सलूंबर में रहस्यमयी बीमारी का तांडव 5 मासूमों की मौत से सहमा राजस्थान, चिकित्सा विभाग में हड़कंप
News India Live, Digital Desk: राजस्थान के नवनिर्मित जिले सलूंबर में एक अज्ञात और रहस्यमयी बीमारी ने कोहराम मचा रखा है। पिछले कुछ ही दिनों के भीतर 5 मासूम बच्चों की असमय मौत ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। बीमारी के लक्षण इतने घातक हैं कि बच्चों को संभलने तक का मौका नहीं मिल रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्चों को पहले तेज बुखार आता है और फिर अचानक उनके शरीर में जकड़न या अन्य गंभीर लक्षण उभरते हैं, जिससे कुछ ही घंटों में उनकी जान चली जा रही है। इस हृदयविदारक घटना के बाद राज्य का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है।
क्या है मौत की वजह? स्वास्थ्य विभाग भी हैरान
सलूंबर के ग्रामीण इलाकों में फैली इस बीमारी ने विशेषज्ञों को भी उलझन में डाल दिया है। शुरुआती तौर पर इसे मौसमी बीमारी या दिमागी बुखार (Encephalitis) से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी निश्चित नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है। स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय टीमों ने प्रभावित गांवों से पानी, भोजन और बच्चों के ब्लड सैंपल लिए हैं ताकि संक्रमण के असली स्रोत का पता लगाया जा सके। चिकित्सा मंत्री ने जयपुर से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को तुरंत सलूंबर कूच करने के निर्देश दिए हैं।
गांवों में बिछी 'सफेद चादर', घर-घर शुरू हुआ सर्वे
जिन गांवों में मासूमों की मौत हुई है, वहां मातम पसरा हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सलूंबर जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में 'मेडिकल इमरजेंसी' जैसे हालात घोषित कर दिए हैं। 50 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। संदिग्ध लक्षण वाले बच्चों को तुरंत जिला अस्पताल और उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल में भर्ती कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के बुखार को हल्का न लें और तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र पर रिपोर्ट करें।
सफाई और पानी की गुणवत्ता पर उठे सवाल
क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि गंदगी और दूषित पानी के कारण यह बीमारी फैल रही है। कई इलाकों में जलभराव और मच्छरों का प्रकोप भी देखा गया है। प्रशासन ने अब युद्ध स्तर पर फागिंग और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव का काम शुरू करवाया है। सलूंबर विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी है और सरकार से आर्थिक सहायता के साथ-साथ बेहतर इलाज की मांग की है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि आखिर वो कौन सा 'दुश्मन' है जो मासूमों की जान ले रहा है।