सरकार ने आज संसद के निचले सदन लोकसभा में नया आयकर विधेयक 2025 पेश किया। विधेयक को लोकसभा में पेश किये जाने के बाद समीक्षा के लिए इसे प्रवर समिति के पास भेज दिया गया। इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा की कार्यवाही 9 मार्च तक स्थगित कर दी है। अब बजट सत्र का दूसरा सत्र 10 मार्च को सुबह 11 बजे शुरू होगा। समिति दूसरे सत्र के पहले दिन अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकती है। जब यह समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर देगी, तो संसद विधेयक को पारित करने पर विचार करेगी।
नया आयकर विधेयक आयकर अधिनियम 1961 का स्थान लेगा। नये विधेयक में कई बदलाव किये गये हैं। यह जानकारी इसकी रिलीज से पहले बुधवार को जारी की गई एक मसौदा प्रति में सामने आई। नये विधेयक को पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बताया गया है। इसमें डिजिटलीकरण के माध्यम से कर प्रणाली को सरल बनाने, कर भुगतान में सुधार और कर चोरी पर सख्त नियमों का प्रस्ताव है।
आयकर विधेयक 2025 के बारे में महत्वपूर्ण बातें
1. बिल में पन्नों की संख्या कम कर दी गई है।
नए आयकर बिल में पहला और बड़ा बदलाव यह किया गया है कि इसे पहले की तुलना में कुछ हद तक संक्षिप्त और सरल शब्दों में रखा गया है ताकि आम आदमी को इसे समझने में आसानी हो। उदाहरण के लिए, 1961 का आयकर विधेयक 880 पृष्ठों का था। लेकिन छह दशक बाद अब इसमें शामिल पृष्ठों की संख्या घटाकर 622 कर दी गई है। नये कर विधेयक में 536 धाराएं और 23 अध्याय हैं।
2. ‘कर वर्ष’ की अवधारणा
आज प्रस्तुत नये विधेयक में कर वर्ष की अवधारणा प्रस्तुत की गई है। जो अब तक प्रयुक्त कर निर्धारण वर्ष और पूर्व वर्ष का स्थान लेगा। आमतौर पर देखा जाता है कि करदाता कर दाखिल करते समय मूल्यांकन और वित्तीय वर्ष को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। लेकिन अब इसे समाप्त करने के बजाय केवल कर वर्ष का ही उपयोग किया जाएगा। उदाहरण के लिए, 1 अप्रैल, 2025 से 31 मार्च, 2026 तक का कर वर्ष 2025-26 होगा। इसका मतलब यह है कि वित्तीय वर्ष के पूरे 12 महीने अब कर वर्ष माने जाएंगे।
3. मानक कटौती
नए कर बिल के तहत, यदि आप वेतनभोगी व्यक्ति हैं, तो आपको अपनी पुरानी कर व्यवस्था के तहत 50,000 रुपये की मानक कटौती मिलती रहेगी, लेकिन यदि आप नई कर व्यवस्था का विकल्प चुनते हैं, तो यह कटौती 75,000 रुपये तक होगी। इसके साथ ही जनवा कर व्यवस्था के तहत कर स्लैब में कोई बदलाव नहीं होगा और बजट में घोषित दरें अपरिवर्तित रहेंगी।
4 लाख रुपये तक की आय – कोई कर नहीं
4 लाख रुपये 1 से 8 लाख रुपये तक की आय – 5 प्रतिशत कर
8 लाख रुपये 1 से 12 लाख रुपये तक की आय – 10 प्रतिशत कर
12 लाख रुपये 1 से 16 लाख रुपये तक की आय – 15 प्रतिशत कर
16 लाख रुपये 1 से 20 लाख रुपये तक की आय 20 प्रतिशत कर
4. सीबीडीटी को मिली यह शक्ति
आयकर अधिनियम 1961 की तुलना में नए कर विधेयक में किए गए बदलावों में अगला बड़ा बदलाव केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी से संबंधित है। विधेयक के अनुसार, पहले आयकर विभाग को विभिन्न कर योजनाएं शुरू करने के लिए संसद से संपर्क करना पड़ता था। लेकिन नए कर अधिनियम 2025 के अनुसार, अब सीबीडीटी को स्वतंत्र रूप से ऐसी योजनाएं शुरू करने का अधिकार दिया गया है। इसका उद्देश्य नौकरशाही विलंब की समस्या को समाप्त करना है।
5. पूंजीगत लाभ की दरें अपरिवर्तित रहेंगी।
ड्राफ्ट में शेयर बाजार के लिए अल्पकालिक पूंजीगत लाभ अवधि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। धारा 101(बी) के तहत 12 महीने तक की अवधि को अल्पकालिक पूंजीगत लाभ माना जाएगा। इसके अलावा इसकी दरें भी वही रखी गई हैं। अल्पावधि पूंजीगत लाभ कर को 20 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। जबकि दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के तहत 12.5 प्रतिशत का कर लागू होगा।
6. पेंशन, एनपीएस और बीमा पर छूट:
नए आयकर विधेयक के तहत पेंशन, एनपीएस अंशदान और बीमा पर कर कटौती जारी रहेगी। सेवानिवृत्ति निधि, ग्रेच्युटी और पीएफ अंशदान को भी कर छूट के दायरे में रखा गया है। ईएलएसएस म्यूचुअल फंड में निवेश पर भी कर छूट मिलेगी।
7. कर चोरी पर जुर्माना:
नए कर विधेयक में कर चोरी करने वालों पर कठोर दंड और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जो लोग जानबूझकर कर चोरी करते हैं, उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। करों का भुगतान न करने पर अधिक ब्याज एवं जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी आय छिपाने का प्रयास करता है तो उसका खाता जब्त किया जा सकता है। इसके अलावा, गलत या अधूरी जानकारी देने पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।
8. कर भुगतान को पारदर्शी बनाने के लिए ई-केवाईसी जरूरी
केंद्र सरकार का लक्ष्य नए कर विधेयक के जरिए मौजूदा कर प्रणाली को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाना है। इसके लिए ई-केवाईसी और ऑनलाइन टैक्स भुगतान को अनिवार्य बनाया जा रहा है। ई-फाइलिंग को अनिवार्य बनाने से कर भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी।
9. कृषि आय पर कर छूट:
नये कर विधेयक में कृषि आय को कुछ शर्तों के अधीन कर मुक्त रखा गया है। धार्मिक ट्रस्टों, संस्थाओं और धर्मार्थ संस्थाओं को दी गई राशि पर कर छूट का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही इलेक्टोरल ट्रस्ट को भी कर से छूट दी गई है।
10. यह बदलाव कर-संबंधी विवादों को कम करने के लिए किया गया है।
1961 के कर विधेयक में कई अस्पष्ट प्रावधानों के कारण करदाताओं और सरकार के बीच विवाद पैदा हुए हैं और मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। नया कर विधेयक स्पष्ट नियमों और सरल शब्दों के साथ पेश किया जा रहा है। जिससे समझने में आसानी होगी और इसके साथ ही विवादों की संख्या में भी कमी आने की उम्मीद है।