुल न बनाएं और न ही खाएं।
  • तुलसी के पत्ते इस दिन नहीं तोड़ने चाहिए।
  • किसी भी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें, बल्कि जितना हो सके मदद करें।
  • शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे पर या पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं। इससे पितरों की आत्मा को रोशनी मिलती है और वो खुशी-खुशी विदा होते हैं।

तो इस बार, साल के आखिरी दिनों में अपने पितरों का आशीर्वाद लेना न भूलें। थोड़ी सी श्रद्धा आपके पूरे परिवार की किस्मत चमका सकती है।