ट्रिप पैक कर ली पर गेट से वापस लौट आए? कर्नाटक के पहाड़ों पर ट्रेकिंग के वो नए नियम जो आपका दिल तोड़ सकते हैं
News India Live, Digital Desk : अगर आप पहाड़ों के शौकीन हैं और वीकेंड पर कर्नाटक के घने जंगलों या खूबसूरत चोटियों (जैसे कि कुद्रेमुख, तडियानडामोल या कुमारा पर्वता) की ओर रुख करने का सोच रहे हैं, तो रुकिए! अपनी गाड़ी की चाबी उठाने से पहले यह जान लीजिये कि कर्नाटक वन विभाग (Forest Department) ने अब ट्रेकिंग के नियमों को लेकर काफी सख्ती कर दी है।
ऐसा न हो कि आप घंटों का सफर तय करके पहाड़ के बेस कैंप तक पहुँचें और वहां गेट पर मौजूद गार्ड आपको अंदर जाने से मना कर दे। चलिए जानते हैं आखिर विभाग ने ये कदम क्यों उठाए हैं और अब आपको क्या सावधानी बरतनी है।
आखिर ट्रेकर्स को क्यों रोका जा रहा है?
दरअसल, पिछले कुछ महीनों में कर्नाटक के लोकप्रिय ट्रेकिंग स्पॉट्स पर बेतहाशा भीड़ बढ़ गई है। जहाँ शांति होनी चाहिए थी, वहां इंसानों का शोर और कचरा नज़र आने लगा। प्रकृति को बचाने और ट्रेकर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने अब 'पहले बुकिंग, फिर ट्रेकिंग' का सख्त नियम लागू कर दिया है।
अब ट्रेकिंग के लिए क्या हैं नए 'फंडे'?
- नो ऑनलाइन बुकिंग, नो एंट्री: अब वो दिन लद गए जब आप पहुंचे और रसीद कटवाकर ऊपर चले गए। अब आपको कर्नाटक इको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (KEDB) की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर पहले से स्लॉट बुक करना होगा। अगर आपके पास कन्फर्म ऑनलाइन बुकिंग नहीं है, तो गेट से वापस आना तय है।
- लिमिट में आएंगे लोग: विभाग ने हर ट्रेक के लिए रोजाना आने वाले लोगों की संख्या फिक्स कर दी है। यानी अब वहां कुंभ का मेला नहीं लगेगा। जैसे ही संख्या पूरी होगी, बुकिंग बंद हो जाएगी।
- प्लास्टिक और कचरे पर पैनी नज़र: अगर आप अपने बैग में प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट या ऐसा सामान ले जा रहे हैं जो वहां फेंक सकते हैं, तो गेट पर चेकिंग कड़ी होगी। कई जगहों पर तो अब हर एक प्लास्टिक आइटम के लिए रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉज़िट देना पड़ रहा है यानी आप कचरा वापस लाएंगे तभी पैसे वापस मिलेंगे।
- गाइड का होना ज़रूरी: सुरक्षा के लिहाज़ से कई ट्रेल्स पर अब आधिकारिक गाइड के बिना जाने की अनुमति नहीं मिल रही है, ताकि कोई जंगल में रास्ता न भटके।
ऐसा क्यों किया जा रहा है?
देखिये, हम सब खूबसूरत नज़ारे देखना चाहते हैं, लेकिन हमारे पीछे रह जाने वाले कचरे से जंगली जानवरों और पौधों को बहुत नुकसान होता है। प्रशासन का मकसद ट्रेकिंग को पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि इसे 'जिम्मेदार पर्यटन' (Responsible Tourism) में बदलना है।
मेरी सलाह
जब भी प्लान बनाएं, कम से कम 10-15 दिन पहले ऑनलाइन स्टेटस ज़रूर चेक कर लें। कोशिश करें कि वीकेंड के बजाय वर्किंग डेज़ में जाएं, ताकि आपको भीड़ भी कम मिले और शांति से कुदरत का आनंद ले सकें। साथ ही, पहाड़ों को भगवान का घर मानिये और वहां कूड़ा न छोड़कर अपनी समझदारी का परिचय दें।
आप कर्नाटक की अगली ट्रेकिंग कहाँ करने वाले हैं? क्या आपको प्रशासन के ये सख्त नियम सही लगते हैं? अपनी राय हमें कमेंट्स में ज़रूर बताएं!