अब डिग्री नहीं, स्किल्स का जमाना है: GenZ के लिए बदलते करियर ट्रेंड्स और चुनौतियाँ

Unemployed man

आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में डिग्रियों की चमक फीकी पड़ती जा रही है। अब सिर्फ डिग्री होना करियर की गारंटी नहीं है। एक नई रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि 83% इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स और 46% बिजनेस ग्रेजुएट्स को ना तो नौकरी मिल रही है और ना ही इंटर्नशिप का मौका। कंपनियां अब कैंडिडेट्स की शैक्षणिक योग्यता से ज़्यादा उनके स्किल्स और प्रैक्टिकल नॉलेज को अहमियत दे रही हैं।

अब स्किल्स बनेंगी पहचान

रिपोर्ट के मुताबिक, 73% रिक्रूटर्स अब कैंडिडेट्स के पास मौजूद स्किल्स पर फोकस कर रहे हैं, ना कि सिर्फ उनकी डिग्री पर। इसका सीधा फायदा उन युवाओं को मिल रहा है जो नई चीज़ें सीखने को तैयार हैं, अपस्किलिंग पर ध्यान दे रहे हैं और अपने हुनर को लगातार निखार रहे हैं।

इस ट्रेंड का मतलब साफ है – स्किल्स है तो जॉब है। फिर चाहे वो डिजिटल मार्केटिंग हो, कोडिंग, डिजाइनिंग या डेटा एनालिटिक्स – जो तेजी से बढ़ते सेक्टर्स हैं।

GenZ का नया ट्रेंड: फ्रीलांसिंग और साइड हसल्स

GenZ प्रोफेशनल्स सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहते। उन्हें फाइनेंशियल फ्रीडम और फ्लेक्सिबिलिटी दोनों चाहिए। इसीलिए 51% GenZ युवा एक्स्ट्रा इनकम के लिए फ्रीलांसिंग कर रहे हैं – कोई कंटेंट लिख रहा है, कोई ग्राफिक डिजाइनिंग, तो कोई कोडिंग के ज़रिए क्लाइंट्स को सर्विस दे रहा है।

इसका एक बड़ा कारण है – महीने की सैलरी से ज्यादा, स्किल्स से कमा सकने का आत्मविश्वास।

जेंडर पे गैप अभी भी चिंता का विषय

हालांकि प्रोफेशनल दुनिया में कई बदलाव हो रहे हैं, लेकिन जेंडर पे गैप अब भी एक हकीकत है। रिपोर्ट के अनुसार, हर दो में से एक महिला प्रोफेशनल को 6 लाख सालाना से कम का पैकेज मिल रहा है, जबकि पुरुष सहकर्मी इससे अधिक सैलरी ले रहे हैं।

यह फर्क बताता है कि भले ही महिलाएं उतनी ही मेहनत और स्किल्स लेकर आती हों, उन्हें बराबरी की सैलरी नहीं दी जा रही – जो कि वर्कप्लेस इक्वलिटी के लिए एक चुनौती है।

वर्कप्लेस कल्चर को लेकर बदलती सोच

GenZ न सिर्फ काम करने का तरीका बदल रही है, बल्कि वर्कप्लेस की उम्मीदें भी नई हैं। 77% युवा चाहते हैं कि उनका परफॉर्मेंस रिव्यू महीने में एक बार या प्रोजेक्ट-बेस्ड हो, ना कि साल में एक बार। वे चाहते हैं कि प्रोफेशनल ग्रोथ लगातार मापी जाए और फीडबैक सिस्टम ज्यादा पारदर्शी हो।

ये सोच परंपरागत कंपनियों के लिए एक चेतावनी है कि अगर वो टैलेंट बनाए रखना चाहती हैं, तो उन्हें अपने वर्क कल्चर में बदलाव लाना होगा।

टेक कंपनियों की बनी पहली पसंद

टेक्नोलॉजी अब भी युवाओं की पहली पसंद बनी हुई है। खासतौर पर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी कंपनियां आज भी टॉप ड्रीम एंप्लॉयर हैं। इन कंपनियों का वर्क कल्चर, ग्रोथ ऑपर्च्युनिटी और इनोवेटिव माहौल GenZ को खासा आकर्षित करता है।

क्या करना चाहिए युवाओं को?

इस रिपोर्ट से साफ है कि अब स्किल-बेस्ड हायरिंग का ज़माना है। ऐसे में जरूरी है कि युवा:

  • लगातार अपना स्किलसेट अपडेट करें
  • इंडस्ट्री की मांग को समझें और उसी के अनुसार खुद को ढालें
  • फ्रीलांसिंग, साइड प्रोजेक्ट्स, स्टार्टअप एक्सपेरिमेंट्स से अपने करियर की दिशा बनाएं
  • और सबसे ज़रूरी – नेटवर्किंग और पर्सनल ब्रांडिंग को न भूलें

अब बात सिर्फ जॉब पाने की नहीं है, कैरियर खुद बनाने की है।