आतंक का फव्वारा है पाकिस्तान, क्यों दुनिया के हर मंच पर भारत करता है ये दावा?
News India Live, Digital Desk: कई बार आपने देखा होगा कि दुनिया के अलग-अलग मंचों पर, भारत बार-बार पाकिस्तान को "आतंकवाद का केंद्र" कहता रहा है. सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्यों है और भारत इतने मज़बूत शब्दों में यह बात दुनिया के सामने क्यों रखता है?
भारत का साफ तौर पर मानना है कि सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियां पाकिस्तान से ही पनपती हैं. कश्मीर से लेकर देश के कई हिस्सों में हुए आतंकी हमलों के पीछे भारत हमेशा से पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों का हाथ देखता आया है. यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र से लेकर अन्य अंतरराष्ट्रीय बैठकों में, भारत पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के मुद्दे पर हमेशा आवाज़ उठाता रहा है.
भारत इस बात पर ज़ोर देता है कि पाकिस्तान की ज़मीन पर ऐसे कई आतंकी संगठन खुलेआम फल-फूल रहे हैं, जिन्हें अक्सर पाकिस्तान की सरकार और सेना का कहीं न कहीं समर्थन प्राप्त होता है. भारत कई बार पुख्ता सबूत भी दुनिया के सामने पेश कर चुका है कि कैसे इन संगठनों के सरगना पाकिस्तान में रहते हैं और वहाँ से अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देते हैं. इसी आधार पर भारत यह दावा करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ 'डबल गेम' खेल रहा है - एक तरफ वह दुनिया को आतंक के खिलाफ होने का दिखावा करता है, वहीं दूसरी तरफ आतंकियों को पनाह भी देता है.
भारत की इस कूटनीतिक चाल का मकसद दुनिया को यह समझाना है कि पाकिस्तान आतंकवाद के मामले में अपनी ज़िम्मेदारी से भाग रहा है. भारत चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान पर दबाव बनाए ताकि वह अपनी ज़मीन से चलने वाले आतंकी ढांचों को पूरी तरह से खत्म करे. यह केवल भारत की सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि पूरे विश्व की शांति और सुरक्षा से जुड़ा है. इस तरह, भारत वैश्विक मंचों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान को लगातार अलग-थलग करने की कोशिश करता है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दोहरा मापदंड न अपनाया जाए.