गोलियों और बमों के बाद, अब टेबल पर बैठे दो दुश्मन! क्या यह शांति है, या अगले तूफ़ान की तैयारी?

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हफ़्ते भर की भीषण गोलाबारी और एक-दूसरे पर हवाई हमलों के बाद, आख़िरकार पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान ने अपने हथियार शांत कर लिए हैं। दोनों मुल्क़ एक 'तत्काल युद्धविराम' के लिए राज़ी हो गए हैं, जिससे सीमा पर मचे ख़ून-खराबे पर फ़िलहाल के लिए रोक लग गई है। इस लड़ाई में दोनों तरफ़ से दर्जनों सैनिक और आम नागरिक अपनी जान गँवा चुके हैं।

यह शांति समझौता क़तर और तुर्की की कोशिशों के बाद हुआ है। दोनों देशों के बड़े नेताओं ने क़तर की राजधानी दोहा में बंद कमरों में चार घंटे से ज़्यादा लंबी बातचीत की, जिसके बाद यह फ़ैसला लिया गया।

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है!

यह सिर्फ़ एक शुरुआत है। दोनों देशों के प्रतिनिधि आज फिर से दोहा में मुलाक़ात करेंगे, और इसके बाद 25 अक्टूबर को तुर्की के इस्तांबुल में भी एक बैठक होनी है। मक़सद यह है कि सिर्फ़ लड़ाई न रोकी जाए, बल्कि आगे ऐसी नौबत ही न आए, इसके लिए एक पक्का इंतज़ाम किया जाए।

बातचीत की टेबल पर रखी गईं ये तीखी शर्तें

यह शांति समझौता काँटों भरा है, क्योंकि दोनों तरफ़ से भरोसा बिल्कुल ख़त्म हो चुका है। बातचीत के दौरान दोनों देशों ने अपनी-अपनी मांगें साफ़ कर दी हैं:

  • पाकिस्तान क्या चाहता है? पाकिस्तान का कहना है कि वह शांति तो चाहता है, लेकिन अपनी शर्तों पर। उसकी मांग है कि सीमा पर उसके सैन्य काफ़िलों के लिए एक सुरक्षित रास्ता बनाया जाए।
  • अफ़ग़ानिस्तान की मांग क्या है? वहीं, तालिबान सरकार का नेतृत्व कर रहे अफ़ग़ानिस्तान ने साफ़ कहा है कि पाकिस्तान सबसे पहले अफ़ग़ानिस्तान के अंदर हवाई हमले करना पूरी तरह से बंद करे। साथ ही, उसने पाकिस्तान की जेलों में बंद तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के लड़ाकों को वापस सौंपने की भी मांग की है।

तालिबान के एक प्रतिनिधि ने तो यहाँ तक कहा कि, "हमारा फ़र्ज़ अपने देश की रक्षा करना है। यह एकतरफ़ा लड़ाई है, क्योंकि हमारे पास हवाई हमले रोकने की ताक़त नहीं है।"

क्रिकेटरों की मौत के साये में हुई शांति की बात

यह शांति समझौता उस ख़बर के ठीक बाद हुआ है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। शुक्रवार को ही पाकिस्तान के हवाई हमले में अफ़ग़ानिस्तान के पाकटिका प्रांत में 10 आम नागरिक मारे गए थे, जिनमें तीन स्थानीय क्रिकेटर और दो बच्चे भी शामिल थे। इस घटना के बाद तालिबान ने पाकिस्तान पर 'बार-बार जुर्म करने' का आरोप लगाया था।

इस पूरे विवाद की जड़ यह है कि पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान पर TTP आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाता है, जबकि तालिबान इससे साफ़ इनकार करता है। वहीं, अफ़ग़ानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान बार-बार उसकी सीमा का उल्लंघन करता है। फ़िलहाल, गोलियों की आवाज़ शांत है, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ़ दिख रही है।