सिस्टम की लापरवाही ने उजाड़ दी माँ की कोख, रांची में खुले नाले में गिरने से बच्चे की मौत

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News India Live, Digital Desk : झारखंड की राजधानी रांची से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने रूह कँपा दी है। रांची के रिहाइशी इलाके में एक 2 साल का छोटा सा बच्चा खेलते-खेलते घर के बाहर गया और पास के ही एक खुले सीवेज नाले में गिर गया। जब तक घरवाले उसे ढूंढ पाते और नाले से बाहर निकालते, तब तक देर हो चुकी थी।

खिलखिलाता बचपन और फिर मातम
सर्द और गहरी खामोशी इस वक्त उस परिवार के आँगन में पसरी है जहाँ कल तक नन्हे क़दमों की आहट सुनाई देती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इन खुले नालों के बारे में आगाह किया था। सीवेज की पाइपलाइन और नाले तो बने हैं, लेकिन उन पर ढक्कन (Lid) नहीं लगाए गए या फिर वो टूट चुके हैं। यही 'खुली मौत' उस मासूम के लिए काल बन गई।

आखिर ज़िम्मेदार कौन?
सवाल खड़ा होता है नगर निगम और प्रशासन पर। हर बार जब ऐसी कोई अनहोनी होती है, तो जाँच के आदेश दिए जाते हैं, मुआवजा घोषित होता है और कुछ दिनों के लिए फाइलें गरमा जाती हैं। लेकिन कुछ समय बाद फिर सब ठंडा पड़ जाता है। क्या एक मासूम की ज़िंदगी की कीमत बस सरकारी कागजों में दर्ज होना भर है? रांची को स्मार्ट बनाने की होड़ में क्या हम अपने बच्चों के लिए बुनियादी सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं?

आक्रोशित हैं शहर के लोग
इस घटना के बाद इलाके में भारी गम और गुस्सा देखा जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अधिकारियों के घर के बच्चे भी इन्ही असुरक्षित सड़कों पर चलते हैं? मानसून हो या सामान्य दिन, खुले हुए नाले किसी भी राहगीर के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। आज तो उस मासूम की जान गई है, कल ये हादसा किसी के भी साथ हो सकता है।

सावधानी ही एकमात्र विकल्प?
फिलहाल तो स्थिति यह है कि जनता को खुद ही अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा करनी पड़ रही है। बारिश के मौसम में इन खतरों की संभावना और भी बढ़ जाती है। वन विभाग हो या नगर निगम, इस लापरवाही को टाला जा सकता था यदि समय रहते उन गटरों पर ढक्कन लगवाए गए होते।

हमारी संवेदना:
हिलसा के उस मासूम और उसके परिवार के लिए हम सिर्फ दुआ ही कर सकते हैं, लेकिन सवाल फिर वही है—अगला नंबर किसका? क्या अब भी प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर एक और मासूम के इस गढ्ढे में गिरने का इंतज़ार होगा?

आप इस लापरवाही पर क्या कहेंगे? क्या रांची प्रशासन को सख्त कानूनी कार्यवाही का सामना नहीं करना चाहिए? अपनी राय हमें जरूर साझा करें।